रायपुर में मार्कफेड द्वारा तिरपाल खरीदी में अनियमितता, 18,500 के बजाय 33,000 खरीदे, 18 करोड़ की अतिरिक्त खरीदी, जांच के आदेश
रायपुर में तिरपाल खरीदी को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। मार्कफेड द्वारा 18,500 तिरपाल के टेंडर के बावजूद 33,000 तिरपाल खरीदे जाने का मामला सामने आया है। इस अतिरिक्त खरीदी से करीब 18 करोड़ रुपये के वित्तीय अनियमितता की आशंका जताई जा रही है। मामले के सामने आने के बाद जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
टेंडर से ज्यादा खरीदी पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार मार्कफेड द्वारा किसानों और समर्थन मूल्य खरीदी केंद्रों के लिए तिरपाल खरीदने का टेंडर जारी किया गया था। टेंडर में 18,500 तिरपाल खरीदने की स्वीकृति दी गई थी।
हालांकि बाद में विभाग द्वारा 33,000 तिरपाल खरीद लिए गए, जो तय संख्या से लगभग 14,500 अधिक हैं। इस अतिरिक्त खरीदी को लेकर अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में अतिरिक्त खरीदी बिना उच्चस्तरीय अनुमति के संभव नहीं है। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। 📊
18 करोड़ की अतिरिक्त खरीदी का मामला
प्राथमिक जानकारी के अनुसार अतिरिक्त खरीदी से करीब 18 करोड़ रुपये का वित्तीय भार बढ़ा है। यह राशि सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ मानी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक तिरपाल खरीदी में कीमत और मात्रा दोनों में अनियमितता की आशंका है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि खरीदी की प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई या नहीं।
जांच के आदेश
मामला सामने आने के बाद संबंधित विभाग ने जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच टीम को पूरे मामले की फाइल, टेंडर प्रक्रिया, भुगतान और वितरण की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच में निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
- टेंडर प्रक्रिया
- खरीदी की स्वीकृति
- अतिरिक्त मात्रा की अनुमति
- भुगतान प्रक्रिया
- वितरण व्यवस्था
यदि जांच में अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। ⚖️
किसानों के लिए खरीदे गए थे तिरपाल
बताया जा रहा है कि तिरपाल खरीदी का उद्देश्य समर्थन मूल्य पर खरीदी के दौरान धान और अन्य फसलों को सुरक्षित रखना था। बारिश और खराब मौसम से फसल बचाने के लिए तिरपाल की जरूरत होती है।
हालांकि आवश्यकता से अधिक खरीदी ने पूरे मामले को विवादों में ला दिया है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
मामले के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि सरकारी विभागों में लगातार अनियमितताएं सामने आ रही हैं और इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
विपक्ष ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। यदि अतिरिक्त खरीदी जरूरी परिस्थितियों में की गई है तो उसका भी रिकॉर्ड प्रस्तुत किया जाएगा।
पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले
सरकारी विभागों में खरीदी से जुड़े विवाद पहले भी सामने आ चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शी ई-टेंडरिंग और निगरानी प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत है।
पारदर्शिता पर जोर
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी खरीदी में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए:
- ई-टेंडरिंग
- थर्ड पार्टी ऑडिट
- डिजिटल निगरानी
- नियमित समीक्षा
जैसे कदम उठाए जाने चाहिए।
कार्रवाई की उम्मीद
अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है। यदि अनियमितता साबित होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।
यह मामला सरकारी खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। 🔍

