रायपुर। जैव ईंधन उत्पादन
छत्तीसगढ़ ने स्वच्छ पर्यावरण और नेट जीरो एमिशन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में नगरीय ठोस अपशिष्ट से कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन के लिए छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (सीबीडीए), गेल इंडिया लिमिटेड (गेल), भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), और प्रदेश के छह नगर पालिका निगमों के बीच त्रिपक्षीय समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
नगरीय ठोस अपशिष्ट से जैव ईंधन उत्पादन की दिशा में कदम
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा, “छत्तीसगढ़ में विकास की एक और महत्वपूर्ण कड़ी जुड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन की प्रेरणा से राज्य स्वच्छता और ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। इस एमओयू से न केवल कचरे का प्रभावी निपटान होगा, बल्कि ऊर्जा की आवश्यकता भी पूरी होगी।”
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
- ठोस अपशिष्ट और बायोमास का उपयोग:
- 6 नगर पालिका निगमों (अंबिकापुर, रायगढ़, कोरबा, बिलासपुर, राजनांदगांव, और धमतरी) में प्रतिदिन 350 मीट्रिक टन नगरीय ठोस अपशिष्ट और 500 मीट्रिक टन अधिशेष बायोमास का उपयोग किया जाएगा।
- जैव ईंधन उत्पादन:
- इन संयंत्रों से प्रतिदिन लगभग 70 मीट्रिक टन कम्प्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन होगा।
- निवेश और राजस्व:
- परियोजनाओं में लगभग 600 करोड़ रुपये का निवेश गेल और बीपीसीएल द्वारा किया जाएगा।
- उत्पादन और बिक्री से राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 6 करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व प्राप्त होगा।

पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। सह-उत्पाद के रूप में उत्पन्न जैविक खाद से जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा। यह पहल छत्तीसगढ़ को स्वच्छता और पर्यावरणीय स्थिरता के साथ नेट जीरो एमिशन प्राप्ति की दिशा में ले जाएगी।
रोजगार सृजन और सतत विकास
मुख्यमंत्री ने इस एमओयू को रोजगार सृजन और सतत विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “पर्यावरण संरक्षण के इस बड़े उद्देश्य के साथ-साथ इन संयंत्रों के जरिए राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।”
उप मुख्यमंत्री ने की सराहना
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़े निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा, “यह एमओयू नगरों को स्वच्छ और सुविधापूर्ण बनाने के हमारे संकल्प को साकार करेगा। वेस्ट टू वेल्थ की परिकल्पना को साकार करने में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।”
प्रमुख साझेदार संस्थाएं
- छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (सीबीडीए): परियोजना का नेतृत्व कर रहा है।
- गेल इंडिया लिमिटेड और बीपीसीएल: निवेश और तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेंगे।
- छह नगर पालिका निगम: स्थानीय स्तर पर ठोस अपशिष्ट का संग्रह और प्रबंधन सुनिश्चित करेंगे।
एमओयू का महत्व
एमओयू के तहत, नगर पालिका निगम अंबिकापुर, रायगढ़, और कोरबा ने सीबीडीए और गेल इंडिया लिमिटेड के साथ समझौता किया है। वहीं, बिलासपुर, धमतरी, और राजनांदगांव के लिए सीबीडीए ने बीपीसीएल के साथ करार किया है।
नेट जीरो एमिशन की ओर कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना छत्तीसगढ़ को नेट जीरो एमिशन प्राप्ति की दिशा में अग्रसर करेगी। उन्होंने इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सभी संबंधित संस्थाओं को निर्देश दिए।
परियोजना का आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव
- आर्थिक प्रभाव:
- निवेश से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
- उत्पादन से उत्पन्न राजस्व राज्य के विकास में सहायक होगा।
- पर्यावरणीय प्रभाव:
- ठोस अपशिष्ट के प्रभावी प्रबंधन से प्रदूषण में कमी आएगी।
- जैव ईंधन उत्पादन से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटेगी।
सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “यह पहल स्वच्छता, ऊर्जा उत्पादन, और सतत विकास के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगी।”
भागीदारी और नेतृत्व
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने इस पहल को सफल बनाने में सभी संबंधित संस्थाओं के योगदान की सराहना की।
छत्तीसगढ़ की यह पहल न केवल राज्य के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में मदद करेगी, बल्कि यह पूरे देश के लिए स्वच्छता और सतत विकास का एक आदर्श मॉडल पेश करेगी।

