पाइपेक तकनीक से कैंसर उपचार में उम्मीद की नई किरण: छत्तीसगढ़ में पहली बार पेट की झिल्ली के कैंसर का सफल उपचार
📑 इस लेख मेंरायपुर। पाइपेक तकनीक से कैंसर उपचारपाइपेक तकनीक: कैंसर उपचार में नई उम्मीदनई तकनीक के लाभउपचार प्रक्रियाडॉक्टरों की टीम का योगदानअस्पताल प्रशासन की सराहनामरीज की प्रतिक्रियाछत्तीसगढ़…

रायपुर। पाइपेक तकनीक से कैंसर उपचार
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुविधाओं में लगातार सुधार हो रहा है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के अथक प्रयासों से प्रदेश के लोगों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवाओं का लाभ मिल रहा है। इस दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के क्षेत्रीय कैंसर संस्थान ने पाइपेक (PIPAC) तकनीक के माध्यम से पेट की झिल्ली (पेरिटोनियम) के कैंसर का सफल उपचार किया है।
यह पहली बार है जब मध्य भारत के किसी सरकारी कैंसर अस्पताल में इस अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। इस नई विधि से ओडिशा की 54 वर्षीय महिला मरीज का उपचार कर उसके जीवन को बचाया गया।
पाइपेक तकनीक: कैंसर उपचार में नई उम्मीद
पाइपेक यानी प्रेशराइज्ड इंट्रापेरिटोनियल एरोसोलाइज़्ड कीमोथेरेपी कैंसर उपचार में कीमोथेरेपी का एक नवीन और उन्नत प्रकार है। यह प्रक्रिया लेप्रोस्कोपिक (न्यूनतम इनवेसिव) तकनीक पर आधारित है, जिसमें मरीज के पेट में छोटे छेद बनाकर दबावयुक्त एरोसोल के रूप में कीमोथेरेपी दवा पहुंचाई जाती है। इससे दवा कैंसर कोशिकाओं तक समान रूप से पहुंचती है और प्रभावी ढंग से उन्हें नियंत्रित करती है।
कैंसर सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. (प्रो.) आशुतोष गुप्ता की नेतृत्व वाली टीम ने इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उपचार के बाद महिला मरीज को अस्पताल से पांच दिन में छुट्टी दे दी गई, और अब वह फॉलोअप के लिए आ रही हैं।
नई तकनीक के लाभ
क्षेत्रीय कैंसर संस्थान के संचालक और पंडित नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. विवेक चौधरी ने इस सफलता पर कैंसर सर्जरी विभाग की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह विधि पेट की झिल्ली के कैंसर के इलाज के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी प्रक्रिया है। पाइपेक तकनीक कैंसर कोशिकाओं को फैलने से रोकने और अन्य अंगों को कम नुकसान पहुंचाने में सहायक है।
डॉ. चौधरी ने कहा कि पाइपेक विधि को भविष्य में कोलोरेक्टल कैंसर, डिम्बग्रंथि (ओवेरियन) कैंसर, और गैस्ट्रिक कैंसर जैसी बीमारियों के उपचार में व्यापक रूप से उपयोग किया जा सकता है।
उपचार प्रक्रिया
कैंसर सर्जन डॉ. आशुतोष गुप्ता ने बताया कि पाइपेक प्रक्रिया में मरीज के पेट में दो छोटे छेद (एक्सेस पोर्ट) बनाए जाते हैं। इनमें से एक पोर्ट का उपयोग पेट की झिल्ली को फुलाने के लिए किया जाता है, जबकि दूसरे पोर्ट से दबावयुक्त एरोसोल कीमोथेरेपी दवा दी जाती है।
- दवा को पेट की झिल्ली में 30 मिनट तक वितरित किया जाता है।
- इसके बाद उपकरणों को हटा लिया जाता है और छेद को बंद कर दिया जाता है।
- इस प्रक्रिया से कैंसर कोशिकाओं तक दवा की अधिक सांद्रता पहुंचती है, जिससे उपचार अधिक प्रभावी हो जाता है।
डॉ. गुप्ता ने यह भी बताया कि इस तकनीक से मतली, उल्टी, भूख न लगना, और अन्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं में कमी आती है। इसके अलावा, यह लीवर और किडनी जैसे अंगों को नुकसान से बचाने में मददगार है।
डॉक्टरों की टीम का योगदान
इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने वाली टीम में डॉ. आशुतोष गुप्ता, डॉ. किशन सोनी, डॉ. राजीव जैन, डॉ. गुंजन अग्रवाल, और एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. शशांक शामिल रहे। टीम ने अत्यंत निष्ठा और कुशलता के साथ इस उपचार को अंजाम दिया।
अस्पताल प्रशासन की सराहना
डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कैंसर सर्जरी विभाग की इस उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने कहा कि अस्पताल के डॉक्टरों की निष्ठा और मेहनत से मरीजों का भरोसा इस संस्थान पर हमेशा बना रहा है।
मरीज की प्रतिक्रिया
ओडिशा की महिला मरीज और उनके परिवार ने इस उपचार के लिए डॉक्टरों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा प्रणाली और डॉक्टरों के प्रयासों ने उन्हें एक नया जीवन दिया है।
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं का सशक्तिकरण
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रयासों से न केवल आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का समावेश हो रहा है, बल्कि दूरस्थ इलाकों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है।
पाइपेक तकनीक का छत्तीसगढ़ में पहली बार सफल उपयोग इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों को छू रही हैं।
भविष्य की संभावनाएं
डॉ. विवेक चौधरी ने कहा कि पाइपेक तकनीक कैंसर उपचार में एक क्रांतिकारी कदम है। इसका उपयोग अन्य प्रकार के उन्नत कैंसर के इलाज में भी किया जा सकता है। उन्होंने इस तकनीक को और अधिक मरीजों तक पहुंचाने के लिए प्रयास तेज करने का वादा किया।
निष्कर्ष
पाइपेक तकनीक से पेट की झिल्ली के कैंसर का सफल उपचार छत्तीसगढ़ के चिकित्सा क्षेत्र में एक मील का पत्थर है। यह उपलब्धि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तिकरण और मरीजों के जीवन को बेहतर बनाने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। आधुनिक चिकित्सा प्रणाली और डॉक्टरों के समर्पण से कैंसर जैसी जटिल बीमारियों के उपचार में अब नई उम्मीदें जगी हैं।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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