स्व. प्रकाश कौर की स्मृति में होरा परिवार ने रायपुर की गंगा कुष्ठ बस्ती में कुष्ठ पीड़ितों को भोजन और कंबल वितरित कर मानवता की मिसाल पेश की।
रायपुर। समाज में मानवता, करुणा और सेवा भाव की एक प्रेरणादायक मिसाल उस समय देखने को मिली, जब शहर के प्रतिष्ठित होरा परिवार ने स्वर्गीय प्रकाश कौर की स्मृति में कुष्ठ पीड़ितों के लिए सेवा कार्यक्रम आयोजित किया। शुक्रवार को होरा परिवार के सदस्यों ने पंडरी स्थित गंगा कुष्ठ बस्ती पहुंचकर वहां रहने वाले जरूरतमंदों को भोजन और कंबल वितरित किए।
देवेंद्र नगर निवासी स्व. प्रकाश कौर के हालिया निधन के बाद होरा परिवार ने उनकी स्मृति को सेवा कार्यों के माध्यम से जीवंत रखने का संकल्प लिया। इसी क्रम में कुष्ठ पीड़ितों के लिए लंगर और कंबल वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें बस्ती के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। परिवार के सदस्यों ने स्वयं अपने हाथों से भोजन परोसा और कंबल वितरित किए।

इस अवसर पर होरा परिवार के मुखिया दलेर सिंह होरा एवं गुरुचरण सिंह होरा ने गंगा कुष्ठ बस्ती का निरीक्षण किया और वहां के रहवासियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने बस्ती की साफ-सफाई, चिकित्सा सुविधाएं, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य बुनियादी आवश्यकताओं की जानकारी ली तथा संबंधित व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की।
गंगा कुष्ठ बस्ती के पदाधिकारियों और कुष्ठ पीड़ित परिवारों ने इस सेवा कार्य की सराहना करते हुए कहा कि स्व. प्रकाश कौर का कुष्ठ पीड़ितों के प्रति वर्षों से गहरा स्नेह और सेवा भाव रहा है। वे न केवल सहायता करती थीं, बल्कि पीड़ितों के सुख-दुख में परिवार के सदस्य की तरह साथ खड़ी रहती थीं।
मीडिया से चर्चा के दौरान कुष्ठ पीड़ित हेमिन बघेल और भैरव राणा ने बताया कि हर वर्ष कुष्ठ बस्ती के लोग देवेंद्र नगर स्थित स्व. प्रकाश कौर के निवास पर जाते थे, जहां उन्हें भोजन, कपड़े, बर्तन, स्वेटर और अन्य आवश्यक वस्तुएं नियमित रूप से मिलती थीं। उनके निधन की सूचना मिलने पर कुष्ठ पीड़ितों ने गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने कहा कि स्व. प्रकाश कौर का स्नेह और सहयोग कुष्ठ बस्ती के लोगों के लिए संबल का काम करता था। होरा परिवार द्वारा आयोजित यह सेवा कार्यक्रम उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रतीक है।
कार्यक्रम के दौरान बस्ती में भावुक माहौल देखने को मिला। सेवा, संवेदना और सम्मान के इस आयोजन ने समाज में यह संदेश दिया कि सच्ची श्रद्धांजलि वही है, जो जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान लाए।

