कांकेर में फैली दहशत, स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच, ग्रामीणों को दी गई सतर्कता की सलाह

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कांकेर में कुत्ते के काटने से गाय की मौत के बाद रेबीज का खौफ, दूध पीने वाले ग्रामीण दहशत में, स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच।

कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में रेबीज के खौफ ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। एक आवारा कुत्ते के काटने से संक्रमित हुई गाय की मौत के बाद, उसका दूध पीने वाले ग्रामीणों में भारी दहशत फैल गई है। आशंका जताई जा रही है कि गाय में रेबीज संक्रमण था, जिससे इंसानों में भी संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है।

घटना के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया है और स्वास्थ्य विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच और निगरानी शुरू कर दी है


कैसे हुई घटना?

जानकारी के अनुसार—

  • गांव में कुछ दिन पहले एक आवारा कुत्ते ने एक दुधारू गाय को काट लिया था
  • कुछ दिनों बाद गाय के व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखने लगे
  • गाय ने चारा-पानी छोड़ दिया और आक्रामक हो गई
  • कुछ ही समय में उसकी मौत हो गई

पशु चिकित्सकों को संदेह है कि गाय की मौत रेबीज संक्रमण के कारण हुई।


दूध पीने वाले ग्रामीणों में दहशत

सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि—

  • गाय का दूध कई ग्रामीणों ने नियमित रूप से पिया
  • कुछ लोगों ने उससे बने दही और छाछ का भी सेवन किया

गाय की मौत के बाद जब रेबीज की आशंका सामने आई, तो—

  • ग्रामीणों में डर और अफरा-तफरी फैल गई
  • कई लोग तुरंत अस्पताल पहुंचे
  • कुछ ने खुद को आइसोलेट करना शुरू कर दिया

लोगों को डर है कि कहीं दूध के माध्यम से रेबीज वायरस शरीर में न चला गया हो।


स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, शुरू हुई निगरानी

घटना की सूचना मिलते ही—

  • जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची
  • पशु चिकित्सा विभाग से भी रिपोर्ट मंगाई गई
  • दूध पीने वाले सभी लोगों की सूची तैयार की जा रही है
  • संभावित जोखिम वाले लोगों को निगरानी में रखा गया है

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि—

“रेबीज मुख्य रूप से काटने या खुले घाव से फैलता है। दूध से संक्रमण की संभावना बहुत कम होती है, लेकिन पूरी सावधानी बरती जा रही है।”


ग्रामीणों को दी गई जरूरी सलाह

स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों को—

  • किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल जाने
  • अगले कुछ दिनों तक स्वास्थ्य निगरानी में रहने
  • किसी भी जंगली या आवारा जानवर से दूरी बनाए रखने
  • बिना उबाले दूध का सेवन न करने

जैसी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है।


रेबीज कितना खतरनाक?

चिकित्सकों के अनुसार—

  • रेबीज एक जानलेवा वायरल बीमारी है
  • लक्षण दिखने के बाद मृत्यु दर लगभग 100% होती है
  • समय पर वैक्सीन और एंटी-रेबीज इंजेक्शन ही बचाव का उपाय है

इसलिए ऐसे मामलों में जरा सी लापरवाही भी घातक साबित हो सकती है।


प्रशासन से ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—

  • गांव में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण किया जाए
  • नियमित पशु टीकाकरण अभियान चलाया जाए
  • ग्रामीण इलाकों में रेबीज जागरूकता अभियान तेज किया जाए

ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।


निष्कर्ष

कांकेर की यह घटना बताती है कि रेबीज का खतरा केवल इंसानों तक सीमित नहीं, बल्कि पालतू पशुओं के जरिए भी बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन सकता है। समय रहते सतर्कता, टीकाकरण और जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा बचाव है।

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