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रायपुर–विशाखापट्टनम कॉरिडोर: वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम, 28 मंकी कैनोपी और हाथियों के लिए 8 ओवरब्रिज बनाए जा रहे

📑 इस लेख मेंरायपुर–विशाखापट्टनम कॉरिडोर पर वन्यजीव संरक्षण के लिए 28 मंकी कैनोपी और हाथियों की सुरक्षित आवाजाही हेतु 8 ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं।हाथियों की राह में…

📅 29 January 2026, 11:21 am अपडेट: 16 May 2026
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रायपुर–विशाखापट्टनम कॉरिडोर पर वन्यजीव संरक्षण के लिए 28 मंकी कैनोपी और हाथियों की सुरक्षित आवाजाही हेतु 8 ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं।

रायपुर।–विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर अब सिर्फ़ विकास का रास्ता नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण की नई मिसाल बनने जा रहा है। इस कॉरिडोर पर सड़क और रेल परियोजनाओं के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए 28 मंकी कैनोपी और हाथियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए 8 ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं।

यह परियोजना छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के घने वन क्षेत्रों से होकर गुजरती है, जहां हाथी, बंदर, भालू और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही लगातार बनी रहती है।

हाथियों की राह में नहीं आएगा विकास

रायपुर–विशाखापट्टनम कॉरिडोर उन इलाकों से गुजरता है, जहां हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर मौजूद हैं। बीते वर्षों में सड़क और रेल दुर्घटनाओं में कई हाथियों की मौत हुई थी। इसी को देखते हुए सरकार और वन विभाग ने यह निर्णय लिया कि विकास के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

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वास्तु शास्त्र के प्रामाणिक उपाय

इन 8 ओवरब्रिजों को खास तौर पर हाथियों के प्राकृतिक मार्गों पर बनाया जा रहा है, ताकि वे बिना किसी डर या बाधा के एक जंगल से दूसरे जंगल तक जा सकें।

28 मंकी कैनोपी: पेड़ों से पेड़ों तक सुरक्षित सफ़र

कॉरिडोर के जंगलों में रहने वाले बंदरों के लिए 28 मंकी कैनोपी बनाई जाएंगी। ये कैनोपी सड़क के ऊपर बनाई जाएंगी, जिससे बंदर बिना सड़क पर उतरे एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक जा सकें।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, इससे:

  • सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी
  • बंदरों का प्राकृतिक व्यवहार सुरक्षित रहेगा
  • इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव घटेगा

पर्यावरण संतुलन और आधुनिक इंजीनियरिंग का मेल

इस परियोजना में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ओवरब्रिजों की चौड़ाई, ऊंचाई और संरचना इस तरह डिजाइन की गई है कि हाथियों को किसी तरह का डर महसूस न हो।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन संरचनाओं पर:

  • प्राकृतिक मिट्टी और घास बिछाई जाएगी
  • आसपास के पेड़-पौधों से मिलती-जुलती हरियाली रखी जाएगी
  • शोर और रोशनी को न्यूनतम किया जाएगा

स्थानीय ग्रामीणों को भी होगा लाभ

इस परियोजना से सिर्फ़ वन्यजीव ही नहीं, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को भी राहत मिलेगी। अक्सर हाथियों की आवाजाही के कारण गांवों में फसल नुकसान और जान-माल का खतरा बना रहता था। ओवरब्रिज बनने से हाथियों का मार्ग स्पष्ट रहेगा और गांवों में घुसपैठ की घटनाएं कम होंगी।

केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पहल

रायपुर–विशाखापट्टनम कॉरिडोर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसे राज्य सरकार और वन विभाग के सहयोग से लागू किया जा रहा है। पर्यावरण मंत्रालय की मंज़ूरी के बाद इस प्रोजेक्ट में वन्यजीव संरक्षण के विशेष प्रावधान जोड़े गए हैं।

विशेषज्ञ इसे देश के अन्य कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स के लिए मॉडल मान रहे हैं।

वन्यजीव संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संदेश

पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि हर बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना में इस तरह की योजना बनाई जाए, तो विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन संभव है।

रायपुर–विशाखापट्टनम कॉरिडोर यह संदेश देता है कि:
विकास ज़रूरी है, लेकिन प्रकृति की कीमत पर नहीं।

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