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प्राइवेट स्कूलों ने हाईकोर्ट में उठाया सवाल, जानिए विवाद का पूरा कारण

📑 इस लेख मेंछत्तीसगढ़ में 5वीं-8वीं बोर्ड परीक्षा पर प्राइवेट स्कूलों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, बच्चों पर मानसिक दबाव और शिक्षा नीति पर उठा सवाल।क्या है…

📅 23 January 2026, 2:57 pm अपडेट: 16 May 2026
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छत्तीसगढ़ में 5वीं-8वीं बोर्ड परीक्षा पर प्राइवेट स्कूलों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, बच्चों पर मानसिक दबाव और शिक्षा नीति पर उठा सवाल।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कक्षा 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षा को लेकर एक बड़ा शैक्षणिक विवाद सामने आ गया है। प्रदेश के कई प्राइवेट स्कूल संचालकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और इसे शिक्षा की मूल भावना के खिलाफ बताया है। याचिका में कहा गया है कि प्रारंभिक और माध्यमिक स्तर पर बोर्ड परीक्षा लागू करना बच्चों पर अनावश्यक मानसिक दबाव डाल रहा है।

इस मामले ने राज्य की शिक्षा नीति, शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों के बीच नई बहस छेड़ दी है।


क्या है 5वीं-8वीं बोर्ड परीक्षा का नियम?

छत्तीसगढ़ सरकार ने नई शिक्षा नीति के तहत—

  • कक्षा 5वीं और 8वीं में बोर्ड पैटर्न की परीक्षा लागू की
  • राज्य स्तर पर मूल्यांकन प्रणाली बनाई
  • फेल होने पर पूरक परीक्षा का प्रावधान किया

सरकार का तर्क है कि इससे—

  • पढ़ाई की गुणवत्ता सुधरेगी
  • बच्चों की सीखने की क्षमता का मूल्यांकन बेहतर होगा
  • स्कूलों की जवाबदेही बढ़ेगी

प्राइवेट स्कूलों की आपत्ति

प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन का कहना है कि—

  • 5वीं-8वीं जैसी प्रारंभिक कक्षाओं में बोर्ड परीक्षा उचित नहीं
  • इससे बच्चों में परीक्षा का भय बढ़ रहा है
  • शिक्षण की जगह केवल परीक्षा केंद्रित पढ़ाई हो रही है
  • छोटे बच्चों पर मानसिक दबाव पड़ रहा है

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में यह भी कहा कि—

  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम की भावना के विपरीत है
  • प्रारंभिक शिक्षा को तनावमुक्त बनाया जाना चाहिए
  • बोर्ड परीक्षा से ड्रॉपआउट का खतरा बढ़ेगा

हाईकोर्ट में क्या दलील दी गई?

याचिका में मुख्य रूप से यह मांग की गई है कि—

  • 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षा को रद्द किया जाए
    या
  • इसे केवल आंतरिक मूल्यांकन तक सीमित किया जाए

स्कूल संचालकों ने कहा कि—

  • सरकार ने बिना पर्याप्त परामर्श के यह फैसला लिया
  • स्कूलों और अभिभावकों की राय नहीं ली गई
  • ग्रामीण और कमजोर वर्ग के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होंगे

सरकार का पक्ष

शिक्षा विभाग का कहना है कि—

  • यह व्यवस्था नई शिक्षा नीति के अनुरूप है
  • इसका उद्देश्य फेल करना नहीं, बल्कि सीखने की स्थिति समझना है
  • कमजोर छात्रों को सुधार का अवसर दिया जा रहा है
  • इससे पढ़ाई में लापरवाही रुकेगी

सरकार का दावा है कि यह परीक्षा छंटनी नहीं, सुधार प्रणाली का हिस्सा है।


अभिभावकों और शिक्षकों की मिली-जुली राय

कुछ अभिभावकों का कहना है कि—

  • बोर्ड परीक्षा से बच्चों में अनुशासन बढ़ा है
  • पढ़ाई नियमित हो रही है

वहीं कई शिक्षकों का मानना है कि—

  • छोटे बच्चों के लिए यह प्रणाली बहुत कठोर है
  • रचनात्मक शिक्षा प्रभावित हो रही है

आगे क्या?

हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जारी है। यदि कोर्ट प्राइवेट स्कूलों की दलीलों से सहमत होता है तो—

  • सरकार को नीति में बदलाव करना पड़ सकता है
  • 5वीं-8वीं बोर्ड परीक्षा की व्यवस्था में संशोधन संभव है

यह फैसला प्रदेश की स्कूली शिक्षा की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।


निष्कर्ष

5वीं-8वीं बोर्ड परीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि शिक्षा की सोच और बच्चों के भविष्य से जुड़ा बड़ा प्रश्न बन चुकी है। अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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