रायपुर के पंडरी, एमजी रोड और कटोरा तालाब बाजारों में पार्किंग की भारी कमी, लोग मजबूरी में सड़क पर गाड़ी खड़ी कर रहे, फिर भी चालानी कार्रवाई जारी।
रायपुर | राजधानी रायपुर के सबसे व्यस्त और प्रमुख बाजार क्षेत्रों—पंडरी, एमजी रोड और कटोरा तालाब—में वाहन पार्किंग एक गंभीर समस्या बन चुकी है। हालात यह हैं कि खरीदारी, बैंक, अस्पताल या रोजमर्रा के काम से आने वाले लोगों के सामने सड़क पर गाड़ी खड़ी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता, लेकिन दूसरी ओर यातायात पुलिस लगातार चालानी कार्रवाई कर जुर्माना भी वसूल रही है।
स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि बाजारों में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था न होने के बावजूद आम लोगों पर कार्रवाई करना पूरी तरह अनुचित है। लोगों की मजबूरी को समझे बिना सड़क पर खड़े वाहनों पर सीधे चालान काटे जा रहे हैं।
पंडरी बाजार में सबसे ज्यादा परेशानी
पंडरी कपड़ा बाजार और आसपास के व्यावसायिक इलाकों में रोजाना हजारों लोग पहुंचते हैं। यहां बड़ी संख्या में थोक और खुदरा दुकानें हैं, लेकिन सरकारी या निजी पार्किंग स्थल न के बराबर हैं। मुख्य सड़क के दोनों ओर पहले से ही दुकानों का अतिक्रमण है, जिससे वाहन खड़ा करने की जगह लगभग समाप्त हो चुकी है।
ग्राहकों का कहना है कि वे कुछ मिनटों के लिए ही वाहन खड़ा करते हैं, लेकिन उसी दौरान चालान थमा दिया जाता है।
एमजी रोड और कटोरा तालाब की भी वही स्थिति
एमजी रोड, जो रायपुर का ऐतिहासिक और सबसे व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र माना जाता है, वहां भी पार्किंग सुविधा लगभग शून्य है। सड़क के किनारे खड़े वाहनों से यातायात बाधित होता है, लेकिन वाहन चालकों के पास और कोई विकल्प नहीं है।
इसी तरह कटोरा तालाब क्षेत्र, जहां कोचिंग संस्थान, दुकानें और कार्यालय बड़ी संख्या में हैं, वहां भी पार्किंग का स्थायी समाधान अब तक नहीं किया गया है।
व्यापारी बोले – सुविधा दो, फिर कार्रवाई करो
स्थानीय व्यापारी संघों का कहना है कि नगर निगम और यातायात विभाग पहले पर्याप्त पार्किंग स्थल विकसित करें, उसके बाद सख्ती दिखाएं। व्यापारियों के अनुसार, पार्किंग न होने से ग्राहक बाजार आने से भी कतराने लगे हैं, जिससे व्यापार पर सीधा असर पड़ रहा है।
आम लोगों की मजबूरी
शहरवासियों का कहना है कि वे यातायात नियमों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जब पार्किंग की कोई वैकल्पिक व्यवस्था ही नहीं होती, तो सड़क पर गाड़ी खड़ी करना मजबूरी बन जाती है।
कई लोगों ने यह भी बताया कि न तो मल्टी लेवल पार्किंग का उपयोग सही ढंग से हो रहा है और न ही बाजार क्षेत्रों के पास सुलभ भुगतान आधारित पार्किंग की व्यवस्था है।
नगर निगम और यातायात विभाग पर उठे सवाल
शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि नगर निगम द्वारा वर्षों से मल्टी लेवल पार्किंग और स्मार्ट पार्किंग परियोजनाओं की बातें की जाती रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका असर बेहद सीमित नजर आता है।
लोगों का सवाल है कि जब पार्किंग स्थल ही उपलब्ध नहीं हैं, तो केवल चालानी कार्रवाई कर समस्या का समाधान कैसे होगा?
ट्रैफिक जाम की भी बड़ी वजह
सड़क किनारे खड़े वाहनों के कारण इन बाजार क्षेत्रों में अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। स्कूल बस, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपात सेवाओं को भी निकलने में परेशानी होती है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पंडरी, एमजी रोड और कटोरा तालाब जैसे क्षेत्रों में तुरंत अस्थायी और स्थायी पार्किंग की व्यवस्था की जाए।
समाधान की दिशा में क्या जरूरी
शहरवासियों का सुझाव है कि खाली सरकारी जमीन, पुराने मैदान या अनुपयोगी परिसरों को अस्थायी पार्किंग में बदला जाए। साथ ही बाजार क्षेत्रों के आसपास मल्टी लेवल पार्किंग भवनों का निर्माण तेज किया जाए।
इसके अलावा पीक आवर्स में नो-पार्किंग के साथ-साथ वैकल्पिक पार्किंग स्थल का स्पष्ट संकेत बोर्ड भी लगाए जाने चाहिए, ताकि लोगों को पहले से जानकारी मिल सके।
जनहित में संतुलन जरूरी
लोगों का कहना है कि नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन नियमों के साथ सुविधाओं का होना भी उतना ही जरूरी है। केवल जुर्माना वसूलने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि स्थायी पार्किंग नीति और व्यवहारिक व्यवस्था बनाना समय की मांग है।

