रायपुर में ठंड और दूषित पानी से बीमारियां बढ़ीं। अस्पतालों में रोज 100 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें उल्टी-दस्त के सबसे अधिक मामले हैं।
रायपुर। राजधानी रायपुर में ठंड के बढ़ते प्रकोप और दूषित पेयजल के कारण बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों में रोजाना 100 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें सबसे ज्यादा मामले उल्टी-दस्त, पेट दर्द, बुखार और डिहाइड्रेशन के हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, सर्दी के मौसम में पानी की गुणवत्ता बिगड़ने से संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
उल्टी-दस्त के मामलों में तेजी
डॉक्टरों के मुताबिक, बीते कुछ दिनों से गैस्ट्रोएंटेराइटिस, फूड प्वाइजनिंग और डायरिया के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित—
- बच्चे
- बुजुर्ग
- कमजोर इम्युनिटी वाले लोग
हैं। कई मरीजों को गंभीर हालत में भर्ती भी करना पड़ रहा है।
दूषित पानी बना बड़ी वजह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड के मौसम में लोग पानी कम पीते हैं और अक्सर उबला या फिल्टर किया हुआ पानी इस्तेमाल नहीं करते, जिससे बैक्टीरिया और वायरस शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। कई इलाकों में—
- पाइपलाइन से गंदा पानी आना
- पानी में बदबू या मटमैलेपन की शिकायत
- टंकी और पाइप की समय पर सफाई न होना
जैसी समस्याएं सामने आई हैं।
अस्पतालों पर बढ़ा दबाव
शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में ओपीडी में लंबी कतारें देखी जा रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि रोजाना—
- 60–70 मरीज उल्टी-दस्त
- 20–30 मरीज वायरल बुखार
- अन्य मरीज सर्दी-खांसी और पेट दर्द
की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
डॉक्टरों की सलाह
चिकित्सकों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा—
- हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं
- बाहर का खुला और बासी खाना न खाएं
- हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखें
- बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष नजर रखें
- लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करें
स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को देखते हुए अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखा है। दवाओं और ओआरएस की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। साथ ही नगर निगम को पेयजल की गुणवत्ता जांचने और प्रभावित इलाकों में सफाई बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
नागरिकों में चिंता
लगातार बढ़ रहे मामलों को देखकर आम नागरिकों में भी चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ तो हालात और बिगड़ सकते हैं। कई सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से जल आपूर्ति की नियमित जांच और स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग की है।
सावधानी ही बचाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। थोड़ी सी लापरवाही गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है। समय पर इलाज न मिलने से स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।

