छत्तीसगढ़ में 71 योजनाओं के तहत दो वर्षों में 29.55 लाख श्रमिकों को 804.77 करोड़ रुपये की सहायता देकर सरकार ने श्रमिक कल्याण को मजबूत किया।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए संचालित योजनाएं धरातल पर प्रभावी साबित हो रही हैं। बीते दो वर्षों में 71 विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के 29,55,254 श्रमिकों को कुल 804.77 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। यह जानकारी श्रम विभाग के अधिकारियों ने साझा की है।
सरकार का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों को आर्थिक संबल देने के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इन योजनाओं से निर्माण श्रमिक, पंजीकृत मजदूर, श्रमिक परिवारों की महिलाएं और बच्चे सीधे तौर पर लाभान्वित हुए हैं।
श्रमिक कल्याण को मिली नई दिशा
राज्य सरकार ने श्रमिकों के हित में योजनाओं को सरल, पारदर्शी और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर लागू किया है। इससे पात्र श्रमिकों तक समय पर लाभ पहुंचाया जा सका है। बीते दो वर्षों में—
- निर्माण श्रमिक सहायता
- शिक्षा सहायता योजना
- प्रसूति सहायता योजना
- विवाह सहायता
- औजार एवं उपकरण सहायता
- पेंशन और बीमा योजनाएं
जैसी योजनाओं के तहत बड़ी संख्या में श्रमिकों को लाभ मिला है।
आर्थिक मदद से सुधरी श्रमिकों की जीवनशैली
804.77 करोड़ रुपये की सहायता राशि से श्रमिक परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिला है। कई श्रमिकों ने इस राशि का उपयोग—
- बच्चों की शिक्षा
- इलाज
- स्वरोजगार
- आवास सुधार
जैसे कार्यों में किया है। सरकार का दावा है कि इससे श्रमिकों की निर्भरता साहूकारों और कर्ज पर कम हुई है।
डिजिटल प्रक्रिया से बढ़ी पारदर्शिता
श्रम विभाग द्वारा योजनाओं का लाभ ऑनलाइन आवेदन और डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से दिया जा रहा है। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई और पात्र हितग्राहियों को सीधे खाते में राशि मिली।
अधिकारियों के अनुसार पंजीकृत श्रमिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे आने वाले समय में और अधिक लोग योजनाओं से जुड़ सकेंगे।
सरकार का फोकस: अंतिम पंक्ति का श्रमिक
राज्य सरकार का कहना है कि उसकी प्राथमिकता समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। श्रमिकों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन देने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। आने वाले समय में नई योजनाओं और मौजूदा योजनाओं के विस्तार की भी तैयारी है।
श्रमिक संगठनों की प्रतिक्रिया
श्रमिक संगठनों ने सरकार की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यदि योजनाओं का क्रियान्वयन इसी तरह पारदर्शी और समयबद्ध रहा, तो इससे श्रमिक वर्ग की सामाजिक स्थिति में बड़ा बदलाव आएगा। हालांकि उन्होंने पंजीकरण प्रक्रिया को और सरल बनाने की मांग भी की है।
निष्कर्ष
71 योजनाओं के जरिए दो वर्षों में 29.55 लाख श्रमिकों को 804.77 करोड़ रुपये का लाभ मिलना छत्तीसगढ़ में श्रमिक कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इससे न केवल श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा मिली है, बल्कि उनका आत्मविश्वास और जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है।

