गिरौदपुरी मेला में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, गुरु गद्दी की पूजा कर प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना

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रायपुर। गिरौदपुरी मेला

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मंगलवार को गिरौदपुरी धाम में आयोजित गुरुदर्शन मेला में शामिल हुए। उन्होंने गुरु गद्दी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर गिरौदपुरी मेले की राशि 25 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने और मेला परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार से मंदिर तक स्थायी शेड निर्माण की घोषणा की।

गुरु गद्दी की पूजा कर लिया आशीर्वाद

गिरौदपुरी धाम में आयोजित तीन दिवसीय गुरुदर्शन मेले के पहले दिन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरु गद्दी के दर्शन किए और वहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु घासीदास जी के सत्य, अहिंसा और समानता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य है

मुख्यमंत्री ने गिरौदपुरी मेले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह मेला सद्भावना, एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं को स्वयं प्रसाद वितरित कर उनका आशीर्वाद लिया।

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गिरौदपुरी मेले की राशि दोगुनी, स्थायी शेड निर्माण की घोषणा

मुख्यमंत्री साय ने मेले की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए गिरौदपुरी मेले के बजट को 25 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने की घोषणा की। इसके अलावा, श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मेला परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार से मंदिर तक स्थायी शेड निर्माण का भी ऐलान किया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रद्धालुओं की आस्था और सुविधाओं को प्राथमिकता दे रही है। इसके तहत गिरौदपुरी धाम के विकास के लिए और भी योजनाएं बनाई जाएंगी

धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति

गिरौदपुरी मेले के पहले दिन धर्मगुरु गुरुबालदास साहेब, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री दयालदास बघेल, पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा, कलेक्टर दीपक सोनी, एसएसपी विजय अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में संत, श्रद्धालु और गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

सभी ने गिरौदपुरी धाम की आध्यात्मिक गरिमा को लेकर अपने विचार व्यक्त किए और गुरु घासीदास जी के संदेशों को आधुनिक समाज के लिए प्रासंगिक बताया

तीन दिवसीय मेले में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

गौरतलब है कि तीन दिवसीय गिरौदपुरी मेला 4 मार्च से 6 मार्च तक आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

हर साल आयोजित होने वाला यह मेला गुरु घासीदास जी के सत्य, अहिंसा और समानता के संदेश को समाज में फैलाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। प्रदेश और देशभर से हजारों श्रद्धालु गिरौदपुरी धाम पहुंचकर गुरु गद्दी का दर्शन कर रहे हैं

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गिरौदपुरी धाम का महत्व और सरकार की योजनाएं

गिरौदपुरी धाम छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थल है। यह स्थान सतनामी संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु घासीदास जी से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने समाज में समानता, अहिंसा और भाईचारे का संदेश दिया।

राज्य सरकार गिरौदपुरी धाम के विकास को प्राथमिकता दे रही है और यहां सुविधाओं के विस्तार और संरचनात्मक सुधार के लिए लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि भविष्य में गिरौदपुरी धाम को एक आधुनिक और सुव्यवस्थित धार्मिक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा

श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं

गिरौदपुरी मेला समिति और स्थानीय प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं:

  • श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए विश्राम गृह और टेंट सिटी
  • भोजन और पेयजल की विशेष व्यवस्था
  • मेडिकल टीम और एंबुलेंस सेवाएं
  • सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पुलिस बल की तैनाती

गिरौदपुरी धाम में भक्तिमय माहौल

गिरौदपुरी मेला आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम बन गया है। श्रद्धालु गुरु घासीदास जी के चरणों में भजन-कीर्तन और सत्संग कर रहे हैं। मंदिर परिसर में धार्मिक प्रवचन और संगोष्ठी का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें संत-महात्मा गुरु घासीदास जी की शिक्षाओं पर प्रकाश डाल रहे हैं

मुख्यमंत्री की अपील

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों से अधिकाधिक संख्या में गिरौदपुरी मेला में शामिल होने की अपील की और कहा कि यह मेला हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने और गुरु घासीदास जी के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

निष्कर्ष

गिरौदपुरी मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणाओं से यह स्पष्ट है कि सरकार श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक स्थलों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इस तीन दिवसीय मेले में श्रद्धालु भक्ति, शांति और समानता के संदेश को आत्मसात कर रहे हैं, जिससे गुरु घासीदास जी की शिक्षाएं और अधिक प्रभावी रूप से समाज तक पहुंच रही हैं।

विजय शर्मा ने आज कांकेर स्थित काउंटर टेरेरिज्म एंड जंगल वारफेयर महाविद्यालय का दौरा

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