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किसी को नहीं किया गया ब्लैक लिस्ट, 75 मिलर्स ने नहीं जमा किया स्टॉक, दो माह से दुकानों तक नहीं पहुंच रहा राशन

📑 इस लेख मेंरायपुर जिले में 75 मिलर्स द्वारा स्टॉक जमा नहीं करने से दो माह से राशन दुकानों तक आपूर्ति प्रभावित, अब तक किसी मिलर को ब्लैक…

📅 3 February 2026, 10:54 am अपडेट: 16 May 2026
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रायपुर जिले में 75 मिलर्स द्वारा स्टॉक जमा नहीं करने से दो माह से राशन दुकानों तक आपूर्ति प्रभावित, अब तक किसी मिलर को ब्लैक लिस्ट नहीं किया गया।

रायपुर। जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के अंतर्गत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मिलने वाले चावल और अन्य खाद्यान्न की आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के 75 राइस मिलर्स द्वारा तय समय सीमा के भीतर स्टॉक जमा नहीं किए जाने के कारण पिछले दो माह से उचित मूल्य दुकानों तक नियमित रूप से राशन नहीं पहुंच पा रहा है। इसके बावजूद अब तक किसी भी मिलर को ब्लैक लिस्ट नहीं किए जाने को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

खाद्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नीति के तहत मिलर्स को कस्टम मिलिंग के बाद तय मात्रा में चावल और अन्य खाद्यान्न समय पर जमा करना अनिवार्य होता है। इसी स्टॉक के आधार पर राशन दुकानों को आवंटन जारी किया जाता है। लेकिन जिले के 75 मिलर्स द्वारा स्टॉक जमा नहीं करने से पूरे सप्लाई चेन पर असर पड़ा है।

दो महीने से दुकानों तक नहीं पहुंच रहा पूरा राशन

जिले की कई उचित मूल्य दुकानों में पिछले दो महीनों से निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न नहीं पहुंच पा रहा है। इसका सीधा असर राशन कार्डधारियों पर पड़ा है। कई दुकानों पर उपभोक्ताओं को यह कहकर लौटा दिया जा रहा है कि स्टॉक उपलब्ध नहीं है या आंशिक मात्रा ही मिल पा रही है।

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ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लाभार्थियों को समय पर राशन नहीं मिलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। खासकर मजदूर वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को इस व्यवस्था से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मिलर्स पर कार्रवाई क्यों नहीं?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि तय नियमों का उल्लंघन करने वाले 75 मिलर्स के खिलाफ अब तक कोई सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्टॉक जमा नहीं करने वाले मिलर्स को नोटिस जारी किए गए हैं और उनसे जवाब मांगा गया है।

अधिकारियों के अनुसार, अभी तक किसी भी मिलर को ब्लैक लिस्ट नहीं किया गया है। विभाग का तर्क है कि मिलर्स द्वारा दिए गए कारणों और परिस्थितियों की जांच के बाद ही अंतिम कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि जब नियमों के तहत समय पर स्टॉक जमा नहीं करने पर कार्रवाई का प्रावधान है, तो फिर दो महीने बीत जाने के बाद भी सख्त कदम क्यों नहीं उठाए गए।

उनका कहना है कि प्रशासन की नरमी का खामियाजा सीधे आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में राशन वितरण व्यवस्था लगभग ठप जैसी स्थिति में पहुंच गई है।

विभाग का दावा – जल्द सुधरेगी व्यवस्था

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही लंबित स्टॉक जमा कराया जाएगा और आगामी दिनों में सभी उचित मूल्य दुकानों तक नियमित आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। विभाग का यह भी कहना है कि जिन मिलर्स द्वारा लगातार लापरवाही बरती जा रही है, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा है कि किसी भी हाल में गरीब परिवारों को मिलने वाला राशन प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है।

उपभोक्ताओं की बढ़ती चिंता

इधर राशन नहीं मिलने से उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई लाभार्थियों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में सरकारी राशन ही उनकी सबसे बड़ी सहारा है। यदि यही समय पर न मिले तो रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो जाता है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक 75 मिलर्स से लंबित स्टॉक जमा कराकर जिले की राशन आपूर्ति व्यवस्था को पटरी पर लाता है और दोषियों पर वास्तविक कार्रवाई होती है या नहीं।

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