छत्तीसगढ़ में आयुष्मान योजना संकट में, 200 निजी अस्पतालों ने इलाज बंद किया, 600 करोड़ रुपये का भुगतान अटका, गरीब मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) एक बार फिर गंभीर संकट में फंसती नजर आ रही है। राज्यभर के लगभग 200 से अधिक निजी अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के तहत इलाज बंद कर दिया है, जिससे हजारों गरीब और जरूरतमंद मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
निजी अस्पताल संचालकों का आरोप है कि सरकार द्वारा उनके लगभग 600 करोड़ रुपये के भुगतान लंबे समय से लंबित हैं। बकाया भुगतान न मिलने के कारण अस्पतालों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है, जिससे वे योजना के अंतर्गत मुफ्त इलाज जारी रखने में असमर्थ हो गए हैं।
💰 भुगतान नहीं, इलाज बंद
आयुष्मान योजना के तहत गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज दिया जाता है। निजी अस्पताल इस योजना के प्रमुख स्तंभ हैं, लेकिन भुगतान में देरी के चलते—
- अस्पतालों की ऑपरेशनल लागत बढ़ गई है
- दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की खरीद प्रभावित हो रही है
- डॉक्टरों और स्टाफ को वेतन देने में दिक्कत आ रही है
इन्हीं कारणों से कई अस्पतालों ने आयुष्मान मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया है।
🏥 200 अस्पतालों का बाहर होना गंभीर संकेत
राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित लगभग 200 निजी अस्पतालों ने योजना से खुद को अलग कर लिया है। इनमें बड़े मल्टीस्पेशलिटी अस्पतालों से लेकर छोटे नर्सिंग होम तक शामिल हैं। इससे—
- ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के मरीज सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं
- सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव तेजी से बढ़ रहा है
- इमरजेंसी मामलों में इलाज मिलने में देरी हो रही है
📊 600 करोड़ रुपये का लंबित भुगतान
निजी अस्पताल संघों का दावा है कि वर्ष 2023–24 और 2024–25 के दौरान किए गए इलाज का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। कई अस्पतालों के 10 से 15 करोड़ रुपये तक के बिल अटके हुए हैं।
अस्पताल संचालकों का कहना है कि उन्होंने कई बार स्वास्थ्य विभाग और राज्य नोडल एजेंसी को ज्ञापन सौंपा, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकला।
🗣️ अस्पताल संचालकों की चेतावनी
निजी अस्पताल संघ के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि—
“यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया, तो शेष अस्पताल भी आयुष्मान योजना से बाहर हो जाएंगे। यह स्थिति सीधे गरीब मरीजों के जीवन से जुड़ी है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल व्यापारिक संस्थान हैं, दानशाला नहीं। लगातार घाटे में इलाज जारी रखना संभव नहीं है।
🏥 मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
इलाज बंद होने से—
- गरीब मरीजों को निजी अस्पतालों में कैश इलाज कराना पड़ रहा है
- कई मरीज इलाज बीच में ही छोड़ने को मजबूर हैं
- गंभीर बीमारियों के मरीजों को दूर-दराज के सरकारी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।
🏛️ सरकार की सफाई
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि—
- भुगतान प्रक्रिया में तकनीकी और बजटीय अड़चनें आई हैं
- केंद्र और राज्य स्तर पर समन्वय के प्रयास जारी हैं
- जल्द ही लंबित दावों का निपटारा किया जाएगा
हालांकि, अभी तक कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं की गई है, जिससे अस्पतालों और मरीजों दोनों में असमंजस बना हुआ है।
⚠️ योजना की साख पर सवाल
आयुष्मान भारत योजना को देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना माना जाता है। लेकिन लगातार भुगतान संकट, अस्पतालों का बाहर होना और मरीजों की परेशानी—
- योजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं
- गरीबों के मुफ्त इलाज के सपने को झटका दे रहे हैं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार समय पर भुगतान और पारदर्शी व्यवस्था नहीं बनाती, तो योजना का उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाएगा।

