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बदली तस्वीर: जहां बच्चे भेजने से डरते थे, आज वही बना शिक्षा का मॉडल स्कूल

📑 इस लेख मेंरायपुर का एक सरकारी स्कूल जो कभी जर्जर और असुरक्षित था, आज आधुनिक सुविधाओं, स्मार्ट क्लास और बेहतर रिजल्ट के साथ मॉडल स्कूल बन गया…

📅 19 January 2026, 11:42 am अपडेट: 16 May 2026
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रायपुर का एक सरकारी स्कूल जो कभी जर्जर और असुरक्षित था, आज आधुनिक सुविधाओं, स्मार्ट क्लास और बेहतर रिजल्ट के साथ मॉडल स्कूल बन गया है।

रायपुर। कभी जर्जर इमारत, टूटी बेंचें, शिक्षकों की कमी और असुरक्षित माहौल के कारण जिस स्कूल में बच्चों को भेजने से अभिभावक डरते थे, आज वही स्कूल रायपुर जिले का मॉडल स्कूल बनकर शिक्षा की नई मिसाल कायम कर रहा है। सरकारी प्रयासों, स्थानीय प्रशासन की सक्रियता और शिक्षकों की मेहनत से इस स्कूल की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।

कुछ साल पहले तक इस स्कूल की हालत इतनी खराब थी कि छात्र संख्या लगातार घट रही थी। कई कक्षाएं खाली रहती थीं, और आसपास के लोग इसे “बंद होने वाला स्कूल” कहने लगे थे। लेकिन आज यहां स्मार्ट क्लास, आधुनिक लैब, साफ-सुथरे परिसर और अनुशासित वातावरण के कारण दूर-दराज से भी अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला कराने आ रहे हैं।


जर्जर भवन से आधुनिक परिसर तक का सफर

स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले स्कूल भवन की छत टपकती थी, दीवारों में दरारें थीं और शौचालयों की हालत बेहद खराब थी। बरसात के दिनों में कक्षाएं चलाना मुश्किल हो जाता था। न बिजली की ठीक व्यवस्था थी, न पीने के पानी की।

शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए स्कूल के कायाकल्प की योजना बनाई। इसके तहत—

  • पुराने भवन की मरम्मत और रंग-रोगन कराया गया
  • नए कक्ष, प्रयोगशालाएं और पुस्तकालय बनाए गए
  • स्वच्छ शौचालय और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की गई
  • सीसीटीवी और सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए

कुछ ही महीनों में स्कूल का रूप पूरी तरह बदल गया।


स्मार्ट क्लास और आधुनिक पढ़ाई की शुरुआत

कायाकल्प के बाद स्कूल में पढ़ाई का तरीका भी बदल गया। अब यहां—

  • स्मार्ट बोर्ड से डिजिटल पढ़ाई
  • कंप्यूटर लैब में नियमित कक्षाएं
  • विज्ञान और गणित की आधुनिक प्रयोगशालाएं
  • लाइब्रेरी में प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें

उपलब्ध हैं। शिक्षकों को भी नई तकनीक के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके।


बढ़ी छात्र संख्या, लौटने लगा भरोसा

जहां पहले इस स्कूल में मुश्किल से 200 छात्र पढ़ते थे, आज यहां छात्रों की संख्या 600 से अधिक हो चुकी है। आसपास के गांवों और कॉलोनियों से भी अभिभावक अपने बच्चों को यहां भेज रहे हैं।

एक अभिभावक ने बताया,

“पहले डर लगता था कि बच्चे सुरक्षित भी रहेंगे या नहीं। आज यह स्कूल जिले का सबसे अच्छा स्कूल बन गया है। पढ़ाई के साथ अनुशासन और संस्कार भी मिल रहे हैं।”


शिक्षकों की मेहनत बनी बदलाव की सबसे बड़ी ताकत

स्कूल के प्राचार्य और शिक्षकों ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने—

  • नियमित उपस्थिति पर जोर दिया
  • कमजोर छात्रों के लिए विशेष कक्षाएं शुरू कीं
  • खेल, योग और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया
  • अभिभावकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखा

प्राचार्य ने कहा,

“इमारत बदलना आसान है, लेकिन सोच बदलना सबसे जरूरी होता है। हमने बच्चों में आत्मविश्वास पैदा किया और अभिभावकों का भरोसा जीता।”


प्रशासन ने माना मॉडल स्कूल

स्कूल के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए शिक्षा विभाग ने इसे मॉडल स्कूल का दर्जा दिया है। यहां की व्यवस्थाओं को अन्य स्कूलों में भी लागू करने की योजना बनाई जा रही है।

हाल ही में जिला कलेक्टर और शिक्षा अधिकारियों ने स्कूल का निरीक्षण किया और इसे “सरकारी शिक्षा में बदलाव की मिसाल” बताया।


भविष्य की योजना: और ऊंचा लक्ष्य

अब स्कूल प्रबंधन का लक्ष्य है—

  • 100% रिजल्ट हासिल करना
  • खेल और विज्ञान में राज्य स्तर पर पहचान बनाना
  • गरीब और पिछड़े बच्चों को विशेष छात्रवृत्ति दिलाना

ताकि यह स्कूल आने वाले वर्षों में प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ सरकारी स्कूलों में शामिल हो सके।


निष्कर्ष

रायपुर का यह स्कूल आज साबित कर रहा है कि अगर नीयत साफ हो और मेहनत सच्ची हो, तो सरकारी स्कूल भी निजी स्कूलों से बेहतर बन सकते हैं। जहां कभी बच्चों को भेजने से डर लगता था, आज वही स्कूल शिक्षा का मॉडल केंद्र बनकर हजारों परिवारों की उम्मीद बन गया है।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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