मार्च से पहले समय बढ़ाने की कवायद: एआई से जीएसटी रिटर्न की जांच, इसी से खुल रहा फर्जीवाड़ा
📑 इस लेख मेंरायपुर में एआई से जीएसटी रिटर्न की जांच शुरू, फर्जी बिलिंग और आईटीसी घोटाले उजागर, मार्च से पहले समय बढ़ाने की मांग पर चर्चा तेज।एआई…
रायपुर में एआई से जीएसटी रिटर्न की जांच शुरू, फर्जी बिलिंग और आईटीसी घोटाले उजागर, मार्च से पहले समय बढ़ाने की मांग पर चर्चा तेज।
रायपुर। राजधानी रायपुर में जीएसटी रिटर्न की जांच को लेकर कारोबारियों और कर विभाग के बीच हलचल तेज हो गई है। मार्च से पहले रिटर्न से जुड़े मामलों में समय-सीमा बढ़ाने को लेकर कवायद चल रही है। इसी बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम से रिटर्न की जांच शुरू होने के बाद फर्जी बिलिंग, गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) और संदिग्ध लेन-देन के कई मामले सामने आ रहे हैं।
कर विभाग अब पारंपरिक मैनुअल जांच के बजाय डिजिटल और एआई आधारित एनालिटिक्स से कर चोरी की पहचान कर रहा है, जिससे रिटर्न दाखिल करने वाले कारोबारियों पर निगरानी और कड़ी हो गई है।
एआई से हो रही स्मार्ट स्क्रूटनी
सूत्रों के अनुसार जीएसटी रिटर्न की जांच में अब ऐसे एआई टूल्स का उपयोग किया जा रहा है, जो—
- रिटर्न के पैटर्न का विश्लेषण करते हैं
- संदिग्ध लेन-देन को ऑटोमैटिक चिन्हित करते हैं
- एक ही पैन या जीएसटी नंबर से जुड़े कई फर्जी नेटवर्क को जोड़कर देखते हैं
- इनपुट टैक्स क्रेडिट और बिक्री के आंकड़ों में अंतर को पकड़ते हैं
इस नई व्यवस्था के बाद कई ऐसे कारोबारी रडार पर आए हैं, जिनके रिटर्न में लंबे समय से गड़बड़ियां चल रही थीं।
फर्जी बिलिंग और आईटीसी घोटाले पर फोकस
जीएसटी अधिकारियों का कहना है कि एआई आधारित जांच से सबसे ज्यादा फर्जी बिलिंग और बिना वास्तविक माल की खरीद-बिक्री दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने वाले मामलों का खुलासा हो रहा है।
कई मामलों में यह भी पाया गया है कि—
- एक ही पते पर कई फर्जी फर्में पंजीकृत हैं
- बिना कारोबार के केवल आईटीसी पास-ऑन किया जा रहा है
- कागजों में टर्नओवर दिखाकर टैक्स रिफंड लिया गया
एआई टूल्स इन सभी पैटर्न को आपस में जोड़कर तुरंत अलर्ट जनरेट कर रहे हैं।
मार्च से पहले समय बढ़ाने की तैयारी क्यों?
व्यापारिक संगठनों की ओर से यह मांग उठाई जा रही है कि—
- जिन मामलों में नोटिस जारी हुए हैं,
- जिन रिटर्न में तकनीकी त्रुटियां हैं,
- और जिन कारोबारियों को सुधार के लिए समय चाहिए,
उन्हें मार्च से पहले अतिरिक्त समय दिया जाए।
बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में रिटर्न एआई जांच के दायरे में आने के बाद व्यापारी वर्ग में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी वजह से समय-सीमा बढ़ाने को लेकर विभागीय स्तर पर चर्चा चल रही है।
कर विभाग की बदली रणनीति
जीएसटी प्रशासन अब केवल रिटर्न फाइल होने तक सीमित नहीं रह गया है। एआई सिस्टम के जरिए—
- जोखिम आधारित प्रोफाइलिंग
- हाई रिस्क टैक्सपेयर्स की पहचान
- नेटवर्क एनालिसिस
- ट्रांजैक्शन लिंकिंग
जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस पूरी व्यवस्था की निगरानी देश स्तर पर Central Board of Indirect Taxes and Customs के दिशा-निर्देशों के तहत की जा रही है।
कारोबारी वर्ग में बढ़ी चिंता
रायपुर के कई व्यापारियों का कहना है कि एआई आधारित जांच से गलत और सही दोनों तरह के मामलों पर एक साथ नोटिस आ रहे हैं। कई मामलों में मामूली तकनीकी त्रुटि को भी संदिग्ध लेन-देन मानकर सिस्टम फ्लैग कर रहा है, जिससे उन्हें स्पष्टीकरण देने के लिए बार-बार विभाग के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
व्यापारी संगठनों की मांग है कि—
- तकनीकी गलतियों और जानबूझकर की गई कर चोरी में स्पष्ट अंतर किया जाए
- नोटिस जारी करने से पहले मैनुअल सत्यापन भी अनिवार्य हो
कर चोरी पर लगेगी लगाम
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि एआई आधारित जांच से कर चोरी के मामलों में निश्चित रूप से कमी आएगी। पहले जहां सीमित स्टाफ और संसाधनों के कारण केवल कुछ मामलों की जांच हो पाती थी, अब हजारों रिटर्न एक साथ स्कैन किए जा रहे हैं।
इससे—
- फर्जी फर्मों पर कार्रवाई तेज होगी
- रिफंड घोटालों पर रोक लगेगी
- ईमानदार करदाताओं को लंबे समय में लाभ मिलेगा
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, मार्च से पहले बड़े पैमाने पर—
- कारण बताओ नोटिस
- रिटर्न संशोधन के निर्देश
- और संदिग्ध फर्मों का भौतिक सत्यापन
जैसी कार्रवाइयां तेज की जा सकती हैं। खासतौर पर उन फर्मों पर नजर है, जिनका टर्नओवर अचानक बहुत तेजी से बढ़ा है या जिनकी खरीद-बिक्री का पैटर्न सामान्य कारोबार से मेल नहीं खाता।
विभाग का साफ संदेश
कर विभाग ने स्पष्ट किया है कि एआई का उद्देश्य ईमानदार व्यापारियों को परेशान करना नहीं, बल्कि संगठित कर चोरी नेटवर्क को तोड़ना है। विभाग ने कारोबारियों से अपील की है कि वे अपने रिटर्न समय पर और सही जानकारी के साथ दाखिल करें तथा यदि कोई त्रुटि हो तो उसे स्वेच्छा से संशोधित कर लें।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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