सिटी फॉरेस्ट योजना: जमीन नहीं, आउटर में पौधरोपण
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रायपुर समेत 20 निकायों में सिटी फॉरेस्ट के लिए जमीन नहीं मिली, आउटर क्षेत्रों में पौधरोपण की तैयारी, बढ़ते कांक्रीट जंगलों से हरियाली चुनौती
रायपुर। शहरों में बढ़ते कांक्रीट के जंगलों के बीच हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई सिटी फॉरेस्ट योजना को जमीन की कमी के कारण झटका लग रहा है। प्रदेश के करीब 20 नगरीय निकायों में सिटी फॉरेस्ट के लिए पर्याप्त जमीन नहीं मिल सकी है। ऐसे में अब प्रशासन शहर के आउटर क्षेत्रों में पौधरोपण करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। 🌳
शहरी क्षेत्रों में तेजी से हो रहे निर्माण और विस्तार के कारण हरियाली लगातार कम होती जा रही है। इस स्थिति को देखते हुए सिटी फॉरेस्ट योजना शुरू की गई थी, लेकिन जमीन की अनुपलब्धता ने योजना की गति धीमी कर दी है।
कांक्रीट के जंगल बढ़ने से चुनौती
शहरों में तेजी से बढ़ते निर्माण कार्यों ने हरियाली को काफी प्रभावित किया है। नए कॉलोनियों, सड़क निर्माण और व्यावसायिक भवनों के कारण खाली जमीन कम होती जा रही है। इससे सिटी फॉरेस्ट विकसित करने के लिए उपयुक्त स्थान मिलना मुश्किल हो गया है। 🏙️
विशेषज्ञों का कहना है कि शहरों में हरियाली की कमी से तापमान बढ़ता है और प्रदूषण भी बढ़ता है। सिटी फॉरेस्ट इस समस्या का प्रभावी समाधान माना जा रहा है।
20 निकायों में नहीं मिली जमीन
जानकारी के अनुसार, प्रदेश के करीब 20 नगरीय निकायों में सिटी फॉरेस्ट के लिए जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं:
- शहरी विस्तार
- सरकारी जमीन की कमी
- निजी जमीन अधिग्रहण में कठिनाई
- भूमि विवाद
इन कारणों से योजना को लागू करने में देरी हो रही है।
आउटर क्षेत्रों में लगाया जाएगा पौधे
जमीन की कमी को देखते हुए प्रशासन ने अब शहर के आउटर क्षेत्रों में सिटी फॉरेस्ट विकसित करने का निर्णय लिया है। आउटर क्षेत्र में उपलब्ध जमीन पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाएगा। 🌱
अधिकारियों का कहना है कि आउटर क्षेत्रों में पर्याप्त जगह होने के कारण वहां बड़े सिटी फॉरेस्ट विकसित किए जा सकते हैं।
पर्यावरण सुधार की दिशा में कदम
सिटी फॉरेस्ट योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना है। इसके तहत:
- पौधरोपण
- स्थानीय प्रजातियों का चयन
- जैव विविधता संरक्षण
- नागरिकों के लिए हरित क्षेत्र
जैसे प्रयास किए जाएंगे।
विशेषज्ञों की राय
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि सिटी फॉरेस्ट शहर के भीतर ही विकसित किए जाने चाहिए, ताकि लोगों को अधिक लाभ मिल सके। हालांकि आउटर क्षेत्र में विकसित फॉरेस्ट भी पर्यावरण सुधार में मददगार होंगे। 🌍
नागरिकों को मिलेगा लाभ
सिटी फॉरेस्ट विकसित होने से नागरिकों को कई लाभ मिलेंगे:
- स्वच्छ हवा
- तापमान में कमी
- प्रदूषण नियंत्रण
- मनोरंजन के लिए हरित क्षेत्र
इसके अलावा जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा।
योजना को तेज करने की तैयारी
अधिकारियों ने बताया कि जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया जारी है। जहां भी जमीन उपलब्ध होगी, वहां सिटी फॉरेस्ट विकसित किए जाएंगे।
बढ़ती हरियाली की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच हरियाली बढ़ाना बेहद जरूरी है। सिटी फॉरेस्ट योजना इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल
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