गन्ने की खेती में नया प्रयोग आई-वर्ड पद्धति से तैयार हुए बीज, 80% तक कम लगा बीज
📑 इस लेख मेंकबीरधाम में गन्ने की खेती में आई-वर्ड पद्धति से बीज तैयार किए गए, जिससे 80 प्रतिशत तक कम बीज लगा और किसानों की लागत घटी।क्या…
कबीरधाम में गन्ने की खेती में आई-वर्ड पद्धति से बीज तैयार किए गए, जिससे 80 प्रतिशत तक कम बीज लगा और किसानों की लागत घटी।
रायपुर/कबीरधाम। छत्तीसगढ़ में गन्ना उत्पादन को आधुनिक और लाभकारी बनाने की दिशा में एक नया प्रयोग सामने आया है। कबीरधाम जिले में किसानों ने आई-वर्ड (I-Word) पद्धति से गन्ने के बीज तैयार कर खेती की शुरुआत की है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पारंपरिक पद्धति की तुलना में लगभग 80 प्रतिशत तक कम बीज की आवश्यकता पड़ती है, जिससे किसानों की लागत में भारी कमी आई है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह पद्धति न केवल बीज की बचत करती है, बल्कि पौधों की गुणवत्ता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और उत्पादन क्षमता को भी बढ़ाती है।
क्या है आई-वर्ड पद्धति?
आई-वर्ड पद्धति एक आधुनिक कृषि तकनीक है, जिसमें—
- गन्ने की आंख (बड) को वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जाता है
- नियंत्रित वातावरण में अंकुरण कराया जाता है
- स्वस्थ और मजबूत पौध को खेत में रोपा जाता है
इस प्रक्रिया से पौधे की वृद्धि समान रूप से होती है और खेत में खाली जगह की समस्या नहीं रहती।
बीज लागत में बड़ी बचत
पारंपरिक गन्ना खेती में एक एकड़ खेत के लिए भारी मात्रा में गन्ने की जरूरत पड़ती है, जिससे बीज पर बड़ा खर्च आता है। लेकिन आई-वर्ड तकनीक से—
- बहुत कम गन्ना बीज की जरूरत
- बीज की गुणवत्ता बेहतर
- अंकुरण दर अधिक
होती है। इससे किसानों को आर्थिक रूप से सीधा लाभ मिल रहा है।
किसानों में बढ़ा उत्साह
कबीरधाम जिले के किसानों का कहना है कि—
“पहली बार इतनी कम लागत में गन्ने की बुवाई हुई है। पौधे भी स्वस्थ हैं और खेत की देखरेख आसान हो गई है।”
किसानों को उम्मीद है कि इससे आने वाले सीजन में उत्पादन बढ़ेगा और मुनाफा भी ज्यादा होगा।
कृषि विभाग की भूमिका
कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) द्वारा किसानों को इस नई तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि—
- किसानों को प्रदर्शन प्लॉट दिखाए गए
- तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया
- आगे भी प्रशिक्षण और सहायता दी जाएगी
ताकि अधिक से अधिक किसान इस पद्धति को अपनाएं।
उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार
विशेषज्ञों का मानना है कि आई-वर्ड पद्धति से—
- गन्ने की मोटाई और लंबाई बेहतर
- रोग और कीट का प्रकोप कम
- पानी और उर्वरक की बचत
जैसे फायदे मिलते हैं, जो टिकाऊ खेती की दिशा में बड़ा कदम है।
राज्यभर में विस्तार की तैयारी
रायपुर सहित प्रदेश के अन्य गन्ना उत्पादक जिलों में भी इस तकनीक को अपनाने की योजना बनाई जा रही है। यदि प्रयोग सफल रहा, तो छत्तीसगढ़ में गन्ना उत्पादन का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है।
निष्कर्ष
आई-वर्ड पद्धति ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल कर सकते हैं। यह प्रयोग छत्तीसगढ़ की कृषि के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरा है।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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