रायपुर। धान खरीदी का रिकॉर्ड
छत्तीसगढ़ में इस खरीफ सीजन में धान खरीदी ने एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। अंतिम दिन शाम 6:45 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 149 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी हो चुकी है। इससे पहले, पिछले वर्ष कुल 144.92 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी। इस बार राज्य के 25.49 लाख पंजीकृत किसानों ने सरकार को धान बेचा है, जिससे यह खरीदी ऐतिहासिक बन गई है।
धान खरीदी के एवज में किसानों को 31 हजार 89 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। यह राशि बैंक लिंकिंग व्यवस्था के तहत सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर की गई है, जिससे किसानों को उनके फसल का मूल्य समय पर मिल सके।
कस्टम मिलिंग के लिए तेज हुआ धान का उठाव
खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मिलिंग के लिए भी तेजी से धान का उठाव किया जा रहा है। अब तक 121 लाख मीट्रिक टन धान के उठाव के लिए डीओ (डिलीवरी ऑर्डर) और टीओ (ट्रांसपोर्ट ऑर्डर) जारी किए जा चुके हैं। इनमें से 100 लाख मीट्रिक टन धान का उठाव पहले ही हो चुका है।
धान खरीदी में लगातार वृद्धि, सरकार की नीतियां लाभदायक
छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में सुधार और किसान-हितैषी नीतियों पर विशेष जोर दिया गया है। इसका नतीजा यह हुआ कि हर साल धान खरीदी के आंकड़ों में बढ़ोतरी हो रही है।
गौरतलब है कि इस खरीफ वर्ष के लिए कुल 27.78 लाख किसानों ने पंजीयन कराया था, जिनमें से 1.59 लाख नए किसान शामिल हुए हैं। सरकार द्वारा दी जा रही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी और उचित भुगतान प्रणाली के कारण किसान बड़े पैमाने पर अपनी उपज को सरकारी खरीदी केंद्रों में बेच रहे हैं।
धान खरीदी प्रक्रिया का सुचारु संचालन
धान खरीदी के अंतिम दिन भी किसानों की भारी भीड़ देखने को मिली। राज्य के विभिन्न खरीदी केंद्रों पर देर रात तक धान खरीदी की प्रक्रिया जारी रहेगी, ताकि हर किसान को अपनी फसल बेचने का अवसर मिल सके।
प्रदेश में इस बार खरीदी को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए कुल 2,500 से अधिक खरीदी केंद्रों की व्यवस्था की गई थी। खाद्य विभाग और सहकारी समितियों के अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि किसानों को न्यूनतम असुविधा हो और उनकी उपज का सही मूल्य मिले।
धान खरीदी में बढ़ते आंकड़े, कृषि क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का वर्चस्व बरकरार
छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में गिना जाता है। लगातार बढ़ रही धान खरीदी की मात्रा यह दर्शाती है कि राज्य में कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयास सफल हो रहे हैं।
राज्य सरकार की किसान-हितैषी योजनाओं जैसे राजीव गांधी किसान न्याय योजना, बैंक लिंकिंग भुगतान प्रणाली, खाद्य भंडारण सुविधाओं का विस्तार और कस्टम मिलिंग को गति देने की रणनीति के कारण किसान अपनी उपज को सरकार को बेचने के लिए प्रोत्साहित हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह की योजनाएं और सुविधाएं जारी रहीं, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की धान खरीदी और भी अधिक बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
धान खरीदी में लगातार हो रही वृद्धि यह साबित करती है कि छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र का विकास सही दिशा में हो रहा है। इस वर्ष का 149 लाख मीट्रिक टन का रिकॉर्ड, किसानों की मेहनत और सरकारी योजनाओं की सफलता को दर्शाता है।
धान खरीदी का यह ऐतिहासिक आंकड़ा बताता है कि प्रदेश में किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है और कृषि को बढ़ावा देने वाली योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। अब सरकार का अगला लक्ष्य कस्टम मिलिंग को और तेज करना और किसानों को नई तकनीकों से जोड़ना है, ताकि छत्तीसगढ़ कृषि क्षेत्र में देशभर में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रख सके।

