छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टर के पद समाप्त नहीं होंगे, मरीजों की बढ़ती संख्या और शिक्षण व्यवस्था बनी पद बरकरार रखने की बड़ी वजह।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत जूनियर डॉक्टरों के पद समाप्त नहीं किए जाएंगे। लंबे समय से इन पदों को खत्म किए जाने की चर्चाओं के बीच अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट हो गई है। विभाग ने साफ किया है कि मरीजों की बढ़ती संख्या, चिकित्सा सेवाओं का दबाव और शिक्षण व्यवस्था की जरूरत को देखते हुए जूनियर डॉक्टरों के पद बनाए रखना अनिवार्य है।
राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टर इलाज, इमरजेंसी सेवाओं और मेडिकल छात्रों के प्रशिक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं। यदि ये पद समाप्त होते, तो अस्पतालों की व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती।
क्यों जरूरी हैं जूनियर डॉक्टर?
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार—
- ओपीडी और आईपीडी में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है
- इमरजेंसी सेवाओं का बोझ बढ़ा है
- सीनियर डॉक्टरों पर अत्यधिक कार्यभार है
- मेडिकल छात्रों के लिए प्रैक्टिकल ट्रेनिंग अनिवार्य है
इन सभी कारणों से जूनियर डॉक्टर स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं।
मरीजों की बढ़ती संख्या बनी सबसे बड़ी वजह
छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में हर दिन—
- हजारों मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं
- गंभीर मरीज इमरजेंसी में भर्ती होते हैं
- ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में रेफरल आते हैं
ऐसी स्थिति में यदि जूनियर डॉक्टरों के पद खत्म किए जाते, तो—
- इलाज में देरी
- मरीजों की संख्या संभालना मुश्किल
- सीनियर डॉक्टरों पर अतिरिक्त दबाव
जैसी समस्याएं खड़ी हो जातीं।
शिक्षण व्यवस्था पर भी पड़ता असर
मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टर—
- एमबीबीएस छात्रों को प्रैक्टिकल सिखाते हैं
- वार्ड राउंड में मार्गदर्शन करते हैं
- क्लिनिकल ट्रेनिंग में सहयोग देते हैं
अधिकारियों का कहना है कि—
“यदि जूनियर डॉक्टर नहीं होंगे, तो मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी।”
इसलिए पद समाप्त करना शिक्षा व्यवस्था के लिए भी घातक माना गया।
वित्तीय बचत से ज्यादा जरूरी सेवा की निरंतरता
सूत्रों के मुताबिक, कुछ स्तरों पर इन पदों को खत्म कर वेतन मद में खर्च कम करने पर विचार हुआ था।
लेकिन समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकला कि—
- थोड़ी वित्तीय बचत के बदले
- मरीजों की जान जोखिम में डालना
- स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता गिराना
किसी भी हालत में उचित नहीं है।
डॉक्टर संगठनों ने लिया राहत की सांस
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन और मेडिकल फैकल्टी ने इस फैसले का स्वागत किया है।
उनका कहना है कि—
- पहले से ही डॉक्टरों की कमी है
- पद खत्म होने से कार्यभार असहनीय हो जाता
- ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में सेवाएं और कमजोर पड़तीं
उन्होंने सरकार के इस निर्णय को मरीजों और डॉक्टरों दोनों के हित में बताया।
भविष्य में और पद सृजित करने पर विचार
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिए कि—
- नए मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं
- मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है
- आने वाले समय में और जूनियर डॉक्टरों के पद सृजित किए जा सकते हैं
ताकि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।
निष्कर्ष
स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने सेवा की निरंतरता और मरीजों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जूनियर डॉक्टरों के पद बनाए रखने का फैसला किया है। यह निर्णय न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को स्थिर रखेगा, बल्कि मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता भी बनाए रखेगा।

