एसआईआर में नई परेशानी अशिक्षित और भूमिहीनों के पास सिर्फ आधार-राशन कार्ड, दस्तावेज अमान्य बताकर लौटाए जा रहे आवेदन

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एसआईआर प्रक्रिया में दस्तावेजों की सख्ती से अशिक्षित और भूमिहीन परेशान, आधार-राशन कार्ड अमान्य, आवेदन लौटाए जा रहे, मतदाता सूची से नाम कटने का डर।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में चल रहे एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) अभियान के दौरान अब एक नई और गंभीर समस्या सामने आ गई है। बड़ी संख्या में अशिक्षित, गरीब और भूमिहीन नागरिकों के पास केवल आधार कार्ड और राशन कार्ड ही उपलब्ध हैं, लेकिन ये दस्तावेज एसआईआर के तहत मान्य नहीं माने जा रहे, जिसके कारण उनके आवेदन वापस लौटाए जा रहे हैं।

इस स्थिति ने हजारों लोगों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि दस्तावेजों की कमी के चलते उनका नाम मतदाता सूची से हटने का खतरा मंडरा रहा है।


दस्तावेजों की शर्त बनी परेशानी

एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने या सत्यापन के लिए कुछ विशेष दस्तावेज अनिवार्य किए गए हैं। इनमें जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, स्कूल प्रमाण पत्र, भूमि दस्तावेज या अन्य सरकारी रिकॉर्ड शामिल हैं।

लेकिन ग्रामीण और शहरी झुग्गी क्षेत्रों में रहने वाले कई लोग ऐसे हैं, जिनके पास ये दस्तावेज कभी बने ही नहीं। उनका कहना है कि वर्षों से वे वोट डालते आ रहे हैं, फिर भी अब उनसे ऐसे कागजात मांगे जा रहे हैं, जो उनके पास उपलब्ध नहीं हैं।


अशिक्षित और भूमिहीनों पर सबसे ज्यादा असर

एसआईआर की यह प्रक्रिया खास तौर पर

  • दिहाड़ी मजदूरों
  • भूमिहीन किसानों
  • झुग्गी बस्तियों में रहने वालों
  • वृद्ध और अशिक्षित नागरिकों

को सबसे अधिक प्रभावित कर रही है। कई लोग फॉर्म भरने और दस्तावेज समझने में भी असमर्थ हैं। केंद्रों से उन्हें यह कहकर लौटा दिया जा रहा है कि आधार और राशन कार्ड पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं


लौटाए जा रहे आवेदन, बढ़ रही निराशा

कई मतदाताओं ने बताया कि वे कई बार केंद्रों का चक्कर काट चुके हैं। हर बार उन्हें किसी नए दस्तावेज की मांग बताकर वापस भेज दिया जाता है। इससे लोगों में आक्रोश और निराशा दोनों बढ़ रहे हैं।

लोगों का कहना है कि यदि उनके पास वैध पहचान के रूप में आधार और राशन कार्ड भी स्वीकार नहीं किए जाएंगे, तो गरीब तबका कैसे अपने मताधिकार की रक्षा करेगा।


प्रशासन का पक्ष

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार चलाया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी है।

हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि विशेष परिस्थितियों वाले मामलों में वैकल्पिक समाधान पर विचार किया जा सकता है और वरिष्ठ स्तर पर मार्गदर्शन मांगा गया है।


सामाजिक संगठनों की मांग

सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि

  • आधार और राशन कार्ड को अस्थायी रूप से मान्य किया जाए
  • अशिक्षित और गरीब वर्ग के लिए सरल प्रक्रिया अपनाई जाए
  • किसी भी पात्र मतदाता का नाम केवल दस्तावेजों की कमी से न हटाया जाए

उनका कहना है कि लोकतंत्र में मताधिकार सबसे बड़ा अधिकार है और इसे तकनीकी कारणों से छीनना उचित नहीं है।

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