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मौत दर्ज, पर प्रमाण नहीं: एम्स व मेकाहारा में डेथ सर्टिफिकेट के लिए माहभर का इंतजार

📑 इस लेख मेंरायपुर के एम्स और मेकाहारा में मृत्यु के बाद डेथ सर्टिफिकेट के लिए परिजनों को एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा, जिससे बीमा और…

📅 16 January 2026, 11:13 am अपडेट: 16 May 2026
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रायपुर के एम्स और मेकाहारा में मृत्यु के बाद डेथ सर्टिफिकेट के लिए परिजनों को एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा, जिससे बीमा और कानूनी काम अटक रहे हैं।

रायपुर। राजधानी रायपुर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों एम्स (AIIMS) और मेकाहारा (डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल) में इलाज के दौरान मृत्यु होने पर परिजनों को डेथ सर्टिफिकेट के लिए एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि अस्पतालों में मौत दर्ज तो हो जाती है, लेकिन उसका आधिकारिक प्रमाण पत्र समय पर नहीं मिल पा रहा, जिससे परिजनों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।

मृत्यु प्रमाण पत्र न मिलने के कारण बीमा क्लेम, बैंक खाते, पेंशन, जमीन-जायदाद के नामांतरण और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं अटक जाती हैं।


मौत के बाद भी दौड़-भाग

परिजनों का कहना है कि मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा डेथ स्लिप तो दी जाती है, लेकिन नगर निगम या स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी डेथ सर्टिफिकेट के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

कई मामलों में—

  • फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग भेजी जाती हैं
  • ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट में देरी होती है
  • मेडिकल रिपोर्ट अधूरी बताकर आवेदन लौटा दिया जाता है

एम्स और मेकाहारा में सबसे ज्यादा शिकायतें

एम्स और मेकाहारा दोनों ही प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हैं। यहां रोजाना दर्जनों मौतें होती हैं, लेकिन—

  • प्रमाण पत्र जारी करने वाला स्टाफ सीमित है
  • पोस्टमार्टम और मेडिकल रिकॉर्ड में देरी होती है
  • नगर निगम और अस्पताल के बीच समन्वय की कमी है

परिणामस्वरूप कई परिवारों को 20 से 30 दिन तक इंतजार करना पड़ता है।


आर्थिक और मानसिक परेशानी

डेथ सर्टिफिकेट में देरी का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है।
परिजनों के अनुसार—

  • बीमा कंपनियां बिना सर्टिफिकेट क्लेम नहीं देतीं
  • बैंक खाते और पेंशन बंद नहीं हो पाती
  • सरकारी योजनाओं का लाभ अटक जाता है

एक पीड़ित परिजन ने बताया,
“मौत का दुख अलग है, ऊपर से दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। हर जगह सर्टिफिकेट मांगा जा रहा है, लेकिन मिल नहीं रहा।”


नियम क्या कहते हैं?

सरकारी नियमों के अनुसार, मृत्यु के 21 दिनों के भीतर डेथ सर्टिफिकेट जारी होना चाहिए, लेकिन व्यवहार में यह नियम कागजों तक ही सीमित रह गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि—

  • अस्पताल से नगर निगम को डेटा तुरंत भेजा जाए
  • पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑटोमेटिक हो
  • परिजनों को अलग से आवेदन करने की जरूरत न पड़े

प्रशासन का पक्ष

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि—

  • मृत्यु के कारणों की पुष्टि जरूरी होती है
  • कई मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में समय लगता है
  • स्टाफ की कमी और तकनीकी कारणों से देरी होती है

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि सिस्टम को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।


समाधान की जरूरत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि—

  • एम्स और मेकाहारा में वन-स्टॉप डेथ सर्टिफिकेट काउंटर बनाया जाए
  • डिजिटल रिकॉर्ड तुरंत निगम पोर्टल पर अपलोड हो
  • परिजनों को समयसीमा की स्पष्ट जानकारी दी जाए

निष्कर्ष

एम्स और मेकाहारा जैसे बड़े अस्पतालों में मौत दर्ज होने के बावजूद प्रमाण पत्र के लिए लंबा इंतजार व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि इस संवेदनशील प्रक्रिया को तेज, सरल और मानवीय बनाया जाए, ताकि शोक में डूबे परिवारों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना न करना पड़े।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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