छत्तीसगढ़ में कमिश्नरी सिस्टम को मजबूत करते हुए कलेक्टर के 17 अधिकार पुलिस कमिश्नर को देने की तैयारी, NSA और शस्त्र लाइसेंस तक की शक्तियां मिलेंगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रस्तावित बदलाव के तहत कलेक्टर के 17 महत्वपूर्ण अधिकार पुलिस कमिश्नर को सौंपे जाने की तैयारी है। इन अधिकारों में शस्त्र लाइसेंस जारी करने, निरस्त करने से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने तक की शक्तियां शामिल होंगी।
यह बदलाव लागू होने के बाद कानून-व्यवस्था से जुड़े कई अहम फैसले सीधे पुलिस कमिश्नर स्तर पर लिए जा सकेंगे, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया तेज होने का दावा किया जा रहा है।
क्या है कमिश्नरी सिस्टम का प्रस्ताव?
गृह विभाग द्वारा तैयार किए गए नए खाके के अनुसार, बड़े शहरों में कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कलेक्टर और एसपी मॉडल की जगह पुलिस कमिश्नर मॉडल को मजबूत किया जा रहा है। इसमें मजिस्ट्रियल अधिकारों का बड़ा हिस्सा पुलिस कमिश्नर को दिया जाएगा।
फिलहाल ये अधिकार जिला कलेक्टर के पास होते हैं, लेकिन नए सिस्टम में पुलिस कमिश्नर स्वयं कई निर्णायक कदम उठा सकेंगे।
कौन-कौन से 17 अधिकार मिलेंगे पुलिस कमिश्नर को?
प्रस्ताव के मुताबिक पुलिस कमिश्नर को मिलने वाले प्रमुख अधिकारों में शामिल हैं—
- शस्त्र लाइसेंस जारी और निरस्त करने का अधिकार
- धारा 144 लागू करने की शक्ति
- राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने का अधिकार
- दंगा नियंत्रण और निषेधाज्ञा से जुड़े निर्णय
- सार्वजनिक शांति भंग होने पर तत्काल आदेश जारी करना
- जुलूस, धरना और प्रदर्शन की अनुमति
- असामाजिक तत्वों पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई
- अपराधियों की निगरानी और नजरबंदी
- शराब, विस्फोटक और संवेदनशील सामग्री पर नियंत्रण
इन शक्तियों से पुलिस कमिश्नर को त्वरित निर्णय लेने की पूर्ण स्वतंत्रता मिलेगी।
सरकार का तर्क: फैसले होंगे तेज
गृह विभाग का मानना है कि अभी कलेक्टर और पुलिस के बीच समन्वय में समय लगता है। कई मामलों में—
- फाइलें इधर-उधर घूमती हैं
- आपात स्थिति में निर्णय में देरी होती है
कमिश्नरी सिस्टम में सभी अधिकार एक ही अधिकारी के पास होने से कानून-व्यवस्था पर तुरंत नियंत्रण संभव होगा।
प्रशासनिक संतुलन पर उठे सवाल
हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर कुछ प्रशासनिक और सामाजिक संगठनों ने सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि—
- मजिस्ट्रियल और पुलिस अधिकारों का एक ही हाथ में होना शक्ति का केंद्रीकरण है
- नागरिक अधिकारों पर असर पड़ सकता है
- NSA जैसे कड़े कानून के दुरुपयोग की आशंका बढ़ेगी
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सिस्टम में चेक एंड बैलेंस की स्पष्ट व्यवस्था जरूरी होगी।
किन शहरों में लागू हो सकता है सिस्टम?
सूत्रों के अनुसार, पहले चरण में यह व्यवस्था—
- रायपुर
- बिलासपुर
- दुर्ग-भिलाई
जैसे बड़े शहरी क्षेत्रों में लागू की जा सकती है। इसके बाद अनुभव के आधार पर अन्य जिलों में विस्तार किया जाएगा।
पहले से लागू है कई राज्यों में
देश के कई बड़े शहरों जैसे—
- दिल्ली
- मुंबई
- बेंगलुरु
- हैदराबाद
में पहले से ही पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू है, जहां पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रियल शक्तियां प्राप्त हैं।
आगे क्या?
गृह विभाग द्वारा प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कैबिनेट से मंजूरी के बाद—
- अधिसूचना जारी होगी
- अधिकारों का स्पष्ट बंटवारा तय होगा
- पुलिस अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा
निष्कर्ष
कलेक्टर के 17 अधिकार पुलिस कमिश्नर को देने का प्रस्ताव छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है। जहां एक ओर इससे कानून-व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर नागरिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी।

