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खेल प्रतिभा पर ब्रेक, भर्ती पर ब्रेक छत्तीसगढ़ में कोच के 94 में से 84 पद खाली, फाइलों में अटकी आउटसोर्सिंग प्रक्रिया

📑 इस लेख मेंछत्तीसगढ़ में कोच के 94 में से 84 पद खाली हैं। आउटसोर्सिंग भर्ती फाइलों में अटकी होने से खेल प्रशिक्षण और प्रतिभाओं का भविष्य प्रभावित…

📅 3 February 2026, 11:22 am अपडेट: 16 May 2026
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छत्तीसगढ़ में कोच के 94 में से 84 पद खाली हैं। आउटसोर्सिंग भर्ती फाइलों में अटकी होने से खेल प्रशिक्षण और प्रतिभाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में उभरती खेल प्रतिभाओं को संवारने वाली सरकारी खेल अकादमियों और प्रशिक्षण केंद्रों में गंभीर संकट खड़ा हो गया है। राज्य में स्वीकृत 94 प्रशिक्षक (कोच) पदों में से 84 पद वर्षों से खाली पड़े हैं। हालात यह हैं कि कोचों की भारी कमी के कारण कई खेल विधाओं में नियमित प्रशिक्षण प्रभावित हो रहा है और प्रतिभावान खिलाड़ियों का भविष्य अधर में लटक गया है।

राज्य सरकार द्वारा इन पदों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से भरने की तैयारी की गई थी, लेकिन यह प्रक्रिया अब तक फाइलों में ही अटकी हुई है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग से प्रस्ताव आगे बढ़ाए गए, पर विभागीय स्वीकृति और वित्तीय अनुमोदन के अभाव में भर्ती आगे नहीं बढ़ सकी।

मैदान पर खिलाड़ी, लेकिन मार्गदर्शक नहीं

प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित खेल परिसरों, आवासीय खेल अकादमियों और जिला स्तरीय प्रशिक्षण केंद्रों में खिलाड़ी तो नियमित अभ्यास के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें प्रशिक्षित करने वाले योग्य कोच उपलब्ध नहीं हैं। कई केंद्रों में एक ही कोच को एक से अधिक खेलों का जिम्मा सौंपा गया है, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।

खेल संघों और खिलाड़ियों का कहना है कि बिना विशेषज्ञ कोच के राष्ट्रीय स्तर की तैयारी संभव नहीं है।

आउटसोर्सिंग से भरने की थी योजना

खेल विभाग ने रिक्त पदों को स्थायी भर्ती के बजाय आउटसोर्सिंग मॉडल से भरने का प्रस्ताव तैयार किया था। इसके तहत संविदा आधार पर प्रशिक्षकों की नियुक्ति कर प्रशिक्षण व्यवस्था को तुरंत पटरी पर लाने की योजना थी।

बताया जा रहा है कि एजेंसी चयन, मानदेय निर्धारण और कार्यशर्तों को लेकर कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अब तक अंतिम आदेश जारी नहीं हो पाया है।

फाइलें आगे-पीछे घूमती रहीं

सूत्रों के मुताबिक आउटसोर्सिंग भर्ती की फाइलें खेल विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग के बीच लंबे समय से घूम रही हैं। कभी बजट स्वीकृति का मुद्दा अटकता है, तो कभी नियमों और शर्तों में संशोधन के कारण प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

इस देरी का खामियाजा सीधे खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है।

कई खेल विधाएं सबसे ज्यादा प्रभावित

कोचों की कमी का असर एथलेटिक्स, हॉकी, फुटबॉल, कबड्डी, तीरंदाजी, कुश्ती, बैडमिंटन और वॉलीबॉल जैसे प्रमुख खेलों पर साफ दिखाई दे रहा है। कुछ खेल परिसरों में तो वर्षों से नियमित कोच की तैनाती ही नहीं हो सकी है।

जिला स्तर पर प्रशिक्षण शिविर औपचारिकता बनते जा रहे हैं।

खिलाड़ियों और अभिभावकों में नाराजगी

खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों का कहना है कि सरकार खेलो इंडिया, राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और अंतरराज्यीय टूर्नामेंट की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण व्यवस्था कमजोर है। बच्चों में प्रतिभा तो है, लेकिन उन्हें सही दिशा देने वाला प्रशिक्षक नहीं मिल पा रहा।

कई खिलाड़ियों ने निजी कोचिंग पर निर्भर होना शुरू कर दिया है, जो सभी के लिए संभव नहीं है।

खेल संघों ने की जल्द भर्ती की मांग

प्रदेश के खेल संघों और प्रशिक्षकों के संगठनों ने सरकार से जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर स्थायी भर्ती में समय लग रहा है, तो कम से कम आउटसोर्सिंग व्यवस्था को तुरंत लागू किया जाए।

संघों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेश की खेल प्रतिभाएं दूसरे राज्यों की ओर रुख करने को मजबूर होंगी।

विभाग का कहना – प्रक्रिया अंतिम चरण में

खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आउटसोर्सिंग भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही आदेश जारी किए जाएंगे। विभाग का दावा है कि सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, ताकि बाद में किसी तरह की तकनीकी आपत्ति न आए।

हालांकि, खिलाड़ी और प्रशिक्षक इस आश्वासन से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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