ऑपरेशन सारथी: पहचान के लिए पुराने साथियों को लेकर घूम रही फोर्स, जंगल छोड़ गांवों में छिप रहे नक्सली

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ऑपरेशन सारथी के तहत सुरक्षा बल पुराने साथियों की मदद से गांवों में छिपे नक्सलियों की पहचान कर रहे हैं, क्योंकि दबाव में नक्सली जंगल छोड़ रहे हैं।

रायपुर | छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुरक्षा बलों ने “ऑपरेशन सारथी” के तहत नई रणनीति अपनाई है। इस अभियान के अंतर्गत सुरक्षा बल नक्सलियों की पहचान के लिए उनके पुराने साथियों और आत्मसमर्पित नक्सलियों की मदद ले रहे हैं। इसकी वजह यह है कि लगातार दबाव के चलते कई नक्सली अब जंगल छोड़कर गांवों में आम लोगों के बीच छिपने लगे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हाल के महीनों में नक्सल प्रभावित इलाकों में सघन अभियान चलाए जाने से नक्सली संगठनों की गतिविधियां कमजोर हुई हैं। जंगलों में सुरक्षित ठिकाने न मिलने के कारण नक्सली अब गांवों में पहचान छिपाकर रह रहे हैं, जिससे उनकी पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

पुराने साथियों की मदद से पहचान

ऑपरेशन सारथी के तहत सुरक्षा बल पूर्व नक्सलियों और आत्मसमर्पण कर चुके कैडरों को साथ लेकर संदिग्ध इलाकों में भ्रमण कर रहे हैं। ये लोग नक्सलियों की पहचान, उनकी गतिविधियों और नेटवर्क को समझने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि पुराने साथी नक्सलियों की:

  • चाल-ढाल
  • बोलचाल की भाषा
  • स्थानीय संपर्क
  • कार्यशैली

को बेहतर तरीके से पहचान सकते हैं, जिससे फोर्स को सटीक कार्रवाई में मदद मिल रही है।

गांवों में बढ़ी सतर्कता

सुरक्षा बलों ने नक्सल प्रभावित जिलों के गांवों में निगरानी बढ़ा दी है। संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और स्थानीय ग्रामीणों से भी सहयोग लिया जा रहा है। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या सुरक्षा बलों को दें।

खुफिया तंत्र को मिल रही मजबूती

ऑपरेशन सारथी के जरिए खुफिया तंत्र को भी मजबूत किया जा रहा है। आत्मसमर्पित नक्सलियों से मिली जानकारी के आधार पर:

  • नक्सलियों के नए ठिकानों
  • सप्लाई नेटवर्क
  • संपर्क सूत्रों

पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।

नक्सलियों पर बढ़ता दबाव

सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, इस रणनीति से नक्सलियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बढ़ा है। गांवों में छिपना उनके लिए अब सुरक्षित नहीं रह गया है। कई नक्सली लगातार बदलते ठिकानों के कारण असहज स्थिति में हैं।

आत्मसमर्पण की संभावना बढ़ी

अधिकारियों का मानना है कि ऑपरेशन सारथी से नक्सलियों में आत्मसमर्पण की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। लगातार घेराबंदी, पहचान का डर और नेटवर्क के कमजोर होने से कई नक्सली मुख्यधारा में लौटने पर विचार कर सकते हैं।

सुरक्षा बलों का दावा

सुरक्षा बलों ने दावा किया है कि ऑपरेशन सारथी के तहत आने वाले दिनों में और भी बड़ी सफलताएं मिल सकती हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य नक्सलियों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाना और प्रभावित इलाकों में शांति बहाल करना है।

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