धमतरी में रेलवे की बड़ी रेल लाइन परियोजना के लिए बुलडोजर कार्रवाई, 35 घर टूटे, कई परिवार बेघर, ग्रामीणों ने पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की।
धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में रेलवे की बड़ी रेल लाइन परियोजना के तहत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। इस दौरान रेलवे प्रशासन और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में 35 से अधिक घरों पर बुलडोजर चलाया गया, जिससे दर्जनों परिवार बेघर हो गए। अचानक हुई इस कार्रवाई से प्रभावित ग्रामीणों में भारी नाराजगी और आक्रोश देखने को मिला।
ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से रेलवे की जमीन पर रह रहे थे और उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था का कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया। कार्रवाई के बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं।
बड़ी रेल लाइन परियोजना के लिए हटाया गया अतिक्रमण
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, धमतरी क्षेत्र में नई और बड़ी रेल लाइन बिछाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। इसी परियोजना के तहत रेलवे की भूमि पर बने अवैध निर्माणों को हटाने का निर्णय लिया गया था। पूर्व में नोटिस जारी किए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त समय और विकल्प नहीं दिया गया।
रेलवे प्रशासन का तर्क है कि परियोजना पूरी होने से क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी और भविष्य में रोजगार एवं विकास के नए अवसर पैदा होंगे।
बेघर हुए ग्रामीणों की पीड़ा
कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनका सब कुछ उजड़ गया। कई लोग दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं और उनके पास न तो जमीन है और न ही दूसरा ठिकाना। महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि
- उन्हें वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए
- पुनर्वास नीति के तहत मुआवजा दिया जाए
- तब तक निर्माण कार्य रोका जाए, जब तक उचित व्यवस्था नहीं हो जाती
प्रशासन का पक्ष
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाना आवश्यक था, क्योंकि परियोजना में देरी हो रही थी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि प्रभावित लोगों की सूची तैयार की जा रही है और शासन स्तर पर पुनर्वास को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
हालांकि, अब तक किसी ठोस राहत पैकेज की घोषणा नहीं की गई है।
सामाजिक संगठनों ने जताई चिंता
इस कार्रवाई के बाद सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। बिना वैकल्पिक व्यवस्था के लोगों को बेघर करना अनुचित है।

