रायपुर में राशन माफियाओं द्वारा हजारों गरीबों का हक छीने जाने का आरोप, शिकायतों के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होने से प्रशासन पर सवाल।
रायपुर। राजधानी रायपुर सहित जिले के कई इलाकों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीबों को मिलने वाले राशन में बड़े स्तर पर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि राशन माफियाओं ने हजारों गरीब परिवारों के हक का अनाज हड़प लिया, लेकिन शिकायतें और प्रारंभिक जांच के बावजूद अब तक किसी भी मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि कई राशन दुकानों में महीनों से हितग्राहियों को पूरा राशन नहीं मिल रहा है। कहीं अंगूठा लगवाकर राशन नहीं दिया जा रहा, तो कहीं मशीन खराब होने का बहाना बनाकर हितग्राहियों को लौटा दिया जाता है। वहीं, कागजों में पूरे वितरण की एंट्री कर दी जाती है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ उचित मूल्य दुकानों में बड़े पैमाने पर फर्जी वितरण दर्शाकर सरकारी चावल और अन्य खाद्यान्न बाजार में बेच दिए गए। गरीब परिवारों के नाम पर उठान दिखाकर अनाज खुले बाजार में खपाया गया, जिससे हजारों जरूरतमंद परिवारों को महीनों तक राशन से वंचित रहना पड़ा।
पीड़ित हितग्राहियों का कहना है कि उन्होंने कई बार खाद्य विभाग और स्थानीय प्रशासन से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जांच के नाम पर फाइलें घूमती रहीं और संबंधित दुकानदारों को केवल मौखिक चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
सूत्र बताते हैं कि आंतरिक जांच में कई दुकानों पर गड़बड़ी की पुष्टि भी हुई है, लेकिन इसके बावजूद आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किए गए। इससे राशन माफियाओं के हौसले और बुलंद हो गए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि गरीबों के अधिकारों पर सीधा हमला है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली का उद्देश्य जरूरतमंदों को समय पर और पूरा राशन उपलब्ध कराना है, लेकिन मिलीभगत के चलते यही व्यवस्था भ्रष्टाचार का शिकार बनती जा रही है।
कई इलाकों में यह भी शिकायत सामने आई है कि पात्र हितग्राहियों के नाम सूची से हटा दिए गए या उनके स्थान पर फर्जी नाम जोड़ दिए गए। इससे वास्तविक लाभार्थी सरकारी सहायता से वंचित रह गए।
खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अब तक किसी भी राशन दुकान संचालक पर एफआईआर दर्ज नहीं होने से प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो गरीबों के हक पर डाका डालने वाली यह व्यवस्था और मजबूत होती जाएगी। जरूरत है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्काल आपराधिक प्रकरण दर्ज कर दोषियों को जेल भेजा जाए।
रायपुर सहित जिलेभर के नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि राशन घोटाले में शामिल माफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और गरीबों को उनका हक सुनिश्चित कराया जाए।

