जल संसाधन विभाग की टेंडर शर्तों में बड़ा बदलाव: 10 साल से कम अनुभव वाले ठेकेदारों को नहीं मिलेगा डैम-नहर निर्माण का काम
📑 इस लेख मेंजल संसाधन विभाग ने टेंडर नियम बदले, 10 साल से कम अनुभव वाले ठेकेदारों को डैम-नहर निर्माण कार्य नहीं मिलेगा, गुणवत्ता सुधार पर जोर।📌 क्यों…
जल संसाधन विभाग ने टेंडर नियम बदले, 10 साल से कम अनुभव वाले ठेकेदारों को डैम-नहर निर्माण कार्य नहीं मिलेगा, गुणवत्ता सुधार पर जोर।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल संसाधन विभाग ने डैम और नहर निर्माण कार्यों को लेकर टेंडर प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब 10 वर्ष से कम अनुभव वाले ठेकेदारों को बड़े जल संसाधन परियोजनाओं का काम नहीं दिया जाएगा। विभाग के इस फैसले का उद्देश्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधारना और अधूरी या समय से पीछे चल रही परियोजनाओं पर लगाम लगाना बताया जा रहा है।
जल संसाधन विभाग द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार, डैम, बैराज, नहर और बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के लिए वही ठेकेदार पात्र होंगे, जिनके पास कम से कम 10 साल का प्रासंगिक कार्य अनुभव होगा। साथ ही उन्हें पूर्व में किए गए कार्यों का तकनीकी और वित्तीय रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
📌 क्यों लिया गया यह फैसला?
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, बीते वर्षों में कई जल परियोजनाएं अनुभवहीन ठेकेदारों को दिए जाने के कारण—
- तय समय में पूरी नहीं हो सकीं
- गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं
- लागत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई
- किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को समय पर सिंचाई का लाभ नहीं मिल पाया
इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने टेंडर शर्तों को सख्त किया है।
🏗️ किन कार्यों पर लागू होंगी नई शर्तें?
नई टेंडर नीति के तहत यह शर्त मुख्य रूप से—
- डैम निर्माण
- नहर एवं फीडर कैनाल
- बैराज और जलाशय
- बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट
पर लागू होगी। हालांकि, छोटे मरम्मत या रखरखाव कार्यों में पुराने नियम ही प्रभावी रहेंगे।
⚖️ छोटे ठेकेदारों में नाराजगी
इस फैसले के बाद छोटे और नए ठेकेदारों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि इससे उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स में आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलेगा। कुछ ठेकेदार संगठनों ने इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग भी की है।
वहीं विभाग का कहना है कि छोटे ठेकेदारों को सब-कॉन्ट्रैक्ट या छोटे कार्यों के माध्यम से अनुभव अर्जित करने का अवसर मिलता रहेगा।
🌊 सरकार का तर्क
जल संसाधन विभाग का मानना है कि डैम और नहर जैसी परियोजनाएं सीधे किसानों, ग्रामीण जल आपूर्ति और प्रदेश की जल सुरक्षा से जुड़ी होती हैं। ऐसे में अनुभवहीनता से कोई जोखिम नहीं लिया जा सकता। सरकार का दावा है कि इस फैसले से—
- परियोजनाएं समय पर पूरी होंगी
- निर्माण की गुणवत्ता बेहतर होगी
- सरकारी धन का सही उपयोग होगा
- सिंचाई क्षमता में तेजी से बढ़ोतरी होगी
📊 आने वाले समय में असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से बड़े और अनुभवी ठेकेदारों की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे जल परियोजनाओं की रफ्तार तेज होगी। हालांकि, छोटे ठेकेदारों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार को अलग से प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराने होंगे।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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