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मेडिकल कॉलेज फैकल्टी को बड़ी राहत

📑 इस लेख मेंमेडिकल कॉलेज फैकल्टी को एनपीए को लेकर बड़ी राहत। अब हर साल नॉन प्रैक्टिस अलाउंस लेने या छोड़ने का विकल्प मिलेगा, सरकार का अहम फैसला।क्या…

📅 15 January 2026, 3:42 pm अपडेट: 16 May 2026
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मेडिकल कॉलेज फैकल्टी को एनपीए को लेकर बड़ी राहत। अब हर साल नॉन प्रैक्टिस अलाउंस लेने या छोड़ने का विकल्प मिलेगा, सरकार का अहम फैसला।

रायपुर। राज्य के मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत फैकल्टी के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। सरकार ने नॉन प्रैक्टिस अलाउंस (NPA) को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए फैकल्टी सदस्यों को हर साल यह विकल्प देने का फैसला किया है कि वे एनपीए लेना चाहते हैं या नहीं। इस फैसले से मेडिकल शिक्षा से जुड़े हजारों डॉक्टरों को सीधा लाभ मिलेगा और लंबे समय से चली आ रही असमंजस की स्थिति समाप्त होगी।

अब तक मेडिकल कॉलेज फैकल्टी को एनपीए को लेकर एक बार लिया गया निर्णय लंबे समय तक लागू रखना पड़ता था, जिससे कई डॉक्टरों को आर्थिक और पेशेवर दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। नए निर्णय के तहत फैकल्टी हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में अपनी पसंद के अनुसार एनपीए लेने या न लेने का विकल्प चुन सकेंगे।


क्या है एनपीए (Non-Practice Allowance)?

एनपीए वह अतिरिक्त भत्ता है जो सरकारी डॉक्टरों और मेडिकल कॉलेज फैकल्टी को निजी प्रैक्टिस न करने की शर्त पर दिया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि डॉक्टर पूरी तरह से सरकारी सेवा, शिक्षा और मरीजों की देखभाल पर ध्यान केंद्रित करें।


क्यों जरूरी था यह बदलाव?

राज्य के कई मेडिकल कॉलेजों से फैकल्टी सदस्यों द्वारा यह मांग उठाई जा रही थी कि

  • परिस्थितियों के अनुसार एनपीए को लेकर लचीलापन दिया जाए
  • शोध, अकादमिक कार्य या विशेष परिस्थितियों में निजी परामर्श की जरूरत पड़ती है
  • एक बार लिया गया निर्णय बदलने की प्रक्रिया जटिल थी

इन समस्याओं को देखते हुए सरकार ने यह व्यावहारिक और कर्मचारी हितैषी फैसला लिया है।


हर साल मिलेगा विकल्प, प्रक्रिया होगी आसान

नए प्रावधान के अनुसार—

  • फैकल्टी सदस्य हर साल लिखित रूप से यह घोषणा करेंगे कि वे एनपीए लेना चाहते हैं या नहीं
  • यह निर्णय पूरे वित्तीय वर्ष के लिए मान्य होगा
  • वर्ष के बीच में बदलाव की अनुमति नहीं होगी, ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहे

इससे मेडिकल कॉलेज प्रशासन और फैकल्टी दोनों को योजना बनाने में सुविधा होगी।


फैकल्टी में खुशी की लहर

इस फैसले के बाद मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत डॉक्टरों और प्रोफेसरों में खुशी देखी जा रही है। कई फैकल्टी सदस्यों का कहना है कि यह निर्णय यथार्थवादी और समय की मांग के अनुरूप है। इससे न सिर्फ आर्थिक योजना आसान होगी, बल्कि पेशेवर संतुलन भी बेहतर बनेगा।


मेडिकल शिक्षा व्यवस्था को होगा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से—

  • मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की रिटेंशन बेहतर होगी
  • प्रशासनिक विवादों में कमी आएगी
  • शिक्षण और शोध कार्य पर सकारात्मक असर पड़ेगा

यह फैसला राज्य की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।


सरकार की मंशा स्पष्ट

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सरकार डॉक्टरों और फैकल्टी के हितों को प्राथमिकता देते हुए नीतिगत सुधार कर रही है। आने वाले समय में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अन्य नियमों में भी व्यावहारिक बदलाव किए जा सकते हैं।


निष्कर्ष

मेडिकल कॉलेज फैकल्टी को हर साल एनपीए लेने या छोड़ने का विकल्प मिलना एक ऐतिहासिक और राहत भरा फैसला है। इससे डॉक्टरों को आर्थिक स्वतंत्रता के साथ-साथ पेशेवर लचीलापन भी मिलेगा, जो अंततः राज्य की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाएगा।

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स्रोत / और पढ़ें: भारत सरकार पोर्टल

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