जॉब छोड़कर खेती अपनाने वाले युवक ने धान खेत में सब्जी उगाकर मिसाल कायम की 70 एकड़ खेती से 150 ग्रामीणों को रोजगार दे रहे
रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक युवा किसान ने नौकरी छोड़कर खेती को अपना कर न केवल अपनी पहचान बनाई है, बल्कि सैकड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार का स्थायी साधन भी तैयार किया है। धान की पारंपरिक खेती वाले क्षेत्र में सब्जी उत्पादन की शुरुआत कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर सोच बदली जाए तो खेती भी आधुनिक उद्यम बन सकती है।
कभी निजी क्षेत्र की नौकरी करने वाले इस किसान ने कुछ वर्ष पहले नौकरी से इस्तीफा देकर अपने गांव लौटने का फैसला किया। शुरुआत में परिवार और आसपास के लोगों को यह निर्णय जोखिम भरा लगा, लेकिन युवा किसान ने खेती को केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक व्यवसाय के रूप में अपनाने का निश्चय किया।
धान के खेत में उगाई सब्जी, बदली तस्वीर
छत्तीसगढ़ के अधिकतर इलाकों में धान मुख्य फसल मानी जाती है। इसी परंपरा से अलग हटते हुए इस किसान ने धान वाले खेतों में आधुनिक तकनीक के साथ सब्जियों की खेती शुरू की। टमाटर, मिर्च, बैंगन, भिंडी, लौकी और करेला जैसी फसलों से उन्होंने अपनी शुरुआत की।
शुरुआती दिनों में उन्हें सिंचाई व्यवस्था, बीज चयन और बाजार तक पहुंच जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से मार्गदर्शन लिया और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर आधुनिक खेती की जानकारी हासिल की।
छोटी शुरुआत, आज 70 एकड़ में खेती
पहले साल उन्होंने केवल कुछ एकड़ जमीन पर सब्जी उत्पादन किया। फसल अच्छी हुई और स्थानीय बाजार में बेहतर दाम भी मिले। यही सफलता उनका आत्मविश्वास बनी।
आज वही किसान लगभग 70 एकड़ भूमि पर व्यवस्थित खेती कर रहे हैं। इसमें सब्जी उत्पादन के साथ-साथ फसल चक्र, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पानी की बचत के साथ उत्पादन भी बढ़ा है।
उनकी खेती अब सिर्फ पारिवारिक आय का साधन नहीं रह गई है, बल्कि एक संगठित कृषि उद्यम का रूप ले चुकी है।
150 से अधिक ग्रामीणों को मिला रोजगार
इस मॉडल का सबसे बड़ा असर गांव और आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिला है। वर्तमान में उनकी खेती से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 150 ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है।
इनमें खेतों में काम करने वाले मजदूर, पैकिंग यूनिट में कार्यरत महिलाएं, परिवहन से जुड़े लोग और स्थानीय सब्जी मंडी तक सप्लाई करने वाले श्रमिक शामिल हैं।
किसान का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं है, बल्कि गांव में ही लोगों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना है ताकि युवाओं को शहरों की ओर पलायन न करना पड़े।
महिलाओं को भी मिला आत्मनिर्भर बनने का मौका
खेती से जुड़े कार्यों में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं भी जुड़ी हैं। फसल की छंटाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और नर्सरी प्रबंधन जैसे कामों में महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे उन्हें नियमित आय मिल रही है और वे आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं।
आधुनिक तकनीक ने बढ़ाया उत्पादन
इस किसान ने पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया है। ड्रिप सिंचाई प्रणाली, उन्नत किस्म के बीज, जैविक खाद और कीट प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने खेत में छोटे स्तर पर कोल्ड स्टोरेज व्यवस्था भी तैयार की है, ताकि सब्जियों को कुछ समय तक सुरक्षित रखा जा सके और बाजार में बेहतर समय पर बिक्री की जा सके।
बाजार से सीधा जुड़ाव
शुरुआत में बिचौलियों के कारण उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाता था। इसके बाद उन्होंने रायपुर और आसपास के शहरी बाजारों से सीधा संपर्क बनाना शुरू किया। कुछ थोक व्यापारियों से करार कर नियमित सप्लाई की व्यवस्था की गई।
इससे उन्हें फसल का स्थिर मूल्य मिलने लगा और नुकसान की आशंका भी कम हो गई।
युवाओं के लिए बने प्रेरणा
आज यह किसान क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। कई युवा उनसे खेती की तकनीक, लागत प्रबंधन और बाजार व्यवस्था के बारे में जानकारी लेने आते हैं। उन्होंने अपने खेत को एक तरह से “लर्निंग फार्म” का रूप दे दिया है, जहां नए किसान आकर आधुनिक खेती के तरीके सीख सकते हैं।
परिवार और गांव का बदला नजरिया
जिस फैसले को कभी जोखिम भरा माना गया था, आज वही निर्णय पूरे गांव के लिए मिसाल बन गया है। परिवार को अब गर्व है कि उनके बेटे ने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि गांव के दर्जनों परिवारों को रोजगार से जोड़ा है।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पहले यहां खेती सिर्फ गुजारे का साधन थी, लेकिन अब यह सम्मानजनक व्यवसाय बनती नजर आ रही है।
भविष्य की योजना
किसान की योजना आने वाले समय में सब्जी प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की है, ताकि टमाटर, मिर्च और अन्य सब्जियों से सॉस, पेस्ट और पैकेज्ड उत्पाद तैयार किए जा सकें। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों को फसल का बेहतर मूल्य भी मिलेगा।
इसके साथ ही वे आसपास के छोटे किसानों को समूह में जोड़कर सामूहिक खेती मॉडल पर काम करने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि उत्पादन लागत कम हो और बाजार में सामूहिक रूप से सौदे किए जा सकें।
खेती भी बन सकती है आधुनिक व्यवसाय
नौकरी छोड़कर खेती अपनाने वाले इस युवा किसान की कहानी यह साबित करती है कि यदि सोच बदली जाए और तकनीक का सही उपयोग किया जाए, तो खेती भी आधुनिक और लाभकारी व्यवसाय बन सकती है। उनकी सफलता छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही है।

