पहली से चौथी, 6वीं-7वीं और 9वीं–11वीं की परीक्षा को लेकर नया आदेश, निजी स्कूलों को बड़ी राहत
📑 इस लेख मेंरायपुर में शिक्षा विभाग के नए आदेश से पहली से चौथी, 6वीं-7वीं और 9वीं-11वीं की परीक्षा व्यवस्था बदली, निजी स्कूलों को बड़ी राहत मिली।निजी स्कूलों…
रायपुर में शिक्षा विभाग के नए आदेश से पहली से चौथी, 6वीं-7वीं और 9वीं-11वीं की परीक्षा व्यवस्था बदली, निजी स्कूलों को बड़ी राहत मिली।
रायपुर। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश भर के निजी विद्यालयों के लिए परीक्षा व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग ने नया आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत पहली से चौथी, छठवीं–सातवीं तथा नौवीं से ग्यारहवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षाओं के आयोजन से जुड़े नियमों में लचीलापन दिया गया है, जिससे निजी स्कूलों को बड़ी राहत मिली है।
जानकारी के अनुसार नए आदेश में स्कूल प्रबंधन को परीक्षा संचालन, समय-सारिणी और आंतरिक मूल्यांकन से जुड़े कुछ अधिकार प्रदान किए गए हैं। इससे अब निजी विद्यालय अपनी शैक्षणिक परिस्थितियों, छात्रों की उपस्थिति और पाठ्यक्रम की प्रगति के अनुसार परीक्षाओं का बेहतर संचालन कर सकेंगे।
निजी स्कूलों की लंबे समय से थी मांग
निजी स्कूल संचालकों का कहना था कि एक समान और कठोर परीक्षा नियमों के कारण कई बार छात्रों पर अनावश्यक दबाव बनता था। साथ ही कुछ स्कूलों में शैक्षणिक सत्र के दौरान तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं सामने आती थीं।
नई व्यवस्था से स्कूल प्रबंधन को यह सुविधा मिलेगी कि वे कक्षा पहली से चौथी तक विद्यार्थियों के लिए मूल्यांकन को अधिक बाल-अनुकूल और गतिविधि आधारित बना सकें। वहीं कक्षा 6वीं-7वीं तथा 9वीं से 11वीं के लिए परीक्षा प्रक्रिया को सरल और व्यावहारिक बनाया गया है।
विद्यार्थियों पर कम होगा मानसिक दबाव
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से छोटे बच्चों पर परीक्षा का मानसिक दबाव कम होगा। प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों के सर्वांगीण विकास, समझ और व्यवहारिक ज्ञान को प्राथमिकता मिल सकेगी।
उच्च कक्षाओं में भी अब मूल्यांकन प्रणाली को अधिक संतुलित और सीखने पर केंद्रित बनाने का प्रयास किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को केवल अंक आधारित प्रतिस्पर्धा से बाहर निकलने का अवसर मिलेगा।
स्कूल प्रबंधन को मिली प्रशासनिक सहूलियत
नए आदेश से निजी विद्यालयों को परीक्षा संचालन में प्रशासनिक सहूलियत भी मिलेगी। स्कूल प्रबंधन अपनी आंतरिक समिति के माध्यम से समय-सारिणी तय कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक बदलाव कर पाएंगे।
स्कूल संचालकों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने और बच्चों के हित में निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलेगी।
शिक्षा विभाग का उद्देश्य
शिक्षा विभाग का उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था को अधिक लचीला, छात्र हितैषी और व्यावहारिक बनाना है। विभाग का मानना है कि बदलते शैक्षणिक वातावरण में स्कूलों को सीमित दायरे में निर्णय लेने की अनुमति देना आवश्यक हो गया है।
नए आदेश से निजी स्कूलों के साथ-साथ विद्यार्थियों और अभिभावकों को भी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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