सरेंडर के बाद पूर्व नक्सलियों को स्किल टेस्ट के लिए गांव भेजा गया, काम का मूल्यांकन कर पुनर्वास कैंप लौटाया गया
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास को लेकर नई पहल शुरू की गई है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को अब मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ‘स्किल टेस्ट’ के तहत गांवों में भेजा गया, जहां उन्होंने अपने कौशल का प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्हें पुनर्वास कैंप में वापस लाया गया, जहां उनके व्यवहार और बदलाव का आकलन किया जाएगा।
यह पहल छत्तीसगढ़ पुलिस और प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से चलाई जा रही है। इसका उद्देश्य आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
सरेंडर के बाद शुरू हुआ पुनर्वास प्रक्रिया
अधिकारियों के अनुसार हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास प्रक्रिया के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें विभिन्न कौशल जैसे खेती, निर्माण कार्य, कुटीर उद्योग, वाहन मरम्मत और अन्य रोजगार आधारित कार्यों की जानकारी दी जा रही है।
इसके बाद इन नक्सलियों को ‘स्किल टेस्ट’ के लिए गांवों में भेजा गया, जहां उन्होंने सीखे गए कौशल का उपयोग करते हुए कार्य किए। इससे यह परखा गया कि वे सामान्य जीवन में किस तरह से खुद को ढाल पा रहे हैं।
गांव में किया काम, फिर लौटे कैंप
स्किल टेस्ट के दौरान पूर्व नक्सलियों ने गांवों में विभिन्न कार्यों में हिस्सा लिया। कुछ ने खेती से जुड़ा काम किया तो कुछ ने निर्माण कार्य में सहयोग दिया। ग्रामीणों ने भी उनके काम की सराहना की और उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित किया।
निर्धारित समय पूरा होने के बाद सभी पूर्व नक्सली वापस कैंप लौट आए। अब उनके व्यवहार और कार्य क्षमता का मूल्यांकन किया जा रहा है।
बदलाव पर रखी जा रही नजर
अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य यह देखना है कि सरेंडर के बाद पूर्व नक्सलियों में कितना बदलाव आया है। यदि वे सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ते हैं तो उन्हें स्थायी रोजगार और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इसके साथ ही उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जाएगा, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।
मुख्यधारा में जोड़ने की कोशिश
पुनर्वास योजना के तहत पूर्व नक्सलियों को शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं। इससे वे समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की पहल से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही अन्य नक्सलियों को भी आत्मसमर्पण के लिए प्रेरणा मिलेगी।
ग्रामीणों ने किया स्वागत
गांवों में पहुंचे पूर्व नक्सलियों का ग्रामीणों ने सकारात्मक तरीके से स्वागत किया। ग्रामीणों ने कहा कि यदि उन्हें रोजगार और अवसर मिलेंगे तो वे समाज में बेहतर जीवन जी सकेंगे।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
प्रशासन ने बताया कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। सरेंडर करने वाले अन्य नक्सलियों को भी इसी प्रक्रिया से गुजारा जाएगा।
इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली समाज की मुख्यधारा में लौटकर नया जीवन शुरू करेंगे और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करने में सहयोग करेंगे।

