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विधायक-महापौर के दावे पर सवाल 42 दिन बाद भी नहीं सुधरी स्थिति, जीवनदायिनी खारुन में अब भी मिल रहा गंदा पानी

📑 इस लेख मेंरायपुर में खारुन नदी से आ रहे गंदे पानी पर विधायक-महापौर का पांच दिन का दावा विफल, 42 दिन बाद भी लोगों को शुद्ध पेयजल…

📅 20 February 2026, 11:41 am अपडेट: 16 May 2026
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रायपुर में खारुन नदी से आ रहे गंदे पानी पर विधायक-महापौर का पांच दिन का दावा विफल, 42 दिन बाद भी लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिला।

रायपुर। रायपुर शहर के नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने का दावा एक बार फिर जमीनी हकीकत से टकराता नजर आ रहा है। विधायक और महापौर द्वारा “पांच दिन में व्यवस्था सुधारने” के आश्वासन के 42 दिन बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। शहर की जीवनदायिनी मानी जाने वाली खारुन नदी से सप्लाई हो रहा पानी अब भी गंदा और संदिग्ध गुणवत्ता वाला बताया जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई इलाकों में अब भी बदबूदार, मटमैला और कभी-कभी झागयुक्त पानी आ रहा है, जिससे स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है।


1️⃣ पांच दिन में सुधार का दिया गया था भरोसा

बीते दिनों जल आपूर्ति में गंदे पानी की शिकायतों के बाद विधायक और महापौर ने सार्वजनिक रूप से आश्वासन दिया था कि पांच दिनों के भीतर फिल्ट्रेशन सिस्टम और पाइपलाइन से जुड़ी तकनीकी खामियों को दूर कर दिया जाएगा।
लेकिन 42 दिन बीत जाने के बाद भी नागरिकों को साफ पानी नहीं मिल पा रहा है।


2️⃣ खारुन से आने वाला पानी अब भी संदिग्ध

नगर के कई हिस्सों में खारुन नदी आधारित जलापूर्ति योजना से आने वाले पानी की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं। लोगों का कहना है कि पानी में गाद, पीला रंग और बदबू साफ महसूस होती है।
कुछ स्थानों पर तो सुबह और शाम दोनों समय पानी का रंग अलग-अलग नजर आ रहा है।


3️⃣ रहवासियों में बढ़ता आक्रोश

स्थानीय रहवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार निगम, वार्ड कार्यालय और हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया।
लोगों का आरोप है कि अधिकारी केवल अस्थायी सफाई और फ्लशिंग कराकर मामला निपटा देते हैं, जबकि असली समस्या जस की तस बनी रहती है।


4️⃣ बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर खतरा

गंदे पानी की वजह से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों में पेट दर्द, उल्टी-दस्त और त्वचा संक्रमण जैसी शिकायतें बढ़ने लगी हैं।
कई परिवारों को मजबूरी में बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।


5️⃣ तकनीकी खामी या लापरवाही?

जानकारों के अनुसार जलशोधन संयंत्रों में नियमित मेंटेनेंस, क्लोरीनेशन की सही मात्रा और फिल्टर मीडिया की समय पर सफाई नहीं होने से ऐसी स्थिति बनती है।
इसके अलावा पुरानी पाइपलाइन में लीकेज और सीवेज लाइन से मिलान भी गंदे पानी का बड़ा कारण हो सकता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद संबंधित विभाग स्थायी तकनीकी समाधान लागू नहीं कर रहा।


6️⃣ निगम की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक?

नगर निगम द्वारा यह दावा किया गया था कि जल संयंत्रों में सुधार कार्य शुरू कर दिए गए हैं और पानी की गुणवत्ता पर निगरानी रखी जा रही है।
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश प्रभावित इलाकों में पानी की स्थिति में कोई स्पष्ट सुधार नजर नहीं आ रहा है।

नागरिकों का कहना है कि निरीक्षण और बैठकों की जानकारी तो मिलती है, लेकिन फील्ड स्तर पर असर नहीं दिख रहा।


7️⃣ पांच दिन बनाम 42 दिन, जवाब कौन देगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जनप्रतिनिधियों ने खुद पांच दिन में सुधार का भरोसा दिलाया था, तो 42 दिन बाद भी जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई?
न तो अब तक किसी अधिकारी पर कार्रवाई की सूचना सामने आई है और न ही किसी समयबद्ध कार्ययोजना को सार्वजनिक किया गया है।

शहरवासियों का कहना है कि सिर्फ बयान देने से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि जवाबदेही तय करनी होगी।


8️⃣ नागरिकों ने दी आंदोलन की चेतावनी

परेशान नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं हुई तो वे नगर निगम कार्यालय और जल विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
लोगों की मांग है कि जलशोधन संयंत्र, पाइपलाइन नेटवर्क और खारुन से पानी उठाने की पूरी व्यवस्था की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

नागरिकों का कहना है कि खारुन नदी केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि रायपुर की जीवनरेखा है और उसके पानी से इस तरह का समझौता अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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