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पहले दो महीने की छुट्टी, अब DGP पद से हटाया गया: शत्रुजीत कपूर पर हरियाणा सरकार का बड़ा एक्शन क्यों?

पहले 2 महीने की छुट्टी पर भेजा, फिर DGP के पद से हटाया, शत्रुजीत कपूर के साथ हरियाणा सरकार ने क्यों किया ऐसा?   चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने…

📅 15 December 2025, 5:14 pm अपडेट: 16 May 2026
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पहले 2 महीने की छुट्टी पर भेजा, फिर DGP के पद से हटाया, शत्रुजीत कपूर के साथ हरियाणा सरकार ने क्यों किया ऐसा?
 
चंडीगढ़
हरियाणा सरकार ने रविवार देर शाम बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) शत्रुजीत कपूर को उनके पद से हटा दिया। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब वह पहले ही वदो महीने की छुट्टी पर भेजे जा चुके थे। सरकार ने साफ किया है कि 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी ओपी सिंह अगले आदेश तक कार्यवाहक डीजीपी बने रहेंगे, जबकि 1990 बैच के अधिकारी शत्रुजीत कपूर को हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि सरकार ने शत्रुजीत कपूर के साथ ऐसा बर्ताव क्यों किया है। दरअसल वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की कथित आत्महत्या से जुड़े विवाद के बाद ये फैसला लिया गया है।

शत्रुजीत कपूर अगस्त 2023 में डीजीपी बनाए गए थे। इस नियुक्ति के दौरान उन्होंने 1989 बैच के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों मोहम्मद अकील और आरसी मिश्रा को सुपरसीड किया था। उस समय भी यह फैसला चर्चा में रहा था। हालांकि, उनका कार्यकाल उस वक्त विवादों में घिर गया, जब हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की 7 अक्टूबर को कथित आत्महत्या का मामला सामने आया। इस घटना के बाद मृतक अधिकारी के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। इसी दबाव के बीच सरकार ने रोहतक के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारनिया को उनके पद से हटा दिया और शत्रुजीत कपूर को 14 अक्टूबर को दो महीने की छुट्टी पर भेज दिया गया। कपूर के छुट्टी पर जाते ही ओपी सिंह ने कार्यवाहक डीजीपी का कार्यभार संभाल लिया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और जांच के लिए पुलिस महानिरीक्षक पुष्पेंद्र कुमार के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। जांच अभी भी जारी है और इसी बीच सरकार का यह फैसला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। बता दें कि कपूर, जो 31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। वहीं ओपी सिंह की सेवानिवृत्ति 31 दिसंबर को है। फिलहाल वो हरियाणा पुलिस मुखिया बने रहेंगे। दोनों अधिकारियों से संबंधित आदेश हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) सुमिता मिश्रा ने उसी दिन जारी किए, जिस दिन कपूर की दो महीने की छुट्टी समाप्त हुई। ओपी सिंह अपने नए दायित्व के साथ-साथ हरियाणा राज्य नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के महानिदेशक और मधुबन स्थित फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के निदेशक की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे।

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इस बीच, ओपी सिंह के कार्यवाहक डीजीपी रहते हुए पुलिस विभाग ने कई बड़े अभियान चलाए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, उनके नेतृत्व में ‘ऑपरेशन ट्रैकडाउन’ और ‘ऑपरेशन हॉटस्पॉट डोमिनेशन’ जैसे समन्वित अभियानों के जरिए हजारों अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, संगठित गिरोहों पर शिकंजा कसा गया और कई संभावित आपराधिक वारदातों को समय रहते रोका गया। इसके साथ ही ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई, जिससे कई संवेदनशील इलाकों में नशे की सप्लाई पर असर पड़ा।

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला- DGP पद से हटाया गया
 
हरियाणा सरकार ने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी वाई पूरण कुमार की कथित आत्महत्या को लेकर हुए विवाद के बीच छुट्टी पर भेजे जाने के दो महीने बाद आईपीएस अधिकारी शत्रुजीत कपूर को रविवार को पुलिस महानिदेशक (DGP) के पद से कार्यमुक्त कर दिया। कपूर की गैरमौजूदगी में राज्य पुलिस प्रमुख का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे ओ पी सिंह को अगले आदेश तक कार्यवाहक डीजीपी (पुलिस बल के प्रमुख) के रूप में नियुक्त किया गया है।

कब होगी डीजीपी की नियुक्ति
हरियाणा सरकार नये डीजीपी की नियुक्ति के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एक सूची संघ लोक सेवा आयोग को भेज सकती है, क्योंकि 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी सिंह 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी कपूर हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन, पंचकूला के चेयरमैन का पद संभालते रहेंगे।  इंजीनियरिंग स्नातक कपूर को अगस्त 2023 में राज्य पुलिस प्रमुख नियुक्त किया गया था।

क्या था मामला
पूरन कुमार हरियाणा पुलिस के तेजतर्रार आईपीएस अफसरों में गिने जाते थे। कुछ महीने पहले वे चंडीगढ़ स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे, शरीर पर गोली लगने के निशान थे। प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का बताया गया था, जिसके बाद उनके लिए इंसाफ की मांग उठी। आपको बता दें कि पूरन कुमार ने अपने सुसाइड नोट में आठ वरिष्ठ अधिकारियों पर जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था. काफी दबाव के बाद शत्रुजीत कपूर को छुट्टी पर भेज दिया गया था।

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