छत्तीसगढ़ के 500 से अधिक सरकारी हेल्थ सेंटरों में रीएजेंट और मशीन खराब होने से ब्लड जांच बंद, मरीजों को निजी लैब में महंगी जांच करानी पड़ रही है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की गंभीर स्थिति एक बार फिर सामने आई है। राज्य के 500 से अधिक प्राथमिक, सामुदायिक और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में खून से संबंधित जांच सेवाएं लगभग ठप हो गई हैं। कहीं जरूरी रीएजेंट की कमी है तो कहीं महीनों से जांच मशीनें खराब पड़ी हैं।
राजधानी रायपुर समेत कई जिलों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि मरीजों को सामान्य ब्लड टेस्ट तक के लिए निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है।
सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे गंभीर सवाल
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, हीमोग्लोबिन, शुगर, सीबीसी, मलेरिया, डेंगू और अन्य सामान्य रक्त जांच के लिए जरूरी किट और रसायन (रीएजेंट) कई केंद्रों में लंबे समय से उपलब्ध नहीं हैं।
वहीं कई जगहों पर ऑटो एनालाइजर और सेमी ऑटो मशीनें तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ी हैं।
ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में यह समस्या और भी गंभीर हो गई है, जहां मरीजों के पास निजी जांच केंद्रों तक पहुंचना आसान नहीं होता।
मरीजों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
सरकारी केंद्रों में मुफ्त या नाममात्र शुल्क पर मिलने वाली जांच बंद होने से मरीजों को मजबूरी में निजी लैब में जाना पड़ रहा है।
एक सामान्य ब्लड प्रोफाइल की जांच के लिए अब मरीजों को 300 से 800 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
कम आय वर्ग और ग्रामीण परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च बड़ी परेशानी बनता जा रहा है।
गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत
खून की नियमित जांच गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए बेहद जरूरी होती है।
कई स्वास्थ्य केंद्रों में एनीमिया जांच, ब्लड शुगर और प्लेटलेट काउंट जैसी बुनियादी जांच भी नहीं हो पा रही है।
स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि समय पर जांच न होने से इलाज में देरी हो रही है, जिससे मरीजों की स्थिति और बिगड़ सकती है।
मशीनें खराब, मरम्मत की प्रक्रिया धीमी
जानकारी के मुताबिक कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगी मशीनें लंबे समय से खराब हैं, लेकिन उनके मेंटेनेंस और रिपेयर के लिए टेंडर और तकनीकी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
स्थानीय स्तर पर मशीन ठीक कराने की अनुमति नहीं होने के कारण स्टाफ केवल उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर इंतजार करने को मजबूर है।
रीएजेंट सप्लाई सिस्टम भी बना बाधा
स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत रीएजेंट की केंद्रीय खरीदी व्यवस्था होने के कारण जिलों को अपने स्तर पर सामग्री खरीदने की अनुमति नहीं है।
राज्य स्तर से सप्लाई में देरी होने पर सीधे-सीधे स्वास्थ्य केंद्रों में जांच सेवाएं ठप हो जाती हैं।
कई जिलों ने बार-बार मांग भेजी, लेकिन अब तक नियमित आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है।
निजी जांच केंद्रों की बढ़ी चांदी
सरकारी जांच सेवाएं बंद होने का सीधा फायदा निजी पैथोलॉजी लैब को मिल रहा है।
स्वास्थ्य केंद्रों के आसपास संचालित निजी जांच केंद्रों में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है।
कई मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में डॉक्टर जांच लिखते हैं, लेकिन बाहर जाकर ही टेस्ट कराना पड़ता है।
स्वास्थ्य अमले में भी नाराजगी
स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ डॉक्टर और लैब टेक्नीशियन भी इस स्थिति से असंतुष्ट हैं।
उनका कहना है कि बिना जांच रिपोर्ट के इलाज करना कठिन हो जाता है और मरीजों के सामने बार-बार सफाई देनी पड़ती है।
कर्मचारियों के अनुसार यदि सप्लाई और मशीन रिपेयर की व्यवस्था समय पर होती, तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।
जल्द सुधार का भरोसा, लेकिन कब?
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य स्तर पर रीएजेंट की नई सप्लाई प्रक्रिया चल रही है और मशीनों के मेंटेनेंस के लिए एजेंसी को निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि जमीनी स्तर पर अभी तक कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आया है।
जब तक नियमित सप्लाई और तकनीकी सुधार नहीं होता, तब तक 500 से अधिक हेल्थ सेंटरों में ब्लड जांच सेवाएं पूरी तरह बहाल होना मुश्किल माना जा रहा है।

