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लाल किले में भारत पर्व 2025: छत्तीसगढ़ की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र

नई दिल्ली। भारत पर्व 2025 दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में आयोजित भारत पर्व 2025 में छत्तीसगढ़ की झांकी ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। यह…

📅 27 January 2025, 2:21 am अपडेट: 16 May 2026
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नई दिल्ली। भारत पर्व 2025

दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में आयोजित भारत पर्व 2025 में छत्तीसगढ़ की झांकी ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। यह झांकी राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, जनजातीय परंपराओं और रामनामी समुदाय की विशिष्ट जीवनशैली को दर्शाती है। भारत पर्व 2025, जो कि गणतंत्र दिवस के मौके पर पर्यटन मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया है, भारतीय संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित करने का बेहतरीन मंच बना हुआ है।

रामनामी समुदाय और जनजातीय कला का जीवंत प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ की झांकी में भगवान श्रीराम के प्रति अनन्य भक्ति के प्रतीक रामनामी समुदाय की सांस्कृतिक धरोहर को सुंदर रूप से प्रस्तुत किया गया है। इस समुदाय के लोग राम के नाम का जप और उनके प्रति श्रद्धा की अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध हैं। झांकी में रामनामी समुदाय की जीवनशैली, उनके अनमोल रीति-रिवाज और उनकी पहचान को दर्शाया गया है, जिससे दर्शकों को राज्य की सांस्कृतिक विशेषताओं का गहराई से अनुभव हुआ।

साथ ही, झांकी में छत्तीसगढ़ की जनजातीय कला, पारंपरिक नृत्य और शिल्प की विविधताएं भी देखने को मिलीं। राज्य की जनजातीय संस्कृति, कला और शिल्प की यह झांकी देश और दुनिया के सामने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को प्रस्तुत करने में सफल रही।

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आधुनिकता और परंपरा का संगम

भारत पर्व में भाग लेने के लिए देशभर के विभिन्न राज्यों ने अपनी झांकियां प्रस्तुत की हैं। छत्तीसगढ़ की झांकी ने खास तौर पर राज्य की आदिवासी संस्कृति, लोक कला, और जीवनशैली को लेकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। इसके माध्यम से न केवल राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को उजागर किया गया, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की आदिवासी परंपराओं के बारे में भी गहरी समझ देने का प्रयास था।

झांकी में विशेष रूप से जनजातीय नृत्य, शिल्प और पारंपरिक वस्त्रों की प्रदर्शनी ने इस झांकी को और भी जीवंत और आकर्षक बना दिया। दर्शकों को छत्तीसगढ़ की विभिन्न जनजातीय जातियों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई, जो अपनी विशेषताएं, कला, संस्कृति और परंपराओं के लिए जानी जाती हैं।

भारत पर्व 2025: भारतीय संस्कृति का अद्वितीय उत्सव

भारत पर्व 2025 भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण आयोजन है, जिसे पर्यटन मंत्रालय द्वारा 26 जनवरी से 31 जनवरी तक आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति, परंपराओं, और विविधता को दर्शकों तक पहुंचाना है। इस दौरान, देशभर के विभिन्न राज्यों की झांकियां, सांस्कृतिक प्रदर्शन और पारंपरिक व्यंजन विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

‘देखो अपना देश’ थीम के तहत छत्तीसगढ़ की झांकी

भारत पर्व 2025 का मुख्य थीम ‘देखो अपना देश’ है, और इस थीम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की झांकी ने राज्य की सांस्कृतिक गौरव और परंपराओं को देश और दुनिया के सामने पेश किया। इस झांकी में राज्य की अद्वितीय जनजातीय कला, धार्मिक परंपराएं, और जीवनशैली को खूबसूरत तरीके से प्रदर्शित किया गया है, जो दर्शकों के लिए एक अनोखा अनुभव बन गया है।

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दर्शकों के लिए खुला और निशुल्क प्रवेश

भारत पर्व 2025 में भाग लेने के लिए प्रवेश निशुल्क है और यह आयोजन प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है। इस आयोजन ने दर्शकों को भारत की सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक धरोहर और आधुनिक विकास का अनुभव करने का अद्वितीय अवसर प्रदान किया है।

लाल किले के प्रांगण में छत्तीसगढ़ की झांकी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ रहे हैं। झांकी के माध्यम से राज्य की संस्कृति और कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का यह अवसर छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है।

निष्कर्ष

भारत पर्व 2025 में छत्तीसगढ़ की झांकी ने अपनी सांस्कृतिक विशेषताओं, जनजातीय कला और रामनामी समुदाय की भक्ति परंपराओं के माध्यम से देशभर में राज्य की पहचान को मजबूत किया। यह झांकी न केवल राज्य की समृद्ध धरोहर को उजागर करती है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का जीवंत चित्रण प्रस्तुत करती है। इस आयोजन ने छत्तीसगढ़ के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी संस्कृति को प्रस्तुत करने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान किया।

गुरचरण सिंह होरा

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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