रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम लागू करने की तैयारी, जबकि कानपुर और वाराणसी में यह व्यवस्था असफल मानी गई। गृह विभाग नया खाका तैयार कर रहा है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के उद्देश्य से कमिश्नरी सिस्टम लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए गृह विभाग द्वारा विस्तृत खाका तैयार किया जा रहा है। हालांकि यह सिस्टम उत्तर प्रदेश के कानपुर और वाराणसी जैसे बड़े शहरों में अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाया, इसके बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार इसे रायपुर में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
🔍 क्या है कमिश्नरी सिस्टम
कमिश्नरी सिस्टम के तहत पुलिस व्यवस्था को जिला प्रशासन से अलग कर पुलिस कमिश्नर को अधिक अधिकार दिए जाते हैं। इसमें कानून-व्यवस्था, ट्रैफिक, अपराध नियंत्रण और प्रशासनिक फैसलों में पुलिस को त्वरित निर्णय लेने की शक्ति मिलती है। इस व्यवस्था में मजिस्ट्रेटी शक्तियां भी पुलिस अधिकारियों को सौंपी जाती हैं।
📉 यूपी में क्यों फेल माना गया यह सिस्टम
कानपुर और वाराणसी में कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद भी
- अपराध नियंत्रण में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ
- पुलिस पर अधिकारों के दुरुपयोग के आरोप लगे
- आम जनता की शिकायतों में कमी नहीं आई
- ट्रैफिक और संगठित अपराध पर प्रभाव सीमित रहा
इन कारणों से विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल व्यावहारिक रूप से पूरी तरह सफल नहीं हो सका।
🏛️ फिर रायपुर में क्यों तैयारी?
गृह विभाग के अधिकारियों के अनुसार रायपुर की तेजी से बढ़ती आबादी, शहरीकरण, ट्रैफिक दबाव और साइबर अपराध को देखते हुए प्रशासन पुलिस को ज्यादा स्वतंत्र और शक्तिशाली बनाना चाहता है। सरकार का मानना है कि अगर यह सिस्टम स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार संशोधित कर लागू किया जाए, तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
📑 गृह विभाग का प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव में
- रायपुर शहर को अलग पुलिस कमिश्नरेट घोषित करना
- पुलिस कमिश्नर को एडीजी या आईजी स्तर का अधिकारी बनाना
- ट्रैफिक, अपराध और कानून-व्यवस्था को एकीकृत कमान में लाना
- त्वरित कार्रवाई के लिए मजिस्ट्रेटी शक्तियां देना
जैसे बिंदु शामिल हैं।
🗣️ विशेषज्ञों की राय
पूर्व पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सिस्टम बदलने से सुधार नहीं होगा। जवाबदेही, संसाधन, प्रशिक्षण और निगरानी तंत्र मजबूत किए बिना कमिश्नरी सिस्टम भी विफल हो सकता है, जैसा कि अन्य राज्यों में देखने को मिला है।
🤔 जनता में मिली-जुली प्रतिक्रिया
रायपुर के नागरिकों में इस प्रस्ताव को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ लोग मानते हैं कि इससे अपराध पर नियंत्रण बढ़ेगा, जबकि कई नागरिकों को आशंका है कि इससे पुलिसिया सख्ती और अधिकारों का दुरुपयोग बढ़ सकता है।
🔮 आगे की राह
गृह विभाग का कहना है कि अंतिम निर्णय से पहले अन्य राज्यों के अनुभवों का अध्ययन, जनप्रतिनिधियों से चर्चा और प्रशासनिक समीक्षा की जाएगी। इसके बाद ही कमिश्नरी सिस्टम को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

