छत्तीसगढ़ में किडनी मरीजों की संख्या के आधार पर जिलावार डायलिसिस सेंटर खोलने की तैयारी, रायपुर से सर्वे शुरू, मरीजों को जिले में ही इलाज सुविधा मिलेगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में किडनी रोग से पीड़ित मरीजों को बड़ी राहत देने की दिशा में राज्य सरकार ने अहम पहल की है। अब जिन जिलों में किडनी के मरीजों की संख्या अधिक पाई जाएगी, उन्हीं जिलों में प्राथमिकता के आधार पर डायलिसिस सेंटर खोले जाएंगे। इसके लिए प्रदेशभर में स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य यह है कि गंभीर किडनी रोग से जूझ रहे मरीजों को इलाज के लिए दूर-दराज के बड़े शहरों का रुख न करना पड़े और उन्हें अपने ही जिले में समय पर डायलिसिस सुविधा मिल सके।
यह योजना पूरे छत्तीसगढ़ में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।
जिलावार सर्वे शुरू, मरीजों का तैयार होगा डेटा
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार सभी जिलों के सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला चिकित्सालयों से किडनी रोग से जुड़े मरीजों का रिकॉर्ड एकत्र किया जा रहा है।
सर्वे के दौरान यह जानकारी जुटाई जा रही है—
- कितने मरीज नियमित डायलिसिस पर निर्भर हैं
- कितने नए किडनी मरीज हर महीने सामने आ रहे हैं
- वर्तमान में किस जिले में कितनी डायलिसिस मशीनें उपलब्ध हैं
- मरीजों को इलाज के लिए कितनी दूरी तय करनी पड़ रही है
इसी आधार पर जिलावार प्राथमिकता सूची तैयार की जाएगी।
जरूरत के अनुसार खुलेगा डायलिसिस सेंटर
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अब पहले की तरह एक समान व्यवस्था के बजाय जरूरत आधारित मॉडल अपनाया जाएगा। जिन जिलों में किडनी के मरीज ज्यादा हैं और इलाज की सुविधाएं सीमित हैं, वहां नए डायलिसिस सेंटर खोले जाएंगे।
अधिकारियों के मुताबिक कई जिलों में अभी मरीजों को डायलिसिस के लिए रायपुर या अन्य बड़े शहरों में आना पड़ता है, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियां बढ़ जाती हैं।
रायपुर सहित बड़े जिलों पर भी रहेगा फोकस
राजधानी रायपुर में पहले से डायलिसिस की सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन आसपास के जिलों से आने वाले मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि सर्वे में यह भी देखा जाएगा कि किस जिले से कितने मरीज रायपुर रेफर किए जा रहे हैं।
सरकार का उद्देश्य यह है कि मरीजों को इलाज के लिए जिला स्तर पर ही बेहतर सुविधा उपलब्ध हो, ताकि बड़े अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव कम किया जा सके।
आर्थिक बोझ कम करने की दिशा में पहल
किडनी के मरीजों के लिए नियमित डायलिसिस एक बड़ी आर्थिक चुनौती होती है। सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस कराने वाले मरीजों को यात्रा, दवा और अन्य खर्चों पर बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यदि जिला स्तर पर डायलिसिस सेंटर उपलब्ध हो जाएंगे, तो—
- मरीजों को बार-बार दूसरे शहर नहीं जाना पड़ेगा
- इलाज में देरी की समस्या कम होगी
- गरीब और ग्रामीण मरीजों को अधिक लाभ मिलेगा
सरकारी अस्पतालों में विकसित होंगे नए यूनिट
नई योजना के तहत डायलिसिस सेंटर मुख्य रूप से जिला अस्पतालों और चुनिंदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में खोले जाएंगे। जहां भवन और बुनियादी ढांचा पहले से उपलब्ध है, वहां नई मशीनें और प्रशिक्षित स्टाफ की व्यवस्था की जाएगी।
इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर निजी एजेंसियों के माध्यम से भी संचालन मॉडल अपनाया जा सकता है, ताकि सेवाएं नियमित और सुचारु रूप से चलती रहें।
विशेषज्ञ डॉक्टरों और तकनीशियनों की भी होगी तैनाती
केवल मशीनें लगाना ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता भी इस योजना का अहम हिस्सा है। स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिए हैं कि—
- डायलिसिस तकनीशियनों की नियुक्ति की जाएगी
- नर्सिंग स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा
- जरूरत के अनुसार नेफ्रोलॉजिस्ट से टेली-परामर्श सुविधा भी जोड़ी जाएगी
इससे छोटे जिलों में भी मरीजों को विशेषज्ञ सलाह मिल सकेगी।
ग्रामीण और आदिवासी इलाकों को मिलेगी प्राथमिकता
छत्तीसगढ़ के कई ग्रामीण और आदिवासी बहुल जिलों में किडनी रोग के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, लेकिन वहां इलाज की सुविधाएं बेहद सीमित हैं।
स्वास्थ्य विभाग का फोकस ऐसे जिलों पर विशेष रूप से रहेगा, जहां—
- मरीजों की संख्या अधिक है
- स्वास्थ्य संसाधन सीमित हैं
- मरीजों को 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी पड़ती है
सर्वे रिपोर्ट के बाद बनेगा कार्ययोजना
अधिकारियों ने बताया कि सर्वे पूरा होने के बाद राज्य स्तर पर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसमें यह तय किया जाएगा कि—
- पहले चरण में किन जिलों में डायलिसिस सेंटर खोले जाएंगे
- प्रत्येक जिले में कितनी मशीनें लगाई जाएंगी
- कितने स्टाफ की जरूरत होगी
- संचालन के लिए बजट का प्रावधान कैसे किया जाएगा
स्वास्थ्य विभाग की बड़ी पहल
यह पूरा अभियान छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाया जा रहा है। विभाग का मानना है कि किडनी रोगियों के लिए समय पर डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराना जीवन रक्षक कदम साबित हो सकता है।
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में इस मॉडल को अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज से भी जोड़ा जा सकता है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को वास्तविक जरूरतों के अनुसार मजबूत किया जा सके।
मरीजों और परिजनों में जगी उम्मीद
किडनी मरीजों और उनके परिजनों ने इस पहल को राहत भरा कदम बताया है। उनका कहना है कि यदि उनके जिले में ही डायलिसिस सुविधा शुरू हो जाती है, तो उन्हें इलाज के साथ-साथ रोजमर्रा की जिंदगी को संभालना भी आसान हो जाएगा।
कई मरीजों ने बताया कि यात्रा और रहने का खर्च ही इलाज से ज्यादा भारी पड़ जाता है।
प्रदेश में बदलेगी डायलिसिस व्यवस्था की तस्वीर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जिलावार सर्वे के आधार पर डायलिसिस सेंटर खोलने का यह मॉडल छत्तीसगढ़ में किडनी मरीजों के इलाज की तस्वीर बदल सकता है। इससे स्वास्थ्य सुविधाओं का संतुलित वितरण होगा और वास्तविक जरूरत वाले क्षेत्रों तक संसाधन पहुंचेंगे।

