मोटराइज्ड ट्रायसायकल से बदली समज राम साहू की जिंदगी, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़े कदम
मोटराइज्ड ट्रायसायकल मिलने से समज राम साहू की जिंदगी बदली, अब वे स्वतंत्र रूप से आवागमन कर आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रहे हैं। रायपुर। शारीरिक चुनौती के…

मोटराइज्ड ट्रायसायकल मिलने से समज राम साहू की जिंदगी बदली, अब वे स्वतंत्र रूप से आवागमन कर आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रहे हैं।
रायपुर। शारीरिक चुनौती के बावजूद जीवन में आगे बढ़ने की चाह रखने वाले समज राम साहू के लिए मोटराइज्ड ट्रायसायकल नई उम्मीद बनकर आई है। शासन की सहायता से उन्हें मोटर चालित ट्रायसायकल उपलब्ध कराई गई, जिसके बाद उनके दैनिक जीवन में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब वे पहले की तुलना में अधिक स्वतंत्रता और आत्मविश्वास के साथ अपने कामकाज कर पा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, समज राम साहू लंबे समय से आवागमन की समस्या से जूझ रहे थे। सीमित संसाधनों और शारीरिक अक्षमता के कारण उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। किसी भी सरकारी कार्यालय, बाजार या सामाजिक कार्यक्रम में पहुंचना उनके लिए चुनौतीपूर्ण होता था। मोटराइज्ड ट्रायसायकल मिलने के बाद उनकी यह परेशानी काफी हद तक दूर हो गई है।
समज राम साहू ने बताया कि अब वे अपने काम स्वयं कर सकते हैं और छोटी-मोटी आजीविका गतिविधियों में भी भाग ले पा रहे हैं। इससे न केवल उनकी आय के अवसर बढ़े हैं, बल्कि आत्मसम्मान भी मजबूत हुआ है। उन्होंने शासन और संबंधित विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायता उनके लिए जीवन बदलने वाली साबित हुई है।
सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं के तहत सहायक उपकरण वितरित किए जाते हैं। मोटराइज्ड ट्रायसायकल से उन्हें आवागमन में सुविधा मिलती है और वे सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले सकते हैं। विभाग का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक यह सुविधा पहुंचे।
विशेषज्ञों का मानना है कि सहायक उपकरण केवल सुविधा का साधन नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता का आधार होते हैं। दिव्यांगजनों के लिए गतिशीलता बढ़ने से उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है और समाज में उनकी भागीदारी बढ़ती है। मोटराइज्ड ट्रायसायकल जैसे उपकरण रोजगार और शिक्षा के अवसरों तक पहुंच को आसान बनाते हैं।
स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि ऐसे कदम समाज में समावेशिता को बढ़ावा देते हैं और दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद करते हैं। समज राम साहू की कहानी अब क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के माध्यम से दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि पात्र व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
समज राम साहू के लिए मोटराइज्ड ट्रायसायकल केवल एक वाहन नहीं बल्कि नई शुरुआत का प्रतीक है। इस पहल ने यह दिखाया है कि सही समय पर मिली सहायता किसी के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकती है।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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