आधार कार्ड बनाने में लापरवाही उजागर: नवजातों के लिए खरीदे गए 144 टैबलेट संचालनालय में पड़े रहे डंप, 36 चोरी होने पर हुआ खुलासा

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नवजात आधार योजना के लिए खरीदे 144 टैबलेट वर्षों तक डंप रहे, 36 टैबलेट चोरी होने पर सरकारी लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नवजात बच्चों के आधार कार्ड निर्माण को लेकर बड़ी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। जन्म के तुरंत बाद बच्चों का आधार बनाने की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए खरीदे गए 144 टैबलेट वर्षों तक संचालनालय में डंप पड़े रहे, लेकिन जब इनमें से 36 टैबलेट चोरी हो गए, तब यह गंभीर मामला उजागर हुआ।

यह घटना न केवल सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की ओर इशारा करती है, बल्कि बच्चों के अधिकार और डिजिटल सेवाओं की विफलता पर भी सवाल खड़े करती है।

नवजातों के आधार के लिए खरीदे गए थे टैबलेट

राज्य सरकार द्वारा नवजात शिशुओं का जन्म के साथ ही आधार पंजीकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से—

  • 144 अत्याधुनिक टैबलेट
  • करोड़ों रुपये की लागत से
  • जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में उपयोग हेतु

खरीदे गए थे, ताकि अस्पताल से छुट्टी से पहले ही बच्चे का आधार पंजीकरण हो सके।

उपयोग की बजाय संचालनालय में पड़े रहे डंप

हैरानी की बात यह है कि—

  • ये टैबलेट अस्पतालों तक पहुंचे ही नहीं
  • वर्षों तक संचालनालय के गोदाम में रखे रहे
  • न कोई प्रशिक्षण हुआ, न कोई मॉनिटरिंग

इस कारण नवजात आधार पंजीकरण की योजना कागजों तक ही सीमित रह गई।

36 टैबलेट चोरी होने पर मचा हड़कंप

मामला तब सामने आया जब—

  • स्टॉक का मिलान किया गया
  • 36 टैबलेट गायब पाए गए
  • इसके बाद आंतरिक जांच शुरू हुई

प्राथमिक जांच में चोरी की पुष्टि हुई, जिसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया।

FIR और विभागीय जांच के निर्देश

सूत्रों के अनुसार—

  • चोरी को लेकर FIR दर्ज करने की तैयारी
  • जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच
  • लापरवाह अफसरों पर कार्रवाई के संकेत

दिए गए हैं। साथ ही पूरे टैबलेट खरीदी और वितरण प्रक्रिया की ऑडिट कराने की बात कही जा रही है।

नवजात आधार योजना पर पड़ा असर

इस लापरवाही का सीधा असर—

  • नवजात बच्चों
  • उनके अभिभावकों
  • और सरकारी योजनाओं की पहुंच

पर पड़ा। कई बच्चों का आधार समय पर नहीं बन पाने से—

  • टीकाकरण
  • स्वास्थ्य योजनाएं
  • सामाजिक सुरक्षा लाभ

प्रभावित हुए।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

इस मामले को लेकर विपक्ष ने कहा कि—

  • सरकार योजनाएं तो बनाती है
  • लेकिन ज़मीनी स्तर पर अमल नहीं होता
  • टैक्स के पैसों से खरीदे उपकरण यूं ही बर्बाद हो गए

उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

प्रशासन का पक्ष

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि—

  • टैबलेट वितरण में तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएं आईं
  • अब नई कार्ययोजना बनाई जा रही है
  • बचे हुए टैबलेट जल्द अस्पतालों को दिए जाएंगे

हालांकि चोरी के मामले में किसी जिम्मेदार अधिकारी का नाम अभी सामने नहीं आया है।

डिजिटल इंडिया पर सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस की योजनाएं
  • जब तक निगरानी और जवाबदेही न हो
  • तब तक असफल होती रहेंगी

यह मामला सरकारी सिस्टम की कमजोरियों का उदाहरण है।

आगे क्या?

अब सवाल यह है कि—

  • चोरी हुए टैबलेट कब और कैसे बरामद होंगे
  • जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी
  • और नवजात आधार योजना कब सही मायनों में लागू होगी

जनता और सामाजिक संगठनों की नजर अब सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

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