रायपुर में संविदा प्रोफेसरों को वेतन 3 लाख रुपए, नियमित प्रोफेसरों को 2.70 लाख रुपए। 15 सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ दी।
संविदा और नियमित कर्मचारियों में वेतन अंतर
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सरकारी अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों में वेतन नीति को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार संविदा प्रोफेसरों का वेतन 3 लाख रुपए मासिक तय किया गया है, जबकि नियमित प्रोफेसरों को केवल 2.70 लाख रुपए मासिक ही वेतन मिलता है।
इस अंतर ने अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों में कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ा दिया है।
सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का विरोध
राज्य के प्रमुख अस्पतालों में कार्यरत 15 सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने वेतन और सेवा नीति में असंतोष के कारण नौकरी छोड़ दी है।
डॉक्टरों का कहना है कि वेतन और पदों के असमान वितरण से उनके पेशेवर सम्मान और काम की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है।
सिस्टम की खामियां सामने आईं
विशेषज्ञों का कहना है कि संविदा और नियमित कर्मचारियों में वेतन और सुविधाओं का अंतर सिस्टम की खामियों को दर्शाता है।
इस वजह से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है और अनुभवी डॉक्टरों का स्वास्थ्य क्षेत्र छोड़ना चिंता का विषय बन गया है।
अस्पताल और मरीजों पर असर
15 सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के इस्तीफे से अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी हो गई है।
इसका सीधा असर मरीजों की सेवाओं पर पड़ रहा है। लोगों को गंभीर मामलों में विशेषज्ञ सलाह और उपचार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
सरकार की भूमिका और समाधान
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार वेतन नीति में सुधार और कर्मचारियों के बीच संतुलन बनाने के लिए उच्च स्तरीय समीक्षा की जा रही है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि समान कार्य और योग्यता वाले कर्मचारियों के बीच उचित वेतन और सुविधाओं का वितरण होना चाहिए, ताकि स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में स्थिरता बनी रहे।
भविष्य की योजना
सरकार का प्रयास है कि जल्द ही वेतन नीति और संविदा व्यवस्था को सुधारकर डॉक्टरों और प्रोफेसरों की भर्ती और सेवाओं को सुचारू बनाया जाए।
इससे अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को पूरा किया जा सकेगा और मरीजों को बेहतर सेवा दी जा सकेगी।

