राशन कार्ड में एक सदस्य का नाम कटते ही पूरे परिवार का राशन बंद होने से राज्यभर में 12 लाख से अधिक लोग गंभीर परेशानी झेल रहे हैं।
रायपुर। राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़ी एक गंभीर समस्या सामने आई है, जिसने 12 लाख से अधिक लोगों को परेशानी में डाल दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि यदि राशन कार्ड में दर्ज परिवार के किसी एक सदस्य का नाम भी हट जाता है, तो पूरे परिवार को मिलने वाला राशन बंद हो रहा है। इस तकनीकी और प्रशासनिक खामी के कारण गरीब और जरूरतमंद परिवारों को रोजमर्रा की खाद्य आवश्यकताओं के लिए भटकना पड़ रहा है।
⚠️ कैसे पैदा हुई समस्या
खाद्य विभाग द्वारा आधार सीडिंग, ई-केवाईसी और दस्तावेज़ सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में राशन कार्डधारकों के नाम सूची से हटाए गए। कई मामलों में परिवार के किसी एक सदस्य की जानकारी अधूरी या सत्यापन लंबित रहने के कारण पूरे कार्ड को निष्क्रिय कर दिया गया।
इसका सीधा असर यह हुआ कि जिन परिवारों में 4–5 सदस्य हैं, उन्हें भी एक व्यक्ति की त्रुटि के कारण पूरे महीने का राशन नहीं मिल पा रहा।
📊 आंकड़े बता रहे गंभीरता
खाद्य विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, राज्यभर में करीब 12 लाख से अधिक लोग इस समस्या से प्रभावित हैं। ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं। कई जगहों पर उचित मूल्य दुकानों से लोगों को यह कहकर लौटा दिया जा रहा है कि उनका कार्ड अमान्य हो चुका है।
🏠 गरीब परिवारों पर सबसे ज्यादा असर
इस व्यवस्था की खामी का सबसे अधिक असर दिहाड़ी मजदूरों, वृद्धों, विधवा महिलाओं और श्रमिक परिवारों पर पड़ रहा है। जिनके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं है, उनके लिए राशन बंद होना गंभीर संकट बन गया है। कई परिवारों को मजबूरी में उधार लेकर या महंगे दामों पर बाजार से अनाज खरीदना पड़ रहा है।
🗣️ लोगों की शिकायतें
पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने समय पर ई-केवाईसी करवाई थी, फिर भी तकनीकी कारणों से नाम कट गया। कई राशन कार्डधारक महीनों से खाद्य विभाग और जनसेवा केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं मिल पा रहा।
🏛️ प्रशासन की प्रतिक्रिया
खाद्य विभाग का कहना है कि यह समस्या अस्थायी है और जल्द ही सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, जिन परिवारों के राशन कार्ड में त्रुटियां हैं, उन्हें दस्तावेज़ अपडेट और पुनः सत्यापन कराने का अवसर दिया जा रहा है। इसके लिए विशेष शिविर लगाने की भी योजना है।
🔧 समाधान की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी एक सदस्य का नाम हटता है, तो पूरे परिवार का राशन रोकना न्यायसंगत नहीं है। इसके लिए सिस्टम में सुधार कर आंशिक वितरण की व्यवस्था लागू करनी चाहिए, ताकि पात्र परिवार भूखा न रहे।
🔮 आगे क्या
यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो यह समस्या आने वाले महीनों में और विकराल रूप ले सकती है। सामाजिक संगठनों ने भी सरकार से मांग की है कि तकनीकी खामियों के कारण किसी का हक न छीना जाए।

