रायपुर में सेवा ग्राम परियोजना चार साल बाद भी अधूरी, 105 करोड़ खर्च के बावजूद ताला, अब 20 करोड़ और खर्च कर काम पूरा होगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बहुप्रतीक्षित सेवा ग्राम परियोजना चार साल बाद भी अधूरी है। करीब 105 करोड़ रुपए खर्च किए जाने के बावजूद परियोजना का काम पूरा नहीं हो सका है। स्थिति यह है कि परिसर में कई भवन तैयार होने के बाद भी उपयोग में नहीं लाए जा सके हैं और पूरे परिसर में ताला लटका हुआ है। अब अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए 20 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च करने की तैयारी की जा रही है।
यह परियोजना कला, संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इसमें आर्टिस्ट होम, प्रशिक्षण केंद्र, सांस्कृतिक मंच, अतिथि गृह और अन्य सुविधाओं का निर्माण प्रस्तावित था। लेकिन निर्माण कार्य की धीमी गति और प्रशासनिक देरी के कारण परियोजना समय पर पूरी नहीं हो सकी।
चार साल में भी अधूरी परियोजना
सेवा ग्राम परियोजना की शुरुआत बड़े उद्देश्य के साथ की गई थी। इसे कलाकारों, सामाजिक संगठनों और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक केंद्र के रूप में विकसित किया जाना था। लेकिन चार साल बाद भी यह योजना अधूरी है।
जानकारी के अनुसार, कई भवनों का निर्माण अधूरा है, जबकि कुछ तैयार भवनों में बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। इस वजह से परिसर का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
आर्टिस्ट होम भी नहीं हुआ तैयार
परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आर्टिस्ट होम माना जा रहा था। इसका उद्देश्य बाहर से आने वाले कलाकारों को ठहरने और अभ्यास की सुविधा देना था। लेकिन यह भी अधूरा है।
अधिकारियों के अनुसार, आर्टिस्ट होम में फर्निशिंग, बिजली और अन्य कार्य अभी बाकी हैं।
105 करोड़ खर्च, फिर भी ताला
परियोजना पर अब तक 105 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद सेवा ग्राम का उपयोग शुरू नहीं हो पाया है। परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के लिए ताला लगा दिया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर काम पूरा किया जाता तो अब तक इसका लाभ मिलना शुरू हो जाता।
अब 20 करोड़ और खर्च होंगे
अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए अब अतिरिक्त बजट का प्रस्ताव तैयार किया गया है। करीब 20 करोड़ रुपए और खर्च किए जाएंगे। इसमें बुनियादी सुविधाएं, फिनिशिंग और अन्य कार्य शामिल हैं।
प्रशासन ने दी सफाई
अधिकारियों का कहना है कि कुछ तकनीकी कारणों और बजट संबंधी समस्याओं के कारण काम में देरी हुई। अब परियोजना को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
कलाकारों और संगठनों में नाराजगी
परियोजना में देरी को लेकर कलाकारों और सांस्कृतिक संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि लंबे समय से इस परियोजना का इंतजार किया जा रहा था।
उपयोग में आने पर मिलेंगे लाभ
सेवा ग्राम शुरू होने के बाद कलाकारों को मंच मिलेगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हो सकेगा और प्रशिक्षण गतिविधियां भी शुरू होंगी।
निगरानी की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि परियोजनाओं की नियमित निगरानी जरूरी है। इससे समय पर काम पूरा हो सकेगा।
निष्कर्ष
चार साल में 105 करोड़ खर्च करने के बाद भी सेवा ग्राम अधूरा है। अब अतिरिक्त 20 करोड़ खर्च कर परियोजना को पूरा करने की तैयारी की जा रही है।

