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आयुष्मान योजना में 2100 करोड़ का भुगतान अटका समय पर राशि नहीं मिलने से अस्पतालों पर बढ़ा दबाव, इलाज व्यवस्था प्रभावित

📑 इस लेख मेंछत्तीसगढ़ में आयुष्मान योजना के तहत 2100 करोड़ रुपये का भुगतान अटका, समय पर राशि नहीं मिलने से निजी और सरकारी अस्पतालों पर दबाव बढ़ा।इलाज…

📅 13 January 2026, 3:53 pm अपडेट: 16 May 2026
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छत्तीसगढ़ में आयुष्मान योजना के तहत 2100 करोड़ रुपये का भुगतान अटका, समय पर राशि नहीं मिलने से निजी और सरकारी अस्पतालों पर दबाव बढ़ा।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत इलाज कराने वाले मरीजों और अस्पतालों के लिए बड़ी चिंता की स्थिति सामने आई है। योजना के अंतर्गत करीब 2100 करोड़ रुपये का भुगतान अब तक लंबित है। समय पर भुगतान नहीं होने से निजी और सरकारी अस्पतालों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ने लगा है।

राज्यभर के कई निजी अस्पतालों ने भुगतान में हो रही देरी को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि लंबे समय से क्लेम की राशि अटकी होने के कारण अस्पतालों के संचालन, स्टाफ वेतन, दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की व्यवस्था प्रभावित हो रही है।


इलाज जारी रखना चुनौती बना

आयुष्मान योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाती है। लेकिन भुगतान लंबित रहने से कई अस्पतालों ने—

  • नए आयुष्मान मरीजों का इलाज सीमित किया
  • कुछ जगहों पर कैशलेस सुविधा अस्थायी रूप से बंद की
  • इलाज से पहले अतिरिक्त दस्तावेज या समय की मांग शुरू की

हालांकि अस्पतालों का कहना है कि मरीजों के हितों को ध्यान में रखते हुए वे अब भी इलाज जारी रखने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यह स्थिति ज्यादा समय तक नहीं चल सकती।


निजी अस्पताल सबसे ज्यादा प्रभावित

निजी अस्पतालों को आयुष्मान योजना के तहत इलाज का भुगतान सीधे सरकार से मिलता है। भुगतान में देरी के कारण—

  • अस्पतालों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है
  • बैंक लोन और सप्लायर भुगतान में दिक्कत आ रही है
  • मेडिकल स्टाफ पर अतिरिक्त कार्य दबाव बढ़ गया है

कई अस्पताल संचालकों का कहना है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो उन्हें आयुष्मान योजना से बाहर होने पर विचार करना पड़ सकता है।


सरकारी अस्पतालों पर भी असर

केवल निजी ही नहीं, बल्कि सरकारी अस्पताल भी इस स्थिति से अछूते नहीं हैं। भुगतान अटका रहने से—

  • दवाओं की उपलब्धता प्रभावित
  • उपकरणों के रखरखाव में समस्या
  • मरीजों की संख्या बढ़ने से संसाधनों पर दबाव

जैसी परेशानियां सामने आ रही हैं।


शासन स्तर पर क्या कहा गया

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार भुगतान प्रक्रिया को तेज करने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर समन्वय किया जा रहा है। तकनीकी कारणों और क्लेम सत्यापन की प्रक्रिया के चलते भुगतान में देरी हुई है, लेकिन जल्द ही चरणबद्ध तरीके से राशि जारी करने की तैयारी है।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि आयुष्मान योजना राज्य सरकार की प्राथमिक योजनाओं में शामिल है और इसे किसी भी हाल में बाधित नहीं होने दिया जाएगा।


मरीजों में बढ़ी चिंता

भुगतान अटकने की खबरों से मरीजों और उनके परिजनों में भी चिंता बढ़ गई है। उन्हें डर है कि कहीं—

  • इलाज बीच में न रुक जाए
  • अस्पताल में भर्ती होने से मना न कर दिया जाए
  • अतिरिक्त खर्च खुद न उठाना पड़े

हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने भरोसा दिलाया है कि मरीजों को इलाज से वंचित नहीं किया जाएगा।


निष्कर्ष

आयुष्मान योजना के तहत 2100 करोड़ रुपये का भुगतान अटकना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो अस्पतालों की कार्यक्षमता और मरीजों की सुविधाओं पर बड़ा असर पड़ सकता है। समय पर भुगतान ही इस योजना की सफलता और भरोसे की कुंजी है।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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