खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स: हजार से ज्यादा खिलाड़ियों ने ट्रायल दिया, रायपुर-बिलासपुर से सर्वाधिक भागीदारी
📑 इस लेख मेंखेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स ट्रायल में हजार से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया, जिनमें 900 से ज्यादा रायपुर-बिलासपुर से और सरगुजा-कोंडागांव से सिर्फ 23-23।🏟️…
खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स ट्रायल में हजार से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया, जिनमें 900 से ज्यादा रायपुर-बिलासपुर से और सरगुजा-कोंडागांव से सिर्फ 23-23।
रायपुर। खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स के लिए आयोजित ट्रायल में इस बार खिलाड़ियों की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया है। राज्यभर से एक हजार से अधिक खिलाड़ियों ने चयन ट्रायल में भाग लिया, लेकिन भागीदारी का संतुलन असमान नजर आया। ट्रायल में शामिल खिलाड़ियों में से 900 से अधिक खिलाड़ी केवल रायपुर और बिलासपुर संभाग से पहुंचे, जबकि आदिवासी बहुल सरगुजा और कोंडागांव जिलों से मात्र 23-23 खिलाड़ी ही ट्रायल देने पहुंचे।
🏟️ ट्रायल में दिखा क्षेत्रीय असंतुलन
खेल विभाग द्वारा आयोजित इस ट्रायल का उद्देश्य आगामी खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स के लिए राज्य की टीम का चयन करना था। हालांकि, आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया कि—
- शहरी और मैदानी इलाकों से खिलाड़ियों की संख्या अधिक रही
- आदिवासी अंचलों से अपेक्षाकृत कम प्रतिभागी पहुंचे
- संसाधनों और जागरूकता में अंतर साफ दिखाई दिया
विशेषज्ञों का मानना है कि आदिवासी क्षेत्रों में खेल अधोसंरचना और जानकारी की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
📊 जिलावार भागीदारी के आंकड़े
सूत्रों के अनुसार ट्रायल में—
- रायपुर और बिलासपुर संभाग: 900+ खिलाड़ी
- सरगुजा जिला: 23 खिलाड़ी
- कोंडागांव जिला: 23 खिलाड़ी
- अन्य जिलों से सीमित संख्या में प्रतिभागी
इन आंकड़ों ने खेल प्रशासन को भी आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया है।
🎯 ट्राइबल टैलेंट तक नहीं पहुंच पा रही योजनाएं?
खेल विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि—
- खेलो इंडिया जैसी योजनाएं प्रतिभा को मंच देती हैं
- लेकिन दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों तक जानकारी समय पर नहीं पहुंच पाती
- परिवहन, संसाधन और प्रशिक्षण की कमी भी बड़ी बाधा है
यदि इन क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर ट्रायल और प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएं, तो भागीदारी और बेहतर हो सकती है।
🏃♂️ खिलाड़ियों में दिखा उत्साह, चयन प्रक्रिया कड़ी
ट्रायल में एथलेटिक्स, पारंपरिक खेलों और टीम इवेंट्स में खिलाड़ियों ने अपना प्रदर्शन दिखाया। चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और तकनीकी मानकों के आधार पर रखा गया, ताकि वास्तविक प्रतिभा को मौका मिल सके।
खेल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि—
- चयनित खिलाड़ी आगे विशेष प्रशिक्षण शिविर में शामिल होंगे
- राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए उन्हें तैयार किया जाएगा
🔄 खेल विभाग करेगा रणनीति में बदलाव
खेल विभाग अब इस असंतुलन को देखते हुए—
- आदिवासी अंचलों में विशेष जागरूकता अभियान
- ब्लॉक और जिला स्तर पर ट्रायल
- स्कूल-कॉलेज स्तर पर प्रतिभा खोज
जैसे कदम उठाने की तैयारी कर रहा है, ताकि खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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