रायपुर कलेक्टर ने महिला समूहों के उत्पाद ऑनलाइन जोड़ने के निर्देश दिए। पैरा आर्ट बना रहीं महिलाएं जल्द फिनाइल-साबुन निर्माण शुरू करेंगी
रायपुर। जिले में महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल करते हुए रायपुर कलेक्टर ने महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने महिला समूहों के उत्पादन एवं प्रशिक्षण केंद्र का निरीक्षण करते हुए कहा कि समूहों के उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर है और इन्हें डिजिटल माध्यम से बाजार से जोड़कर उनकी बिक्री बढ़ाई जा सकती है।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने समूह की महिलाओं से सीधे संवाद किया और उनके कार्य, प्रशिक्षण प्रक्रिया तथा विपणन व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऑनलाइन माध्यम से बिक्री एक बड़ा अवसर है और महिला समूहों को इस दिशा में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
पैरा आर्ट के जरिए दिख रही महिलाओं की रचनात्मकता
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने देखा कि महिला समूह की सदस्य पैरा आर्ट के माध्यम से आकर्षक सजावटी उत्पाद तैयार कर रही हैं। रंगों और डिजाइनों के माध्यम से बनाई जा रही यह कलाकृतियां न केवल देखने में सुंदर हैं, बल्कि बाजार में अच्छी मांग रखने की क्षमता भी रखती हैं।
कलेक्टर ने महिलाओं की सराहना करते हुए कहा कि पैरा आर्ट जैसे हस्तशिल्प उत्पादों को ब्रांडिंग के साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाए, ताकि इन्हें राज्य के बाहर भी पहचान मिल सके।
जल्द बनाए जाएंगे फिनाइल और साबुन
महिला समूह की सदस्यों ने कलेक्टर को जानकारी दी कि वे जल्द ही फिनाइल और साबुन निर्माण का कार्य भी शुरू करने जा रही हैं। इसके लिए प्रशिक्षण और कच्चे माल की व्यवस्था की जा रही है।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि उत्पादन शुरू करने से पहले गुणवत्ता मानकों का पूरा ध्यान रखा जाए, ताकि बाजार में समूह की साख बनी रहे।
उन्होंने कहा कि साफ-सफाई से जुड़े उत्पादों की मांग लगातार बनी रहती है और यदि महिलाएं मानक गुणवत्ता के साथ फिनाइल और साबुन तैयार करेंगी, तो इससे समूह की नियमित आय सुनिश्चित हो सकेगी।
ऑनलाइन मार्केट से जोड़ने पर जोर
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि महिला समूहों के उत्पादों को ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की प्रक्रिया तेज की जाए। इसके लिए आवश्यक तकनीकी सहयोग, फोटोग्राफी, पैकेजिंग और ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था भी कराई जाए।
उन्होंने कहा कि अब केवल स्थानीय बाजार तक सीमित रहने के बजाय महिला समूहों को राज्य और देश स्तर पर पहचान दिलाना जरूरी है। डिजिटल माध्यम से उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी और महिलाओं को बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी रहेगा फोकस
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने पैकेजिंग और लेबलिंग व्यवस्था का भी जायजा लिया। उन्होंने कहा कि अच्छे उत्पाद के साथ आकर्षक पैकेजिंग भी उतनी ही जरूरी है।
महिला समूहों को एक साझा ब्रांड नाम के तहत उत्पादों को बाजार में उतारने की संभावनाओं पर भी विचार करने के निर्देश दिए गए।
महिलाओं की आमदनी बढ़ाने की दिशा में प्रयास
कलेक्टर ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूह केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण और शहरी महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने का मजबूत आधार हैं। यदि उत्पादन, गुणवत्ता और विपणन तीनों पर एक साथ काम किया जाए, तो महिलाएं स्थायी आजीविका हासिल कर सकती हैं।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नियमित रूप से महिला समूहों के कार्यों की समीक्षा की जाए और जहां भी जरूरत हो, प्रशिक्षण और संसाधनों की व्यवस्था की जाए।
महिलाओं ने साझा किए अपने अनुभव
निरीक्षण के दौरान महिला समूह की सदस्यों ने बताया कि पैरा आर्ट प्रशिक्षण से उन्हें नई पहचान मिली है और अब वे अपने उत्पादों को बाजार में बेचने को लेकर उत्साहित हैं। महिलाओं ने यह भी बताया कि फिनाइल और साबुन निर्माण से उन्हें स्थायी आय का जरिया मिलने की उम्मीद है।
महिलाओं ने कलेक्टर को भरोसा दिलाया कि वे गुणवत्ता और समय पर उत्पादन पर विशेष ध्यान देंगी।
आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
कलेक्टर ने कहा कि जिले में संचालित महिला समूहों को चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग प्रकार के उत्पाद निर्माण से जोड़ा जाएगा। इससे न केवल महिलाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि जिले की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
निरीक्षण के अंत में उन्होंने महिला समूहों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले समय में इन समूहों को जिला स्तर के प्रमुख उत्पाद ब्रांड के रूप में विकसित किया जाएगा।

