छत्तीसगढ़ में 65 लाख मतदाताओं के नाम अटके, 10 दिन में आपत्ति नहीं तो कटेगा नाम: सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

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छत्तीसगढ़ में 65 लाख मतदाता नाम अटक गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 10 दिनों में आपत्ति न दी तो नाम हट सकता है, जांच आवश्यक।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में लगभग 65 लाख मतदाताओं के नाम ‘अटक’ गए हैं और यदि अगले 10 दीनों में कोई आपत्ति (objection) नहीं दी गई, तो इन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटा दिए जाएंगे। यह बड़ा आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है, ताकि सूची में जो नाम शामिल या बाहर किए जाने की प्रक्रिया पारदर्शी और संवैधानिक रूप से ठोस रहे।

यह स्थिति खासकर विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के प्रक्रिया के दौरान सामने आई है, जिसमें मतदाता सूची का पुराना डेटा साफ-सुथरा और अद्यतन करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतों के कारण बड़ी संख्या में लोगों के नाम सिस्टम में लॉजिकल एरर या अन्य कारणों से ‘ड्राफ्ट’ से बाहर रह गए हैं।

65 लाख नाम क्यों अटक गए?

मतदाता सूची में जिन नामों को ‘अटक’ कर दिया गया है, उनमें कई ऐसे मतदाता हैं जिनके दस्तावेज़ — जैसे उम्र, पिता का नाम या पता — डिजिटल सिस्टम में सही ढंग से दर्ज नहीं हो पाए। परिणामस्वरूप उन्हें ड्राफ्ट वोटर लिस्ट (निर्वाचन आयोग द्वारा तैयार प्रारूप सूची) में शामिल नहीं किया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि:

  • इन नामों की डिटेल सूची — जिसमें यह बताया गया हो कि क्यों नाम ड्राफ्ट में नहीं आए — जिला स्तरीय वेबसाइटों पर और पंचायत/ब्लॉक कार्यालयों में पोस्ट किया जाए
  • भाषा में स्पष्ट रूप से आम जनता तक सूचना पहुंचाई जाए।
  • प्रभावित मतदाता अपनी शिकायत (Form 6 के माध्यम से) और पहचान दस्तावेज (जैसे Aadhaar) जमा कर दावे या आपत्ति दर्ज करा सकें

10 दिनों में आपत्ति जरूरी

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार यदि कोई मतदाता मानता है कि उसका नाम गलत तरीके से हटाया जा रहा है, तो वह 10 दिनों के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज कराए — नहीं तो उसका नाम स्थायी रूप से ड्राफ्ट सूची से हट सकता है। इससे संवैधानिक मताधिकार प्रभावित हो सकता है, इसलिए समय का पालन बेहद जरूरी है।

आदेश का उद्देश्य

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश यह सुनिश्चित करने के लिए है कि:

  • मतदाता सूची निर्वाचन प्रक्रिया के लिए निष्पक्ष, सही और पारदर्शी रही
  • किसी भी नागरिक के मताधिकार को अनावश्यक रूप से रोका या हटा नहीं जाए
  • मतदाता सूची में शामिल या बहिष्कृत नामों की स्पष्ट वजहें जनता के सामने हों।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जहाँ नाम हटाने के पीछे मृत्यु, माइग्रेशन (पermanently shifting) या डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन जैसे स्पष्ट कारण हों, वहाँ मूल प्रक्रिया ठोस आधार पर होनी चाहिए, और सभी अवगत कराए गए जानकारी को लोकल ऑफिसों में भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

नागरिकों के लिए क्या करें?

वैसे मतदाता जिनके नाम अटके हैं, उन्हें चाहिए कि:

  1. जल्द से जल्द ड्राफ्ट वोटर लिस्ट देखें — जिला निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट या निर्वाचन कार्यालय में।
  2. यदि उनका नाम नहीं है, तो Form 6 के साथ आपत्ति दर्ज कराएं
  3. पहचान दस्तावेज (जैसे Aadhaar) लेकर स्थानीय निर्वाचन या ब्लॉक कार्यालय से संपर्क करें।

सुप्रीम कोर्ट का यह कदम मतदाता सूची की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, ताकि लोकतंत्र की नींव — वोट का अधिकार — सुरक्षित और व्यापक रूप से लागू रह सके।

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