हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं को नि:शुल्क सोनोग्राफी सुविधा
📑 इस लेख मेंराजनांदगांव में हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं के लिए नि:शुल्क सोनोग्राफी सुविधा शुरू, सुरक्षित मातृत्व और मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने की पहलहाईरिस्क गर्भवती महिलाओं पर विशेष…
राजनांदगांव में हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं के लिए नि:शुल्क सोनोग्राफी सुविधा शुरू, सुरक्षित मातृत्व और मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने की पहल
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं के लिए राहत भरी पहल की गई है। स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़ और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से हाईरिस्क वाली गर्भवती माताओं के लिए नि:शुल्क सोनोग्राफी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इस पहल का उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना है। 👩⚕️🤱
हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में चिन्हित हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी की जा रही है। जिन महिलाओं में एनीमिया, ब्लड प्रेशर, शुगर, कम उम्र या अधिक उम्र में गर्भधारण, पूर्व प्रसव जटिलता जैसी समस्याएं पाई जाती हैं, उन्हें हाईरिस्क श्रेणी में रखा गया है।
इन महिलाओं के लिए नि:शुल्क सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, ताकि गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार की जटिलता का समय रहते पता लगाया जा सके।
ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को मिलेगा लाभ
इस पहल का विशेष लाभ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को मिलेगा। कई बार आर्थिक तंगी के कारण महिलाएं निजी अस्पतालों में सोनोग्राफी नहीं करा पातीं, जिससे जोखिम बढ़ जाता है।
अब सरकारी स्तर पर नि:शुल्क सुविधा मिलने से अधिक से अधिक महिलाओं की जांच संभव हो सकेगी और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सकेगा।
स्वास्थ्य शिविरों का भी आयोजन
स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन भी किया जा रहा है। इन शिविरों में गर्भवती महिलाओं की जांच, पोषण संबंधी सलाह और आवश्यक दवाइयों का वितरण किया जा रहा है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच कराने और संतुलित आहार लेने की सलाह दी जा रही है।
आशा और मितानिन कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका
इस अभियान में आशा और मितानिन कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। वे गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचा रही हैं।
इसके अलावा महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
मातृ मृत्यु दर कम करने का प्रयास
स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना है। इसके लिए गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच और उपचार को प्राथमिकता दी जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनकी नियमित निगरानी से जटिलताओं को कम किया जा सकता है।
महिलाओं ने जताई खुशी
इस पहल से महिलाओं में खुशी देखी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं ने बताया कि नि:शुल्क सोनोग्राफी सुविधा मिलने से उन्हें आर्थिक राहत मिली है और समय पर जांच कराने में सुविधा हो रही है।
इस प्रकार राजनांदगांव जिले में हाईरिस्क गर्भवती माताओं के लिए शुरू की गई नि:शुल्क सोनोग्राफी सुविधा सुरक्षित मातृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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