छत्तीसगढ़ में जमीन की गाइडलाइन दरों में संशोधन, धमतरी समेत कई जिलों में नई दरें लागू, आदेश जारी, अब रजिस्ट्री नई दरों के आधार पर होगी।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन और संपत्ति की खरीद–फरोख्त करने वालों के लिए एक बार फिर अहम बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने जमीन की गाइडलाइन दरों में संशोधन करते हुए नया आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के तहत धमतरी समेत प्रदेश के कई जिलों में नई गाइडलाइन दरें लागू कर दी गई हैं।
राज्य पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग की ओर से जारी निर्देश के अनुसार संशोधित दरें तत्काल प्रभाव से लागू मानी जाएंगी और अब सभी रजिस्ट्री कार्य इन्हीं नई दरों के आधार पर किए जाएंगे।
क्या होती है गाइडलाइन दर
गाइडलाइन दर वह न्यूनतम मूल्य होता है, जिसके आधार पर किसी जमीन, मकान या भूखंड की रजिस्ट्री की जाती है। इसी दर पर स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क तय होता है। बाजार भाव चाहे जो भी हो, रजिस्ट्री गाइडलाइन दर से कम मूल्य पर नहीं की जा सकती।
किन जिलों में लागू हुई नई दरें
सरकारी आदेश के अनुसार इस बार संशोधन सूची में धमतरी जिला सहित अन्य जिलों के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं। अलग-अलग तहसीलों और नगर क्षेत्रों के लिए दरों में आंशिक संशोधन किया गया है। कुछ क्षेत्रों में दरों में बढ़ोतरी की गई है, जबकि कुछ क्षेत्रों में पूर्व दरों को यथावत रखा गया है।
प्रशासन का कहना है कि क्षेत्रवार बाजार स्थिति, लेन-देन के आंकड़े और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर यह बदलाव किया गया है।
क्यों किया गया दरों में संशोधन
अधिकारियों के मुताबिक लंबे समय से कई क्षेत्रों में जमीन के बाजार भाव और गाइडलाइन दरों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा था। इसके चलते शासन को राजस्व हानि भी हो रही थी और रजिस्ट्री प्रक्रिया में भी असमानता बनी हुई थी।
इसी को ध्यान में रखते हुए जिला स्तर पर गठित समितियों की अनुशंसा के आधार पर दरों में संशोधन प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसे राज्य स्तर से स्वीकृति दी गई।
रजिस्ट्री कराने वालों पर क्या पड़ेगा असर
नई दरें लागू होने के बाद अब जिन लोगों को जमीन, प्लॉट या मकान की रजिस्ट्री करानी है, उन्हें संशोधित दर के अनुसार स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क देना होगा।
यदि किसी क्षेत्र में गाइडलाइन दर बढ़ी है तो वहां रजिस्ट्री की लागत भी बढ़ेगी। वहीं जिन क्षेत्रों में दरों में राहत दी गई है, वहां खरीदारों को कुछ हद तक फायदा मिल सकता है।
रियल एस्टेट और निवेशकों पर प्रभाव
रियल एस्टेट से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि नई दरें पारदर्शिता बढ़ाने में मदद करेंगी। बाजार मूल्य के करीब गाइडलाइन दर होने से अघोषित लेन-देन पर भी अंकुश लगेगा।
हालांकि, जिन क्षेत्रों में दरों में बढ़ोतरी की गई है, वहां अल्पकाल में प्लॉट और मकान की बिक्री पर हल्का असर पड़ सकता है।
तहसील और पंजीयन कार्यालयों को निर्देश
राज्य सरकार द्वारा सभी जिला पंजीयक, उप-पंजीयक और तहसील कार्यालयों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि नई दरों के अनुसार ही दस्तावेजों का पंजीयन किया जाए। किसी भी पुराने मूल्य के आधार पर रजिस्ट्री स्वीकार नहीं की जाएगी।
साथ ही, संशोधित गाइडलाइन दरों की सूची को कार्यालयों के सूचना पटल और विभागीय वेबसाइट पर भी प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आम लोगों को सही जानकारी मिल सके।
आम लोगों को क्या करना चाहिए
जिन लोगों की रजिस्ट्री प्रस्तावित है, उन्हें सलाह दी गई है कि संबंधित उप-पंजीयक कार्यालय या तहसील कार्यालय से अपने क्षेत्र की अद्यतन गाइडलाइन दर की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। इससे स्टाम्प शुल्क और अन्य औपचारिकताओं में किसी प्रकार की परेशानी से बचा जा सकेगा।
सरकार का उद्देश्य
राज्य सरकार का कहना है कि इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य जमीन पंजीयन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यावहारिक और बाजार आधारित बनाना है। इससे राजस्व संग्रह में भी सुधार होगा और रियल एस्टेट सेक्टर में विश्वास का माहौल बनेगा।
धमतरी समेत जिन जिलों में यह नई दरें लागू हुई हैं, वहां आने वाले दिनों में जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री इन्हीं संशोधित गाइडलाइन दरों के आधार पर की जाएगी।

