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अब घर कैसे चलाएं: दिवाली गुजर गई, होली में भी नहीं आया वेतन, मितानिन कार्यक्रम की कार्यकर्ताओं ने एनएचएम एमडी को दफ्तर में घेरा

📑 इस लेख मेंरायपुर में मितानिन कार्यकर्ताओं ने महीनों से लंबित मानदेय को लेकर एनएचएम कार्यालय का घेराव किया, कहा दिवाली और होली दोनों बीत गए, वेतन नहीं…

📅 3 March 2026, 11:02 am अपडेट: 16 May 2026
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रायपुर में मितानिन कार्यकर्ताओं ने महीनों से लंबित मानदेय को लेकर एनएचएम कार्यालय का घेराव किया, कहा दिवाली और होली दोनों बीत गए, वेतन नहीं मिला।

रायपुर। राज्य की जमीनी स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली मितानिन कार्यकर्ताओं का सब्र अब जवाब देने लगा है। दिवाली के बाद अब होली का पर्व भी गुजर गया, लेकिन कई महीनों से मानदेय नहीं मिलने से नाराज मितानिन कार्यक्रम की कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और एनएचएम के प्रबंध निदेशक को घेरकर अपनी पीड़ा रखी।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और सामान्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों की सेवा कर रही हैं, लेकिन इसके बदले मिलने वाला मानदेय समय पर नहीं दिया जा रहा। इससे उनके सामने परिवार चलाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

प्रदर्शन कर रही मितानिन कार्यकर्ताओं ने कहा कि त्योहारी सीजन में बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया, राशन और दवाइयों तक के लिए पैसे नहीं हैं। दिवाली निकल गई और अब होली भी आ गई, लेकिन कई महीनों से खाते में एक रुपया भी नहीं आया।


महीनों से नहीं मिला मानदेय

कार्यकर्ताओं ने बताया कि कई जिलों की मितानिनों को तीन से छह महीने तक का मानदेय लंबित है। कुछ महिलाओं ने कहा कि वे कर्ज लेकर घर चला रही हैं, लेकिन अब उधार देने वाले भी मना करने लगे हैं।

प्रदर्शन में शामिल एक मितानिन ने कहा,
“हम दिन-रात गांव में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दौड़ते हैं, डिलीवरी से लेकर टीकाकरण तक हर काम करते हैं, लेकिन खुद की आर्थिक हालत इतनी खराब हो गई है कि बच्चों की फीस भरना मुश्किल हो रहा है।”


एनएचएम कार्यालय में जताया आक्रोश

मितानिन कार्यकर्ताओं का समूह सीधे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के राज्य कार्यालय पहुंचा और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तत्काल भुगतान की मांग की।

कार्यकर्ताओं ने एनएचएम के प्रबंध निदेशक से मुलाकात कर लिखित ज्ञापन भी सौंपा और स्पष्ट कहा कि यदि जल्द मानदेय का भुगतान नहीं किया गया तो वे राज्यस्तरीय आंदोलन के लिए मजबूर होंगी।


जमीनी स्वास्थ्य व्यवस्था पर असर की चेतावनी

मितानिन कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रदेशभर में स्वास्थ्य से जुड़ी कई गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। उनका कहना है कि मितानिनें ही ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं की पहचान, प्रसव पूर्व जांच, टीकाकरण, कुपोषण की निगरानी और सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने का काम करती हैं।

उन्होंने कहा कि अगर ऐसी स्थिति बनी रही तो भविष्य में क्षेत्रीय स्तर पर सेवाएं बाधित होना तय है।


“अब घर कैसे चलाएं?”

प्रदर्शन के दौरान कई मितानिन भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि वे पूरी ईमानदारी से काम कर रही हैं, लेकिन लगातार हो रही देरी से मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है।

एक कार्यकर्ता ने कहा,
“हम सरकार की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाते हैं, लेकिन हमारे लिए ही कोई योजना नहीं बची है। अब घर कैसे चलाएं, बच्चों का भविष्य कैसे संभालें?”


पहले भी उठा था भुगतान का मुद्दा

यह पहली बार नहीं है जब मितानिन कार्यकर्ताओं के मानदेय को लेकर सवाल उठे हों। इससे पहले भी अलग-अलग जिलों में भुगतान में देरी को लेकर प्रदर्शन और ज्ञापन दिए जा चुके हैं। बावजूद इसके समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि हर बार आश्वासन तो मिल जाता है, लेकिन कुछ दिनों बाद स्थिति फिर वही हो जाती है।


तकनीकी और प्रशासनिक कारणों का हवाला

एनएचएम से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि भुगतान में देरी का कारण तकनीकी प्रक्रिया, बजट आवंटन और फाइलों के स्तर पर होने वाली देरी है। अधिकारियों ने मितानिनों को आश्वासन दिया है कि लंबित भुगतान शीघ्र जारी कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

हालांकि, मितानिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे इस तरह के जवाब पहले भी कई बार सुन चुकी हैं।


राज्य सरकार से सीधी मांग

मितानिन संगठनों ने छत्तीसगढ़ सरकार से मांग की है कि—

  • लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान किया जाए
  • भुगतान के लिए स्थायी और समयबद्ध व्यवस्था बनाई जाए
  • मितानिनों को सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक मानदेय सुनिश्चित किया जाए

कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब तक ठोस आदेश जारी नहीं होंगे, तब तक उनका भरोसा बहाल नहीं होगा।


प्रदेश की लाखों महिलाओं की सेहत से जुड़ा है मितानिनों का काम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में मितानिनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा, कुपोषण से लड़ाई और जागरूकता अभियान में मितानिनों का योगदान लगातार सामने आता रहा है।

लेकिन अगर इन्हीं कार्यकर्ताओं को आर्थिक असुरक्षा का सामना करना पड़े, तो इसका असर सीधे जमीनी स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा।


आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शन के अंत में मितानिन कार्यकर्ताओं ने साफ कहा कि यदि होली के बाद भी भुगतान नहीं हुआ तो वे प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगी। जरूरत पड़ी तो जिला और राज्य मुख्यालयों में धरना प्रदर्शन भी किया जाएगा।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे टकराव नहीं चाहतीं, लेकिन अपने और अपने परिवार के अस्तित्व की लड़ाई लड़ना अब उनकी मजबूरी बन गई है।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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