महिलाओं पर बैंकों का भरोसा बढ़ा, हर साल 5 हजार करोड़ का अतिरिक्त ऋण, सोने की कीमत बढ़ने से गोल्ड लोन लेने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ी।
रायपुर। बैंकों और वित्तीय संस्थानों का महिलाओं पर भरोसा लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार हर साल महिलाओं को दिए जाने वाले ऋण में करीब 5 हजार करोड़ रुपये की वृद्धि हो रही है। खास बात यह है कि हाल के वर्षों में सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल आने के बाद गोल्ड लोन लेने वाली महिलाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है।
बैंक अधिकारियों का कहना है कि महिलाएं कर्ज चुकाने में अधिक अनुशासित और जिम्मेदार साबित हुई हैं, जिससे उन्हें प्राथमिकता के आधार पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वयं सहायता समूह, महिला उद्यमी, गृहिणी और कामकाजी महिलाएं अब बड़ी संख्या में बैंकिंग सिस्टम से जुड़ रही हैं।
महिलाओं को क्यों मिल रहा ज्यादा लोन?
वित्तीय विशेषज्ञों के मुताबिक—
- महिलाओं की रिकवरी रेट पुरुषों से बेहतर है
- माइक्रो फाइनेंस और स्वयं सहायता समूहों में महिलाओं की भागीदारी ज्यादा है
- सरकार की कई योजनाएं महिलाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं
- बैंकों को महिलाओं से एनपीए (डूबत कर्ज) का खतरा कम रहता है
इन्हीं कारणों से बैंकों का फोकस अब महिला ग्राहकों पर तेजी से बढ़ा है।
गोल्ड लोन में जबरदस्त बढ़ोतरी
सोने की कीमतों में बीते दो वर्षों में भारी वृद्धि के चलते गोल्ड लोन का बाजार भी तेजी से फैला है।
- जिन परिवारों के पास पहले से सोना है, वे उसे गिरवी रखकर आसान कर्ज ले रहे हैं
- महिलाएं घरेलू आभूषणों के आधार पर शिक्षा, व्यापार और इलाज के लिए लोन ले रही हैं
- छोटे व्यापार और घरेलू उद्योगों में गोल्ड लोन का उपयोग बढ़ा है
बैंक अधिकारियों के अनुसार, गोल्ड लोन में महिलाओं की हिस्सेदारी अब 60 प्रतिशत से ज्यादा हो चुकी है।
हर साल 5 हजार करोड़ की अतिरिक्त वृद्धि
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के आंकड़ों के अनुसार—
- महिला खाताधारकों को दिए जाने वाले कुल ऋण में हर साल औसतन 5 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो रही है
- महिला उद्यमिता ऋण, स्टार्टअप लोन और स्वयं सहायता समूह ऋण में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है
- ग्रामीण क्षेत्रों में महिला बैंकिंग का दायरा तेजी से फैल रहा है
इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि परिवारों और समाज की आय में भी स्थायी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
बैंकिंग सेक्टर में बदली सोच
बैंक प्रबंधन का मानना है कि—
- महिलाएं कर्ज का उपयोग अधिक योजनाबद्ध तरीके से करती हैं
- समय पर किश्त चुकाने की प्रवृत्ति ज्यादा होती है
- वित्तीय अनुशासन और बचत की आदत मजबूत होती है
इसी कारण अब कई बैंक महिलाओं के लिए विशेष ब्याज दर, आसान शर्तें और विशेष योजनाएं ला रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव—
- महिला सशक्तिकरण को मजबूत करेगा
- छोटे और मध्यम उद्योगों को गति देगा
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा
- वित्तीय समावेशन को नई ऊंचाई पर ले जाएगा
आने वाले वर्षों में महिलाओं की बैंकिंग भागीदारी और अधिक बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

